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मप्र विधानसभा का भवन आखिर अपशगुनी क्यों माना जाता है? 

Satish Aliaसतीश एलिया Updated Thu, 16 Jan 2020 03:41 PM IST
मध्यप्रदेश विधानसभा भवन को उत्कृष्ट वास्तु के लिए विख्यात आगा खां अवॉर्ड भी मिल चुका है।
मध्यप्रदेश विधानसभा भवन को उत्कृष्ट वास्तु के लिए विख्यात आगा खां अवॉर्ड भी मिल चुका है। - फोटो : File
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क्या मध्य प्रदेश विधानसभा का भवन अपशगुनी है? यानी उसमें ऐसा कोई वास्तु दोष है जो उसके सदस्यों की असमय मौत का सिलसिला चल रहा है। बीते करीब ढाई दशक से हर सत्र के पहले और सत्र के बाद एक न एक वर्तमान विधायक की मृत्यु होती है। यह बात एक बार फिर मप्र की विधानसभा में चर्चा में है।
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अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण बनाने के लिए संसद से पारित संशोधन विधेयक के समर्थन के लिए  बुलाए गए विधानसभा सत्र के पहले दिन यह मामला नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने दिवंगत विधायक कांग्रेस के बनवारीलाल शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उठाया।

इससे पहले दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान 10 साल विधानसभा अध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी और भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक दशक तक अध्यक्ष रहे स्वर्गीय ईश्वरदास रोहाणी भी इस भवन के वास्तु और सदस्यों की असमय मौत से चिंतित रहते थे।

खास बात यह हे कि तिवारी ने तो बकायदा अनुष्ठान भी कराया था। इस विधानसभा भवन को विख्यात वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने बनाया था। दिग्विजय सरकार के कार्यकाल में करीब छह साल में बना यह भवन 12 करोड़ रुपए में बनना था, लेकिन देरी की वजह से इसकी लागत 72 करोड़ रुपए पर पहुंच गई थी।

इस भवन को उत्कृष्ट वास्तु के लिए विख्यात आगा खां अवॉर्ड भी मिल चुका है। इसका उद्घाटन 1996 मेंं तत्कालीन राष्ट्रपति भोपाल के मूल निवासी डॉ. शंकरदयाल शर्मा ने किया था। गौरतलब है कि इस भवन विधानसभा आने के बाद तत्कालीन वन एवं परिवहन मंत्री लिखीराम कांवरे की नक्सली हमले में उनके गृह गांव में हत्या हो गई थी। जिनकी पुत्री हिना कांवरे वर्तमान में विधानसभा उपाध्यक्ष हैं।

भाजपा सरकार में तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री लक्ष्मण सिंह गौड़ की वाहन दुघर्टना में मौत हो गई थी। जिनकी पत्नी अब इंदौर की विधायक एवं महापौर हैं। विधानसभा अध्यक्ष पद पर रहते हुए भाजपा नेता ईश्वरदास रोहाणी की मृत्यु हुई।

इधर, नेता प्रतिपक्ष पद पर रहते हुए कांग्रेस नेता जमुनादेवी और सत्यदेवकटारे की मौत हुई। हर असामायिक मौत के बाद इस भवन को लेकर सवाल सदन में और सदन के बाहर उठाए जाते रहे हैं। इस भवन के उद्घाटन के वक्त इसका नाम इंदिरा गांधी विधान भवन रखने पर भी भाजपा ने उग्र विरोध किया था और कुछ विधायक संघर्ष में घायल भी हो गए थे। खून बहा था।
 
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