Open Marriage: ओपन मैरिज और विवाह व्यवस्था, भारतीय समाज को किस तरह प्रभावित करेगा यह चलन?
बीते एक दशक में समाज में तेजी से परिवर्तन के होने चलते रिलेशनशिप के कई तरह के कॉन्सेप्ट्स सामने आए हैं, उन्हीं में विवाह के अंतर्गत एक कॉन्सेप्ट है, जिसे ओपन मैरिज कहा जा रहा है। समाजशास्त्रियों से लेकर के मनोवैज्ञानिक तक ओपन मैरिज के कॉन्सेप्ट को एक तरह से स्वीकार्यता दे चुके हैं। पश्चिम का यह कॉन्सेप्ट भारतीय समाज में धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा है।
बीते एक दशक में समाज में तेजी से परिवर्तन के होने चलते रिलेशनशिप के कई तरह के कॉन्सेप्ट्स सामने आए हैं, उन्हीं में विवाह के अंतर्गत एक कॉन्सेप्ट है, जिसे ओपन मैरिज कहा जा रहा है। समाजशास्त्रियों से लेकर के मनोवैज्ञानिक तक ओपन मैरिज के कॉन्सेप्ट को एक तरह से स्वीकार्यता दे चुके हैं। पश्चिम का यह कॉन्सेप्ट भारतीय समाज में धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा है।
विस्तार
भारतीय संस्कृति में शादी को वह पवित्र बंधन माना जाता है। हिंदू धर्म और पंरपरा में पति-पत्नी का रिश्ता पूर्वजन्म का संबंध होता है। समाज के भीतर यह रिश्ता सात जन्मों के बंधन के रूप में पूजा जाता है। विष्णु और लक्ष्मी से लेकर शिव-पार्वती तक विवाह का पवित्र बंधन आपसी विश्वास और प्रेम की अटूट डोर से बंधा होता है। कहा जाता है जन्म,मरण,परण सब विधि के हाथ होता है। इसका अर्थ है कि ना मनुष्य के हाथ में जन्म है, ना मृत्यु और ना ही विवाह का बंधन। कौन किसके साथ रिश्ते में बंधेगा यह सब विधाता के हाथ में होता है। अन्य धर्मो की तरह हिंदू धर्म में विवाह कभी ना टूटने वाला बंधन है यानी की यहां तलाक की व्यवस्था नहीं है। जीवन में एक बार पति या पत्नी के रूप में वरण कर लिया वह फिर आजीवन साथ निभाता है। हालांकि, बीते कुछ दशकों में सामाजिक परिवर्तनों के चलते और समाज के ढांचे में बदलाव के चलते परिवारिक ढांंचा पूरी तरह से बदल गया है। आज हिंदू धर्म में तलाक एक न्यायिक व्यवस्था के अंतर्गत है। दो लोग आपसी सहमति से अलग हो सकते हैं जिसे न्यायपूर्वक और कानून द्वारा तय किया जाता है।
क्या है ओपन मैरिज का आधार?
बहरहाल, दांपत्य जितना प्रेम से परिपूर्ण रिश्ता है, उतना ही यह आपसी विश्वास की डोर से बंंधा हुआ है। यह वह आपसी भरोसा ही है जिसके चलते एक परिवार की वंशावली निर्मित होती चली जाती है। लेकिन उत्तर आधुनिक समाज में बाजारवाद के प्रभाव के चलते सामाजिक संरचनाएं न केवल विखंडित हुई हैं बल्कि, संयुक्त परिवारों की तुलना में एकल परिवार का कॉन्सेप्ट शुरू हो गया है। पहले पति-पत्नी, माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रहते थे, लेकिन वैश्विक परिदृश्य में बदलाव के चलते खासतौर पर ग्लोबलाइजेशन के बाद के बाद अब केवल एकल परिवार रह गए हैं।
जाहिर है इन एकल परिवारों में संयुक्त परिवार का आधार न होने के कारण पति और पत्नी के बीच के संबंधों में दरार आई है। नौकरी पेशा जिंदगी, महानगरों में रहना, तनाव, आपसी विश्वास की कमी, यह सब संबंधों के टूटने का आधार रहे हैं। शादी के टूटने में सबसे बड़ी भूमिका नीरसता, साथी की ओर से उपेक्षा, विवाहेत्तर संबंध। यह वह सब कारण हैं जिसके चलते ओपन मैरिज जैसे कॉन्सेप्ट 21वीं सदी में हमारे सामने है।
आखिर क्या है ओपन मैरिज?
बीते एक दशक में समाज में तेजी से परिवर्तन के होने चलते रिलेशनशिप के कई तरह के कॉन्सेप्ट्स सामने आए हैं, उन्हीं में विवाह के अंतर्गत एक कॉन्सेप्ट है, जिसे ओपन मैरिज कहा जा रहा है। समाजशास्त्रियों से लेकर के मनोवैज्ञानिक तक ओपन मैरिज के कॉन्सेप्ट को एक तरह से स्वीकार्यता दे चुके हैं। पश्चिम का यह कॉन्सेप्ट भारतीय समाज में धीरे-धीरे प्रवेश कर रहा है। ओपन मैरिज का कॉन्सेप्ट न केवल महानगरों की देन है बल्कि यह अब धीरे-धीरे महानगरीय संस्कृति का हिस्सा बन रहा है।
ओपन मैरिज एक वरदान या अभिशाप?
शादी में पति-पत्नी का संबंध भरोसे पर ही आधारित होता है। भरोसा एक ऐसा शब्द है कि अगर किसी व्यक्ति पर जघन्य अपराध का भी आरोप लगा हो और उसने अपनी पत्नी से मात्र इतना कह दिया कि क्या तुम्हें मुझपर भरोसा नहीं है तो उसकी पत्नी को किसी सबूत की जरूरत ही नहीं होगी। अगर शादी भरोसे का रिश्ता होता है तो क्या हमारा समाज इतना आगे बढ़ गया है कि अब इस रिश्ते में एक तीसरे व्यक्ति की भी जरूरत पड़ रही है। आश्चर्य की बात यह है कि आज के युवाओं में न केवल इसे सही माना जा रहा है बल्कि पसंद भी किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रहा है ओपन मैरिज का ट्रेंड?
सोशल मीडिया के इस दौर में कुछ भी छुपाना असंभव है। आज के समय में लोगों का रिश्ता भी बदलता जा रहा है और उसे निभाने का तरीका भी। एक तरफ तो कुछ लोग अपना सारा जीवन एक इंसान के साथ ही गुजारना चाहते हैं। वहीं, कुछ लोग जीवन में रोमांस को ज्यादा तवज्जो देते हैं और एक से ज्यादा रोमांटिक रिश्ते पसंद करते हैं। इसी तर्ज पर ओपन मैरिज का कॉन्सेप्ट कपल्स के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। ओपन मैरिज का चलन विदेशों में पहले से मौजूद था, लेकिन अब यह धीरे-धीरे भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है।
ओपन मैरिज में पार्टनर की रजामंदी है जरूरी
ओपन मैरिज का सीधा मतलब यही है कि आप अपनी शादी के बाद भी दूसरे व्यक्ति के साथ रिश्ता बना सकते हैं और इसमें आपके पार्टनर की भी रजामंदी हो। लोगों का कहना है कि यह कॉन्सेप्ट इसलिए ट्रेंड में आया ताकि लोगों में कम से कम तलाक हो और वह एक-दूसरे से बोर भी न हों। अब इसे पढ़कर एक सवाल यही मन में आता है कि यह कॉन्सेप्ट भारतीय कपल्स में कैसे ट्रेंड कर रहा है, जहां शादी को सात जन्मों का बंधन माना जाता है।
समाज के ढांचे को कैसे प्रभावित कर सकता है यह चलन?
इस कॉन्सेप्ट के आने से लोगों में शादी बस एक समझौता बनकर रह गया है। भारतीय समाज आज भी इस कॉन्सेप्ट को अपनाने के लिए तैयार नहीं है। ओपन मैरिज के आ जाने से भारत में लिव इन रिलेशनशिप का ट्रेंड भी बढ़ता जा रहा है और लोग शादी को बस एक खेल समझकर बैठ गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ओपन मैरिज उन्हें स्वतंत्रता देती है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि ओपन मैरिज करके भी वह अपने पार्टनर को धोखा नहीं देते हैं, लेकिन इन सब के बावजूद यह कहना गलत नहीं होगा कि ऐसे रिश्ते को समाज में शायद ही स्वीकार्यता मिलेगी।