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विश्व धूम्रपान निषेध दिवस: नशे की अंधी गलियों में भटकती युवा आबादी, कौन लेगा सुध?

Mon, 31 May 2021 10:31 AM IST
Narednra Bharati नरेंद्र भारती
Updated Mon, 31 May 2021 10:31 AM IST
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World No-Tobacco Day increasing trend of intoxication in youth
देश में हर साल लाखों युवा नशे के कारण असमय ही मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं। - फोटो : Pixabay

बेशक 31 मई 2021 को विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाया जा रहा है मगर ऐसे दिवस औपचारिकता भर ही रह गए हैं। युवा पीढ़ी नश की गुलाम हो चुकी है। नशे की अंधी गलियों में भटक चुके युवाओं को बाहर निकालना हर भारतीय का नैतिक कर्तव्य है।

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देश में हर साल लाखों युवा नशे के कारण असमय ही मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं। धूम्रपान निषेध दिवस पर एक संकल्प लेना होगा। नशे की सब कुछ मान बैठी है।

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आज छोटे-छोटे बच्चे नशे के आदी हो चुके है। अभी उनके दूध के दांत भी नही। टूटे है कि मगर ऐसे नशे करते है कि रुह कापती है। हर साल लाखों लोग नशें के कारण अपना जीवन दांव पर लगा रहे है।

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कोरोना का संकट और भयावह 
आज विश्व कोराना महामारी से जूझ रहा है। मानवीय त्रासदियां थमने का नाम नहीं ले रही है। लाशों के ढेर लग रहे है। दफनाने के लिए दो गज जमीन भी नसीब नहीं हो रही है। चारों तरफ कोराना वायरस की तबाही का मंजर है। वायरस जिंदगियां छीनता जा रहा है। समूचे विश्व में महामारी का गंभीर संकट है अब तक लाखों लोग इस महामारी के कारण मारे जा चुके है।

भारत में भी लाखों लोग इस महामारी का दंश झेल चुके हैं। अभी भी लोग संक्रमित हो रहें है। यह संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। मई माह में संक्रमण के मामलों में बेतहाशा वृद्धि बहुत ही भयानक है। प्रतिवर्ष लाखों लोग नशे के कारण अकाल मौत मर रहे है। आजकज चिटटे का नशा किया जा रहा है। देश के हर राज्य में यह नशा किया जा रहा है। हर रोज चिटटे व हैरोइन के अवैध कारोबार करने वालों का पकड़ा जा रहा है।

World No-Tobacco Day increasing trend of intoxication in youth
अगर सरकारों ने अभी भी कुभंकरणी नींद नहीं तोड़ी, तो फिर सब कुछ लुट जाएगा। - फोटो : Pixabay

युवाओं को मारता नशा, बर्बाद होती जिंदगियां
नशा आज एक फैशन बन चुका है। नशे के कारण आज कई घरों के चिराग बूझ गए, तो कुछ जेलों में चक्की पीस रहें है। जेलों में सड़ रहे है। अक्सर देखा गया है कि उच्च घरानों के युवा मंहगें नशें कर रहे है। नशें के बिना रह नहीं सकते। जिंदगियां दाव पर लगा चुके है। जिंदा लाशें बनते जा रहे है। लाईलाज बीमारियों से ग्रस्त होते जा रहे हैं।

आज लाखों युवा नशे के कारण मर चुके हैं। नशे की दलदल में धसतें जा रहे हैं। इस दलदल से निकला बहुत ही मुशिकल है। आज मां-बाप दुखी हैं कि उनके चिराग नशे की गिरफत में आते जा रहे हैं। आज नशे के सौदागर युवाओं के भविष्य खराब करते जा रहे हैं। अगर युवा ही नशे का प्रयोग करेगा, तो आने वाला कल अंधकारमय ही होगा। युवा के कंधों पर देश टिका है, मगर यह कंधें थक चुके है। नसों में नशा भर चुका है। जवान काया शिथिल होती जा रही है।

नशे के कारण सड़क हादसों में हर साल लाखों युवक बेमौत मारे जा रहे हैं। सरकारों को राजस्व प्राप्त होता है। सरकारों को देश के कर्णधारों की कोई फिक्र नहीं हेैं। राजस्व से ही खजाना भरा जा रहा है। युवा मर रहे है। चंद मिनटों के मजे के लिए अनमोल जीवन बरबाद कर रहे हैं। युवतियां भी नशे की दलदल में फंस चुकी हैं।

समाचार पत्रों में डरावने समाचरों से पता चलता है कि आज लड़कियां भी चार कदम आगे जा चुकी हैं। सिगरेट या अन्य चरस जैसे नशे शरीर के अंगों को प्रभावित करते हैं। कैंसर और तपेदिक से मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है। अगर इन नशे को नहीं रोका, तो आने वाले साालों में भयावह परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
 

नशा समाज के लिए नासूर बन गया है। नशे को मिटाने की कसम लेनी होगी। आज नशे के कारण इकलौते बच्चे मारे जा रहे हैैं। नशे के लिए पैसा ना मिलने केे लिए मां-बाप को मौत के घाट उतारा जा रहा है। अगर सरकारों ने अभी भी कुभंकरणी नींद नहीं तोड़ी, तो फिर सब कुछ लुट जाएगा। नशे के कारण अपराधों में इजाफा हो रहा है। समाज को इस बुराई पर मंथन करना होगा, ताकि चिरागों को बचाया जा सके।

तंबाकू उत्पादों पर रोक लगानी होगी। अगर सरकारें चाहे तो क्या नहीं कर सकती? राजस्व के लिए और भी साधन है। ऐसा राजस्व किस काम का, जो युवाओं की मौत से प्राप्त हो रहा है। युवाओं की बलि ली जा रही है। नशे का कारोबार करने वालों पर दंडात्मक कारवाई करनी होगी। स्कूलों और कॉलेजों के सौ मीटर के दायरे में धूम्रपान बेचने वालों को सजा दी जाए, जो चंद चांदी के सिक्कों की कमाई के लिए युवाओं का जीवन लील रहे हैं। लावारिस लाशें मिल रही हैं।

World No-Tobacco Day increasing trend of intoxication in youth
नशा करने वालों को समाज से बहिष्कृत किया जाए, उनका हुक्का पानी बंद किया जाए। - फोटो : अमर उजाला

युवाओं को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। नशें के कारण दंगें व फसाद होतें जा रहे है। नशें में अंधा होकर दुष्कर्म किए जा रहे हैं। युवा अनमोल पूंजी है। युवा देश की धरोहर है। समाज में एक कमेटी गठित करनी होगी, तभी यह नशा बंद हो सकता है। नशा करने वालों को समाज से बहिष्कृत किया जाए, उनका हुक्का पानी बंद किया जाए, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और युवाओं का जीवन बचाया जा सके।

सामाजिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ अभियान चलाने होगें। युवा ही देश को आगे ले जा सकते है। समय अभी संभलने का है। समाज को नशें के विरुद्ध आवाज उठानी होगी, ताकि युवाओं का भविष्य संवर सके। अगर समाज अब भी नहीं जागा, तो युवा नशें की दलदल में धंसता जाएगा। समाज से इस बुराई को जड़ से मिटाना होगा।
 

केन्द्र सरकार को नशे को बंद करने के लिए कानून बनाना चाहिए। हर राज्यों की सहभगिता हो, तो नशे पर लगाम लग सकती है। देश में नशा मुक्ति केंद्र खोलने चाहिए, ताकि युवाओं की काउंसलिग की जा सके। सरकार को बिना समय गंवाए इस पर रोक लगानी होगी, ताकि युवाओं की पीढ़ियां बचाई जा सके। देश की आने वाली पीढ़ियों को नशे को त्यागना होगा। जीवन को मत गंवाओ, जीवन एक बार ही मिलता है। नशे का खात्मा करना होगा, तभी ऐसे दिवसों की सार्थकता होगी। यह देशहित में है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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