समावेश होगा या नहीं होगा

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Palaniappan Chidambram पी. चिदंबरम
Updated Sun, 26 May 2019 09:59 AM IST
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम - फोटो : Facebook

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सत्रह मई, 2019 को मध्य प्रदेश के खरगौन में एक रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से कामरूप तक, पूरा देश कह रहा है अब की बार, तीन सौ पार, फिर एक बार मोदी सरकार। सेफोलॉजी (चुनाव विश्लेषण) के लिहाज से वह सही थे, मगर ज्योग्राफी (भूगोल) के लिहाज से गलत। अंतिम तालिका ने साबित कर दिया कि उनकी चुनावी निशानेबाजी को पूरे दस में दस अंक मिले।
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लिहाजा, मोदी, भाजपा और इस पार्टी के साथ ही उसके सहयोगी दलों के लाखों कार्यकर्ताओं के लिए बधाइयों का तांता लगा हुआ है। अब जबकि वह अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करने जा रहे हैं, मैं कामना करता हूं कि प्रधानमंत्री सरकार के संचालन और लोगों की सेवा करने में सफल हों।


नतीजों से दो दिन पहले 19 मई को एग्जिट पोल के नतीजे आए और उनमें से कम से कम दो ने भाजपा को 300 सीटें, उसके सहित गठबंधन को 350 सीटें और कांग्रेस को करीब पचास सीटें दी थीं। इन एग्जिट पोल ने आंकड़ों के नमूने और चुनावी भविष्यवाणियों को लेकर कुछ विश्वास कायम किया है!

प्रतिद्वंद्वी दृष्टिकोण

आज एक नई यात्रा शुरू हो रही है। ऐसी यात्रा जो कभी खत्म नहीं होगी। पांच वर्ष के अंतराल में थोड़ी देर का विराम है, और यात्रा फिर शुरू हो जाएगी। भारत पर शासन करने के अधिकार को लेकर पार्टी-दावेदारों में मतभेद हैं और होंगे। ये मतभेद बहु-दलीय लोकतंत्र की पहचान हैं, विशेष रूप से बहुवचन और विविधता भरे समाज वाले जीवंत लोकतंत्र की। कोई पार्टी इस विविधता को स्वीकार करने से इनकार कर सकती है और फिर भी एक राष्ट्रीय चुनाव जीत सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यह विविधता वास्तविक नहीं है।

भारत को लेकर भाजपा का अपना दृष्टिकोण है : एक राष्ट्र, एक इतिहास, एक संस्कृति, एक विरासत, एक नागरिक संहिता, एक राष्ट्रीय भाषा और इस 'एकात्मकता' के ऐसे कई अन्य पहलू। कांग्रेस का अपना एक अलग दृष्टिकोण है : एक राष्ट्र, इतिहास की विभिन्न व्याख्याएं, अनेक उप इतिहास, अनेक संस्कृतियां, बहुल नागरिक संहिताएं, अनेक भाषाएं और विविधता के अन्य अनेक पहलू, जिनमें एकता की कामना हो। क्षेत्रीय दलों की अपनी दृष्टि है : राज्य वार दृष्टिकोण में अंतर हो सकता है, लेकिन उनके राजनीतिक बयानों को एक सूत्र जोड़े रखता हैः वह यह कि उस राज्य के लोगों का इतिहास, भाषा और संस्कृति सर्वोच्च सम्मान के हकदार हैं और खासतौर से उस राज्य की भाषा को पोषित करना होगा और प्रमुखता देनी होगी।
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