पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: नंदीग्राम से ग्राउंड रिपोर्ट, विकास का मुद्दा हुआ गौण
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पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में सबसे हाईप्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सुर्खियों में है। यहां राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कभी उनके खास रहे सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। लंबे समय तक वाममोर्चे के पास रही इस सीट पर नंदीग्राम जमीन आंदोलन के बाद से तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है।
दरअसल, विधानसभा क्षेत्र कई मामलों में राज्य के अन्य क्षेत्रों से पिछड़ा है। कई मामलों में अन्य क्षेत्रों से आगे है। जैसे पिछले दस सालों में यहां बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन का काम शुरू हुआ है। किसान खेतों को तालाब में बदल चुके है, जिनमें चिंगड़ी (झींगे) का उत्पादन होता है। रेयापाड़ा से खाल (नहर) के किनारे आगे बढऩे पर कई जगहों पर हालिया खोदे गए तालाब दिखाई देते हैं। जिनमें से कुछ में मत्स्य पालन होता है कुछ सूख गए हैं।
ऐसे ही एक मत्स्य पालक कृष्ण दास बताते हैं कि देखादेखी में उन्होंने यह काम शुरू किया। अब फायदा मिल रहा है। पहले एक बीघे में खेती से साल के दस हजार भी नहीं मिलते थे अब मत्स्य पालन कर उसी जमीन से 50 हजार कमा रहे हैं। हालांकि सब कोई कृष्णदास जैसा भाग्यशाली नहीं हैं। सबके पास अपने खेतों को तालाब में बदलने का हुनर भी नहीं है। जैसा इलाके के चैतन्य गुइन कहते हैं-तालाब सिर्फ उनके बने जिन्होंने ऊपर भेंट चढ़ाई, जो पहले से ही आर्थिक रूप से सशक्त थे। खेत मजदूर, छोटे किसानों के लिए कुछ नहीं बदला।
आगे बढऩे पर भांगाबेडिय़ा नहर पर बने पुल के आसपास खेजुरी की सीमा पर शांति है। यह इलाका इस समय तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के शक्ति प्रदर्शन का केन्द्र है। यहां 150 फुट ऊंची शहीद मिनार के पास दोनों दलों के समर्थकों के बीच कई बार तनाव हो चुका है। ऐसा तनाव यहां के लोगों ने नंदीग्राम आंदोलन के समय वर्ष 2007 में भी देखा था जिसे अब वे भूलना चाहते हैं।
ऑटो चला रहे सुजय दास बताते हैं कि आंदोलन के समय महीनों तक यहां बम-गोलियां चलीं। उसके बाद परिवर्तन हुआ लेकिन बहुत कुछ नहीं हुआ। अभी भी गांव में पीने के पानी की समस्या है। रोजगार के अवसर नहीं है। नंदीग्राम सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चिकित्सा सेवा नाममात्र की है।
विकास हो गया गौण
नंदीग्राम में विकास का मुद्दा मानों खो सा गया है। नंदीग्राम में दोनों ही पार्टियां ध्रुवीकरण कर रही हैं। वैष्णव मतावलंबी सुब्रत दास कहते हैं- ध्रुवीकरण दोनों तरफ से जारी है। विकास का मुद्दा गौण हो गया है। वे कहते हैं- जीत उसी की होगी जो सामाजिक ताने-बाने को अपने पक्ष में कर ले। भाजपा प्रत्याशी सुुुुवेंंदु अधिकारी अपनी तरह से प्रचार कर रहे हैं। ममता बनर्जी को बाहरी बताने वाले पोस्टरों से इलाके को पाट चुके हैं। जगह जगह उनके समर्थन में भूमिपुत्र के पोस्टर लगे हुए हैं।
ममता की चोट, कहीं सहानभुति कहीं चुनावी चाल
तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी को लगी चोट के बाद इलाके में दो तरह की प्रतिक्रिया हैं। एक में लोग उनसे सहानुभूति रख रहे हैं तो दूसरे पक्ष के लोग पूरे मामले को चुनावी चाल बताते हैं। वहीं सुवेंदु को घेरने के लिए ममता के खास सिपहसालार राज्यसभा सांसद दोला सेन व पूर्व मंत्री पूर्णेन्दु बसु इलाके में डेरा डाले हुए हैं। कुल मिलाकर पूर्व मिदनापुर जिले में हलदी नदी के किनारे स्थित नंदीग्राम सीट पर इस बार कांटे की टक्कर दिखती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।