विश्व साइकिल दिवस 2021: कोरोना काल और साइकिल, एक साथी जो सबसे ज्यादा भरोसेमंद रहा..!
- यूरोपीय देशों में साइकिल का रखरखाव बहुत ही आसान है।
- साइकिल अब भी बेहद ही किफायती दाम में मिल जाती है।
- रोजाना साइकिल चलाने से शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
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विस्तार
कल मैं अपने नज़दीकी औद्योगिक क्षेत्र में सड़क किनारे बैठे महंगी-महंगी कारों, ट्रकों को गुज़रते देख रहा था। बीच-बीच में कुछ लोग अपनी साइकिलों में टिफ़िन टांगे चौराहें पर बायां हाथ लम्बा कर इन तेज़ दौड़ते वाहनों के बीच सड़क पार कर रहे थे, मुझे अब सड़कों में बहुत कम दिखने वाले यह साइकिल वाले लोग इन आकर्षक वाहनों के बीच में खटक रहे थे।
इस बीच ही एक बूढ़ा सा व्यक्ति सड़क पार करते तेज़ चलती कार से टकरा गिर पड़ा और फिर मैंने आसपास के लोगों के साथ मिलकर उसे अस्पताल पहुंचाया। उसकी टांग में फ्रेक्चर था, फैक्ट्री में काम कर अपने परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ करता वह व्यक्ति एक महीने के लिए बिस्तर पर पहुंच गया।
- इस बीच मुझे कुछ महीने पुराना किस्सा याद आ गया
कोरोना काल से पहले मुंबई से स्थान्तरित हो चंडीगढ़ आए अपने भाई साहब से मेरी चंडीगढ़ के परिवहन साधनों पर चर्चा हो रही थी। चंडीगढ़ में मुंबई लोकल की तरह परिवहन का सस्ता और सुलभ साधन नही है।
कार, स्कूटी के विकल्प पर विचार किया जा रहा था पर चीनियों से उपहार में आई कोरोना महामारी ने देश की सभी योजनाओं की तरह हमारी भी इस योजना पर पानी फेर दिया। सार्वजनिक परिवहन में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए काम पर जाने के लिए भाई साहब ले आए एक चमचमाती नई साइकिल।
कोरोना काल न होता तो शायद उनकी इस पाषाण युग की पसंद का मैं जमकर उपहास बनाता पर वक़्त की नज़ाकत को भांपते हुए मुझे उनकी समझदारी से ईर्ष्या होने लगी। कोरोना से एकमात्र बचाव सामाजिक दूरी के लिए इससे अच्छा परिवहन साधन और कुछ हो ही नहींं सकता।
यूरोपीय देशों में 18वीं शताब्दी के दौरान जन्म ले चुकी साइकिल का रखरखाव बहुत ही आसान है। साइकिल की चेन में समय-समय पर तेल डालते रहने, पहियों में समय से हवा भरते रहने, समय-समय पर साइकिल के नट बोल्टों को कस कर, उसके ब्रेकों का ध्यान रख, समय से सफाई कर उसे जंग मुक्त रख कर और पहिए का पंक्चर बनाने का ज्ञान रख लम्बे समय तक साइकिल को प्रयोग में लाया जा सकता है।
मोटर साइकिल, कारों के दाम समय के साथ आसमान छूने लगे पर साइकिल अब भी बेहद ही किफायती दाम में मिल जाती है। गरीब इसे लेकर घरेलू सामान बेचने के लिए फेरी लगाकर या इससे सम्बन्धित कोई अन्य स्वरोज़गार अपना कर अपने परिवार का भरण-पोषण आसानी से कर सकता है। सुबह फैक्ट्री जाने के लिए साइकिल की सवारी करते सड़कों पर लम्बी श्रृंखला में जाते मज़दूरों के लिए उनका यह वाहन वरदान है।
कोरोना ने दिखा दिया है कि कैसे प्रकृति मनुष्य की रफ्तार को कभी भी रोक सकती है...
लॉकडाउन में हम यह देख चुके हैं कि बिना वाहनों और फैक्ट्रियों के चले यह हवा कितनी शुद्ध रहती है। साइकिल के प्रयोग से पृथ्वी के लिए गम्भीर होते जा रहे वायु प्रदूषण की इस समस्या पर लगाम लगाई जा सकती है।
बुज़ुर्ग, जवान और बच्चें हर आयु वर्ग के लोग साइकिल की सवारी कर खुद को चुस्त और दुरस्त रख सकते हैं। साइकिल की सवारी मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से मज़बूत बनाने का कार्य करती है।
इसमें अन्य व्यायामों की तरह ना चोटिल होने का डर है औऱ ना ही इसे चलाने में किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की जानकारी की आवश्यकता।
रोज़ाना साइकिल चलाने से शरीर की मांसपेशियां मज़बूत होती हैं और शरीर में वसा भी नहींं बनती। उच्च रक्तचाप और ह्रदय रोगों को साइकिल की सवारी पीछे छोड़ देती है।
शोध में सामने आया है कि निरंतर साइकिल चलाने वालों को मधुमेह और हृदयाघात का खतरा अन्य लोगों से कम रहता है।
यह सच है कि साइकिल को वक़्त ने चुनौती दी है। सड़क पर दौड़ती बसें, ट्रक, कार, महंगी मोटरसाइकिल साइकिल चलाने वाले को रफ़्तार में कहीं पीछे छोड़ देती हैं। इस तेज़ रफ़्तार के साथ चल रही ज़िंदगी में हर किसी को वक्त की कमी है। मनुष्य ने विकास के पीछे अंधी दौड़ लगायी हुई है। उसमें साइकिल के सफ़र में लगता ज्यादा समय मनुष्य को चुभने लगता है।
पर कोरोना ने दिखा दिया है कि कैसे प्रकृति मनुष्य की रफ़्तार को कभी भी रोक सकती है और वैसे भी मेट्रो स्टेशनों की भीड़, बसों की दमघोंटू भीड़ और असुरक्षित तेज़ दौड़ती साइकिल से दूर एक साइकिल के सफ़र का आनन्द ही कुछ और है।
साइकिल चलाते ना ऑटो का कानफोड़ू संगीत है ना एक दूसरे को घूरते सफ़र करते लोगों के बनावटी चेहरे। वहांं है तो सिर्फ आपका सुधरता स्वास्थ्य और आपकी खुद से होती बात जो आज के सामाजिक परिदृश्य में कहीं खो सी गई है।
साइकिल सवारों के लिए मुख्य सड़क से अलग लेन का निर्माण इस सफर को सड़क पर तेज़ दौड़ते वाहनों से सुरक्षित बना सकता है। साइकिल सवारी के दौरान हेल्मेट का प्रयोग अनिवार्य करना चाहिए और इस विश्व साइकिल दिवस के दिन सरकार को बिना किसी देरी के साइकिल की सवारी को शान की सवारी बनाने पर गम्भीरता से विचार करना शुरू कर देना चाहिए।
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