महिलाएं अपनी इच्छाशक्ति से अपना जीवन बदल रही हैं
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गत शुक्रवार जिसने भी कौन बनेगा करोड़पति कार्यक्रम देखा होगा तो उसकी आंखे तो भर आई ही होंगी। पर, इन आंसुओं में एक गर्व भी होगा जो उन दो महिलाओं को हॉट सीट पर बैठे देखकर हुआ होगा या उस समय हो रहा था। दीपा मलिक और मानसी जोशी को यू देखकर और उनसे उनकी सफलताओं के एक-एक कदम की बात सुनकर ऐसा लग रहा था कि यह जीवटता से भरी दोनों महिलाएं कितनी ताकतवर हैं, मजबूत हैं और जीवन के संघर्षों के अनेक कठिनाइयों भरे रास्तों पर चलने का कितना आत्मविश्वास रखती हैं।
दीपा मलिक और मानसी जोशी दोनों ही दिव्यांग हैं। दीपा तो लकवाग्रस्त हैं और पूरी तरह से व्हील चेयर पर हैं तो वहीं मानसी एक सड़क हादसे में अपनी टांग खो चुकी हैं। पर प्रोस्थेटिक लेग से इतना कुछ कर रही हैं कि वह स्वयं में एक मिसाल है।
दरअसल, दोनों ने ही खेलों को अपनाया और यह दिखाया है कि स्वयं पर विश्वास हो और चुनौतियों का सामना करने का जज्बा हो तो सबकुछ किया जा सकता है।
दीपा मलिक ने पैरा ओलंपिक में शार्टपुट में भाग लेकर न केवल गोल्ड मेडल जीता बल्कि वह इसकी चैंपियन भी बनीं। इस वर्ष उन्हें खेल-रत्न पुरस्कार मिला है।
इसी प्रकार मानसी जोशी बैडमिंटन के खेल में पैरा चैंम्पिनशिप में भाग लेकर गोल्ड मेडल जीता। इस तरह से प्रोस्थेटिक लिंब के साथ बैडमिंटन कोर्ट में इधर से उधर भागकर तथा आगे नेट पर जाकर तथा तुरंत पीछे जाकर शॉट लेना और उसे वापस लौटाना कितना कठिन होता होगा, पर जब उनके मैच के उनके खेलते हुए कुछ अंश दिखाए जा रहे थे तो उनकी चुस्ती-फुर्ती में कोई कमी नहीं दिख रही थी।
कौन बनेगा करोड़पति का यह एपिसोड इतना प्रभावी था कि ऐसा लगा जैसे इन दोनों महिलाओं ने अपनी जिजीविषा से अपनी दिव्यांगता को ही अपनी ताकत बना लिया है। जिन्होंने यह एपिसोड नहीं देखा वह यूट्यूब पर इसे अवश्य देखें क्योंकि यह हमें अपने जीवन के हर क्षण के प्रति ईश्वर को धन्यवाद देने की बात करता है।
जैसा कि अमिताभ बच्चन ने इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा भी कि हम अपने शरीर और उसके विभिन्न अंगों को बहुत सहजता व स्वाभाविकता से लेते हैं और उनका महत्व भी नहीं समझते पर यह हमारे लिए कितना बड़ा वरदान है, इसलिए अपने शरीर को एक ईश्वरीय वरदान समझकर उसके लिए रोज ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए और हमेशा विनम्र रहना चाहिए।
जब श्री अमिताभ बच्चन बारी-बारी से दीपा मलिक और मानसी जोशी से उनकी इस स्थिति को लेकर कोई प्रश्न करते तो वह दोनों किसी उदासी और निराशा का मामूली सा भी संकेत दिए बगैर पूरी स्थिति को बहुत ही सहज व स्वभाविक होकर उसको बयां करतीं।
ऐसा लग रहा था कि उन्हें अपनी इस दिव्यांग स्थिति के लिए कोई शिकवा या शिकायत नहीं है और न हीं उन्होंने इसके कारण जीवन से हार मानी है। उनकी मानसिक स्थिति इतनी मजबूत है कि वह जीवन की प्रत्येक सफलता को अर्जित करना चाहती है।
जब श्री अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा कि इस प्रकार गोल्ड मेडल हासिल कर उन्हें कैसा लग लगता है तो उन्होंने कहा कि तब हमें इस बात के लिए गर्व होता है कि हमने भी देश के लिए कुछ किया। दोनों का यह भी कहना था कि जब हमें हमारे जैसे दिव्यांगों की कई बार उदासी व निराशा भरी बातें हम तक पहुंचती हैं तब हम उन्हें बहुत सकारात्मक ढंग से समझाते हैं और अपने जीवन की उन घटनाओं के बारे में उन्हें बताते हैं कि जब उन्हें समस्याएं आईं और तब उन्होंने उनुके साथ संघर्ष किया परंतु हिम्मत नहीं हारी और उन पर विजय पाईं। उस समय ऐसा लगता है कि शायद हमारा संघर्ष और उपर विजय से उन्हें भी प्रेरणा मिल सके और यह इस दुर्गम रास्ते पर अपनी हिम्मत और हौंसले से चल सकें। ऐसा हुआ भी है।
दीपा मलिक दो युवा बेटियों की मां भी हैं जिनके लिए वह कहती हैं कि मैं उनकी मां नहीं बल्कि वो मेरी मां है। उनकी एक दिव्यांगों के लिए एक एकेडमी भी है। जिसमें इस दिव्यांगता के साथ जीना और उसमें सफल होना सिखाया जाता है।
मानसी जोशी अपने गुरु और कोच पुलेला गोपीचंद की एकेडमी के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं और उसकी पूरी सहायता करना चाहती हैं। मानसी कहती हैं कि यह मेरे गुरु और कोच श्री गोपीचंद का ही कमाल था जिन्होंने मेरी दिव्यांगता को चुनौती के रूप में लिया और मुझे यहां तक पहुंचाया।
दोनों ने इसमें परिवार के सहयोग और योगदान को स्वीकारा और कहा कि यह इस स्थिति में बहुत आवश्यक होता है। इन दोनों युवतियों और ऐसी ही जांबाज महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली वास्तव में नायिकाएं हैं। ऐसी नायिकाएं जो आदर्श नायिकाएं हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।