World earth day 2019ः पृथ्वी पर मंडरा रहा है ये बड़ा खतरा
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पांच दशक पहले 22 अप्रैल, 1970 को पहली बार पृथ्वी दिवस मनाया गया था, ताकि पर्यावरण को हो रहे नुकसान के रूप में हमारे अपने ग्रह के भविष्य को मिल रही चुनौतियों की ओर गंभीरता से ध्यान आकर्षित किया जा सके। यहां तक कि उस समय भी बेहिसाब ढंग से लैंड यूज बदले जा रहे थे, प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, पारिस्थितिकी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में अतिक्रमण, वन्यजीवों के प्रति अपराध और अंधाधुंध विकास शुरू हो चुका था, जिससे पृथ्वी के सीमित संसाधनों को नुकसान पहुंचने लगा।
क्यों नहीं है पृथ्वी की चिंता?
दुर्भाग्य से ये सारी चिंताएं और मुद्दे कम होने के बजाय बरस दर बरस कई गुना बढ़ते चले गए। यह ग्रह, जिसे हम अपना घर कहते हैं, नष्ट हो रहा है। पृथ्वी सचमुच गंभीर संकट से गुजर रही है। लेकिन यह सुन कौन रहा है? धरती की सर्वाधिक बुद्धिमान प्रजाति होने के बावजूद हम हमेशा की तरह 'यह सब तो चलता रहता है' वाले रवैये पर कायम हैं। पर्यावरण, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधन हमारी प्राथमिकताओं में सबसे निचले क्रम पर हैं, मगर हमारा ग्रह आज किस संकट में है और इसका हम पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह सवाल मौजूं हो गया है। विकास के नाम पर बड़े औद्योगिक घराने और नेतागण धरती का उसकी क्षमता से परे जाकर शोषण कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, गर्म होते हमारे महासागर, समुद्र तल का बढ़ता स्तर और बढ़ती अम्लीयता आज ऐसी सच्चाई है, जिससे हमारी खाद्य सुरक्षा और धरती के पूरे जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरण में बदलाव के मिल रहे हैं संकेत
ऑस्ट्रेलिया की प्रवाल भित्ति की महान दीवार के एक बड़े हिस्से को पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। इसी तरह से दुनिया भर के 70 फीसदी प्रवाल या मूंगा को बढ़ते तापमान से नुकसान हो सकता है। जबकि कोरल या प्रवाल मछली की चार हजार प्रजातियों के प्रजनन का आधार हैं। मछली एक बड़ा खाद्य संसाधन है। मछली उद्योग हमारे समुद्रों से सालाना 12 करोड़ टन मछली निकालता है। मगर यह दुखद है कि इसमें से चार करोड़ टन बाई-कैच यानी ऐसी प्रजातियां भी बाहर आ जाती हैं, जिन्हें दोबारा फिर समुद्र में डालना पड़ता है।
जाल में फंसी ये ऐसी मछलियां या समुद्री प्रजातियां होती हैं, जिनसे बहुत लाभ नहीं होता। इसके बाद झींगा और अन्य आकर्षक प्रजाति के लिए दोबारा नेट डालना पड़ता है। सालाना मरी मछलियों और मृत समुद्री प्रजातियों का 30 अरब किलो से भी ज्यादा का ढेर दोबारा समुद्र में डाल दिया जाता है। इनमें हजारों की संख्या में डॉल्फिन, सील, कछुए और व्हेल शामिल होती हैं। मछली पकड़ने में गिरावट का असर दुनिया भर के कई गरीब तटीय मछली पकड़ने वाले समुदायों द्वारा महसूस किया जा रहा है।
खाद्य सुरक्षा को एक गंभीर खतरा समुद्रों में अम्ल की मात्रा बढ़ने से जुड़ा हुआ है। बिना ट्रीटमेंट के जो गंदगी और मानव अपशिष्ट तथा प्लास्टिक समुद्र में बहा दिए जाते हैं, यह उसका नतीजा है। रोजाना अरबों गैलन गंदगी समुद्र में बहा दी जाती है। हमारे समुद्रों में जाने वाला प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने वाला सबसे बड़ा कारक है। प्लास्टिक का उपयोग शुरू हुए मुश्किल से पचास वर्ष हुए हैं, लेकिन इस ग्रह में उसी की वजह से सबसे अधिक प्रदूषण होता है। इस ग्रह का हर कोना एक बार इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के कूड़े से प्रदूषित है।
बढ़ रहा है प्रदूषण, कचरे से भर रहे हैं समुद्र
चीन, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस और वियतनाम दुनिया में प्लास्टिक से सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाले देशों में शुमार हैं। समुद्रों का तकरीबन एक तिहाई हिस्सा प्लास्टिक की गंदगी से अटा पड़ा है। समुद्र का पानी प्लास्टिक को विघटित कर देता है। प्लास्टिक के छोटे-छोटे कणों और अणुओं को मछलियां खा जाती हैं और इनके अंश मछलियों के शरीर में पाए गए हैं। इस तरह प्लास्टिक हमारी खाद्य शृंखला में शामिल होकर हमारी डाइनिंग टेबिल तक पहुंच जाता है। इससे मानव जीवन के लिए खतरा बढ़ता जा रहा है।
रोजाना अरबों गैलन बिना ट्रीटमेंट की गई गंदगी समुद्र में प्रवेश कर जाती है। जैसा कि ऊपर लिखा है कि ये समुद्र में अम्लता तो बढ़ाती ही है, इससे समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचता है। वैज्ञानिकों का आकलन है कि यदि इसी दर से हम समुद्र को प्रदूषित करते रहे और नुकसान पहुंचाते रहे, तो 2048 तक समुद्र से मछलियां गायब हो जाएंगीं। तमाम तरह की प्रौद्योगिकी विकसित करने के बावजूद हमारा लालच कम नहीं हुआ है, बल्कि बढ़ता ही जा रहा है।
कुछ और की मनुष्य की इच्छा ने हमें गर्त के मुहाने पर ला खड़ा किया है। हमारा ग्रह हर वर्ष दस हजार प्रजाति के पौधों और जीव-जंतुओं को खो देता है। ब्रह्मांड में पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जिसे जीवन उपहार में मिला है। और अधिक की हमारी चाहत के बीच, हम यह भूल गए हैं कि दुनिया के सारे अमीर मिलकर पानी की एक बूंद तक पैदा नहीं कर सकते।
हम सबके लिए जरूरी है कि पर्यावरण सुरक्षित रहे। जरूरत है एकजुट प्रयास की, ताकि पृथ्वी का संतुलन और पृथ्वी के अस्तित्व को विप्लवों से बचाया जा सके।
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