पेन इंटरनेशनल

Vinit Narain Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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चर्चित एवं विवादास्पद लेखक सलमान रश्दी ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर खतरा बढ़ गया है। रचनात्मक कार्यों के प्रति धार्मिक समूहों की बढ़ती असहिष्णुता भारत की परंपरा के विपरीत है। यह बात उन्होंने पेन वर्ल्ड वॉयस फेस्टिवल ऑफ इंटरनेशनल लिटरेचर के कार्यक्रम में कही।
पेन फेस्टिवल का आयोजन साहित्यिक और मानवाधिकारवादी संगठन पेन इंटरनेशनल द्वारा किया जाता है। पेन इंटरनेशनल की स्थापना 1921 में दुनिया भर के लेखकों के बीच दोस्ती और बौद्धिक सहयोग बढ़ाने, आपसी समझ और विश्व संस्कृति के विकास में साहित्य की भूमिका पर जोर देने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने और लेखकों के उत्पीड़न के खिलाफ एक सशक्त आवाज बनने के लिए की गई थी।

कोर्निस (ब्रिटेन के नस्ली अल्पसंख्यकों की भाषा) उपन्यासकार सीए डॉवसन स्कॉट और मशहूर लेखक जॉन गॉल्सवर्दी ने जब इसकी स्थापना की थी, तो इसका नाम पेन क्लब रखा गया था। इसकी परिकल्पना डॉवसन स्कॉट के इस मत के आधार पर की गई कि अगर दुनिया भर के लेखक एक-दूसरे के साथ हाथ मिलाना सीख सकते हैं, तो विभिन्न देश भी ऐसा कर सकते हैं। हालांकि उस समय इस विचार के लिए अनुकूल माहौल नहीं था, क्योंकि प्रथम विश्वयुद्ध की कड़वाहट मौजूद थी।

पेन इंटरनेशनल एक गैर राजनीतिक एवं गैर सरकारी लेखकों का संगठन है, जिसमें सदस्यों की भूमिका ही अहम होती है। पेन इंटरनेशनल के 101 देशों में 144 केंद्र हैं। कोई भी योग्य लेखक, पत्रकार, अनुवादक आदि इसकी सदस्यता ले सकता है। यह कई तरह के कार्यक्रमों, प्रकाशनों, साहित्यिक पुरस्कारों एवं पेन उत्सवों का आयोजन करता है।

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