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होम्योपैथी दिवस विशेष: हैनीमैन ने दी विश्व को एक नई चिकित्सा पद्धति

Sun, 09 Apr 2023 05:34 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Sun, 09 Apr 2023 05:34 PM IST
सार

फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन की जयंती पर हर साल 10 अप्रैल को वर्ल्ड होम्योपैथी डे मनाया जाता है। भारत सहित कई देशों में यह चिकित्सा पद्धति काफी लोकप्रिय है।

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World Homoeopathy Day 2023 Significance, Theme, History, Meaning Know Why It Is Celebrated
World Homeopath Day 2023 - फोटो : Istock

विस्तार

भारत सहित कई देशों में ऐलापैथ जैसी चिकित्सा पद्धति का विकल्प देने वाले चिकित्सक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन की जयंती पर हर साल 10 अप्रैल को 'वर्ल्ड होम्योपैथी डे' मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा में होम्योपैथी के योगदान के बारे में जागरूकता पैदा करना है। यह चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. सैमुअल हैनीमैन के योगदान का सम्मान करने का भी दिन है।

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यद्यपि हैनीमैन की इस पद्धति की कारगरता और आरोग्यता के बारे में विभिन्न पद्धतियों के चिकित्सकों में मतभेद अवश्य रहे फिर भी विश्व में इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई, खासकर भारत में जहां ऐलापैथी का सशक्त विकल्प आयुर्वेद मौजूद है, यहां अन्य देशों की तुलना में यह सर्वाधिक प्रचलित हुई। यह वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली शरीर की अपनी उपचार प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करती है।

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18वीं सदी से चली आ रही होम्योपैथी

होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति शरीर की अपनी हीलिंग प्रक्रिया को जागृत करने के लिए प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करती है। जिसके सिद्धान्तों को जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनीमैन ने 18वीं शताब्दी के अंत में विकसित किया था। यह ‘‘लाइक क्योर लाइक’’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि एक पदार्थ जो एक स्वस्थ व्यक्ति में लक्षण पैदा कर सकता है, वह एक बीमार व्यक्ति में समान लक्षणों को ठीक कर सकता है।

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विश्व होम्योपैथी दिवस पर, लोगों को होम्योपैथी के लाभ के बारे में शिक्षित करने के लिए विभिन्न सेमिनार, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। होम्योपैथी ने चिकित्सा के वैकल्पिक रूप में वर्षों से लोकप्रियता हासिल की है और इसकी प्रभावशीलता कई अध्ययनों द्वारा साबित हुई है।

डॉ. सैमुअल हैनीमैन (1755-1843) एक जर्मन चिकित्सक और होम्योपैथी के संस्थापक थे। हैनीमैन ने 1779 में एर्लांगेन विश्वविद्यालय से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की और जर्मनी के विभिन्न हिस्सों में चिकित्सा का अभ्यास किया। हैनीमैन का अपने समय के कठोर चिकित्सा उपचारों से मोहभंग हो गया था। जिसमें अक्सर रक्तस्राव, शुद्धिकरण और पारा जैसे विषाक्त पदार्थों का उपयोग शामिल था।

उन्होंने शरीर की अपनी हीलिंग प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के तरीके के रूप में पौधों और खनिजों जैसे प्राकृतिक पदार्थों के उपयोग के साथ प्रयोग करना शुरू किया। ’ऑर्गन ऑफ द मेडिकल आर्ट’ यह हैनीमैन की सबसे प्रसिद्ध उपलब्धि है और होम्योपैथी के सिद्धांतों और प्रथाओं को रेखांकित करती है। ऑर्गनॉन ग्रन्थ पहली बार 1810 में प्रकाशित हुआ था और इसे कई बार संशोधित किया गया।

दो यूनानी शब्दों से बना है होम्योपैथी

होम्योपैथी दो यूनानी शब्दों, होमियोस और पथोस का मिश्रण है। होमियोस का अर्थ है समान और पथोस का अर्थ है दुख। दूसरे शब्दों में, होम्योपैथी उपचार के साथ रोगों के इलाज की एक प्रणाली है। होम्योपैथिक उत्पाद पहाड़ की जड़ी-बूटियों, सफेद आर्सेनिक जैसे खनिजों, जहर आइवी, और कुचल मधुमक्खियों जैसे जीव जन्तुओं से बनाए जाते हैं। ये होम्योपैथिक उत्पाद चीनी छर्रों, मलहम, गोलियों, जैल, क्रीम और बूंदों के रूप में होते हैं। उपचार प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाता है। 
 

World Homoeopathy Day 2023 Significance, Theme, History, Meaning Know Why It Is Celebrated
World Homeopath Day 2023 - फोटो : Istock

कुछ रोगों में काफी कारगर है होम्योपैथी

होम्योपैथी चिकित्सकों का मत है कि इस पद्धति का उपयोग अक्सर एक व्यापक श्रेणी की बीमारियों के इलाज के लिए दवा के पूरक या वैकल्पिक रूप में किया जाता है। फिर भी कुछ बीमारियों में इसे ज्यादा कारगर माना जाता है। इन बीमारियों में एलर्जी, दमा, वात रोग, चिंता और अवसाद, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम, माइग्रेन और सिरदर्द, पाचन विकार, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस), त्वचा की स्थिति (जैसे एक्जिमा और सोरायसिस), मासिक धर्म संबंधी विकार, जैसे मासिक धर्म में ऐंठन और अनियमित अवधि, श्वसन संक्रमण, जैसे सर्दी और फ्लू आदि।

लेकिन अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए उपचार का सर्वोत्तम तरीका निर्धारित करने के लिए एक योग्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से परामर्श करना जरूरी है। गौरतलब है कि होम्योपैथी की स्वीकृति और लोकप्रियता देश और क्षेत्र के आधार पर काफी भिन्न होती है, और स्वास्थ्य देखभाल के वैध रूप के रूप में इसका उपयोग और मान्यता अभी भी दुनिया के कुछ हिस्सों में बहस और विवाद का विषय है।  

कई देशों में प्रचलित है होम्योपैथी

होम्योपैथी दो शताब्दियों से चल रही है और आज तक मानवता की सेवा करती आ रही है। यह दुनिया के कई देशों में प्रचलित है और इसने भारत में भी सर्वाधिक लोकप्रियता हासिल की है। होम्योपैथी को एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के तौर पर भारत, ब्राजील और जर्मनी जैसे कुछ देशों में व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है ।

जर्मनी में भी होम्योपैथी लोकप्रिय है, यहां 6,000 से अधिक होम्योपैथिक डॉक्टर बताए जाते हैं और वहां वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में होम्योपैथी का उपयोग करने की एक लंबी परंपरा है। अन्य देश जहां होम्योपैथी लोकप्रिय है, उनमें फ्रांस, अर्जेंटीना, मैक्सिको, इटली और स्पेन शामिल हैं। जबकि कई अन्य देशों में, होम्योपैथी व्यापक रूप से स्वीकृत या प्रचलित नहीं है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में होम्योपैथी को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है और इसे दवा का एक पूरक और वैकल्पिक रूप माना जाता है।  

भारत और ब्राजील में है सर्वाधिक लोकप्रिय

भारत में होम्योपैथी के उपयोग का एक लंबा इतिहास रहा है। अनुमान है कि भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग होम्योपैथी का उपयोग अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में 200,000 से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर और 7,000 से अधिक होम्योपैथिक अस्पताल और औषधालय हैं।

सरकारें स्वयं होम्योपैथिक अस्पताल चलाती हैं। भारत के बाद ब्राजील एक ऐसा देश है जहां होम्योपैथी काफी लोकप्रिय है और व्यापक रूप से प्रचलित है, जिसमें 15,000 से अधिक पंजीकृत होम्योपैथिक डॉक्टर और बड़ी संख्या में होम्योपैथिक फार्मेसी हैं।  

राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान देता है डिग्री

भारत में राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संगठन है। इसकी स्थापना 10 दिसंबर 1975 को कोलकाता में हुई थी और अब यह आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन है। यह संस्थान 2003-04 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध था और 2004-05 के सत्र से पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध है और होम्योपैथी में डिग्री पाठ्यक्रम संचालित करता है।

बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी इस संस्थान द्वारा प्रस्तावित डिग्री पाठ्यक्रमों में से एक है। यह पाठ्यक्रम 1987 से शुरू किया गया है और इसकी अवधि साढ़े पांच साल है, जिसमें एक साल की इंटर्नशिप भी शामिल है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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