{"_id":"2972","slug":"Yashwant-Vyas-2972-","type":"story","status":"publish","title_hn":"धैर्यवान की सदा विजय होती है","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
धैर्यवान की सदा विजय होती है
Yashwant Vyas
Updated Wed, 11 Jul 2012 12:00 PM IST
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धर्मग्रंथों में कहा गया है कि धैर्य को आत्मसात करने वाला व्यक्ति परम संतोषी होता है। जो मनुष्य कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपना धैर्य नहीं खोता, वह उस संकट से छुटकारा तो पाता ही है, विजय भी प्राप्त करता है। ऐसा ही एक प्रसंग संत सुकरात का है। उनके घर सत्संग के लिए आने वालों का तांता लगा रहता था। लोग उनके पास आते और अपनी जिज्ञासा शांत किया करते थे। सुकरात की पत्नी कर्कश स्वभाव की थी। वह सोचती थी कि निठल्ले लोग बेकार ही उसके घर अड्डा जमाए रहते हैं। वह समय-समय पर उनके साथ रूखा व्यवहार करती। इस बात से सुकरात को दुख होता।
एक दिन सुकरात लोगों के साथ बैठे बात कर रहे थे कि पत्नी ने उनके ऊपर छत से गंदा पानी फेंक दिया। इतना ही नहीं, वह उन्हें निठल्ला कहकर गालियां भी देने लगी। सत्संगियों को यह अपना अपमान लगा। सुकरात को भी यह व्यवहार बुरा लगा, परंतु उन्होंने बहुत धैर्य के साथ उपस्थित लोगों से कहा, आप सभी ने सुना होगा कि जो गरजता है, वह बरसता नहीं। आज तो मेरी पत्नी ने गरजना-बरसना साथ-साथ कर उपरोक्त कहावत को ही झुठला दिया है।
सुकरात के विनोद भरे इन शब्दों को सुनते ही तमाम लोगों का क्रोध शांत हो गया, और वे पुनः सत्संग में लिप्त हो गए। सुकरात का धैर्य देखकर उनकी पत्नी चकित रह गई। उस दिन से उसने अपना स्वभाव बदल लिया और आने वाले लोगों का सत्कार करने लगी।
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एक दिन सुकरात लोगों के साथ बैठे बात कर रहे थे कि पत्नी ने उनके ऊपर छत से गंदा पानी फेंक दिया। इतना ही नहीं, वह उन्हें निठल्ला कहकर गालियां भी देने लगी। सत्संगियों को यह अपना अपमान लगा। सुकरात को भी यह व्यवहार बुरा लगा, परंतु उन्होंने बहुत धैर्य के साथ उपस्थित लोगों से कहा, आप सभी ने सुना होगा कि जो गरजता है, वह बरसता नहीं। आज तो मेरी पत्नी ने गरजना-बरसना साथ-साथ कर उपरोक्त कहावत को ही झुठला दिया है।
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सुकरात के विनोद भरे इन शब्दों को सुनते ही तमाम लोगों का क्रोध शांत हो गया, और वे पुनः सत्संग में लिप्त हो गए। सुकरात का धैर्य देखकर उनकी पत्नी चकित रह गई। उस दिन से उसने अपना स्वभाव बदल लिया और आने वाले लोगों का सत्कार करने लगी।
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