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Aravalli Range: अरावली पर्वतमाला विविधताओं का बसेरा और आवास
सार
यहां का जलवायु गर्म अर्ध शुष्क और शुष्क हैं। इस क्षेत्र के दक्षिण पूर्व में अरावली पर्वतमाला इसको घेरता है और थार रेगिस्तान एवं सिंधु घाटी रेगिस्तान इस क्षेत्र के घेर में हैं।
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Aravalli Range
- फोटो : नेहा हेगडे
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विस्तार
अरावली पर्वतमाला डेढ़ अरब साल पुरानी विश्व में सबसे पुरातन पर्वतमालाओं में से एक है। यह बालू और हरित आवरण दोनों से युक्तए सुंदर और रमणीय चोटियां और घाटियां की माला है जिनकी खूबसूरती की तो दाद देनी पड़ेगी! यहां के विभिन्न क्षेत्रों में भौगोलिक विशेषताओं के कारण यह अनेक जीवों को आवास देता है।
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यह थार रेगिस्तान और विविध नदियों से परिवृत हैए जैसेए बनासए लूनि और साबारमती नदियां। अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क यहां के पारिस्थितिक पुनर्स्थापना को दर्शाता है।
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पश्चिमी अरावली के कांटेदार झाड़ीदार जंगल मरुस्थल और शुष्क क्षुपभूमियों में गिने जाते हैं। वर्षीय ५०० से ६०० मिमी बरसात पाने वाला यह क्षेत्र आंधी तूफान से संभावित है।
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यहां का जलवायु गर्म अर्ध शुष्क और शुष्क हैं। इस क्षेत्र के दक्षिण पूर्व में अरावली पर्वतमाला इसको घेरता है और थार रेगिस्तान एवं सिंधु घाटी रेगिस्तान इस क्षेत्र के घेर में हैं। इस जंगल में अकेशिया सेनेगल और अकेशिया लुकोफ्लोईया यानी रेवंजा प्रमुख वृक्षों में हैं। अकेशिया सेनेगल खेर के नाम से जाना जाता है।
इस से उत्पन्न होने वाला गोंद राजस्थान के बाड़मेर में कुमट नाम से प्रसिद्ध हैए जो औषधीय गुणों से युक्त है। रेवंजा अपनी सफ़ेद खाल से बनने वाले पदार्थ के आयुर्वेदिक तत्वों के लिए इस्तेमाल होता है जो पाचन से संबंधित परेशानियों का हल है। यहां और भी कई ज़ेरोफाइटिक पेड़ पौधे पाए जाते हैं।
यहां के लगभग ९० स्तनपायी प्रजातियों में से कुछ मांसभक्षी और कुछ शाकाहारी हैं। यहां तेंदुआ पाया जाता है जो चिंकारा का शिकार करते हैं, जो एक प्रकार का गज़ॅल है। भारतीय रेगिस्तानी बिल्ली या एशियाई जंगली बिल्ली यहां की एक प्रमुख प्रजाति है।
नील गाय काला हिरण और चौसिंगा यहां के शाकाहारी जानवरों में से हैं। भारतीय जरबिल यहां पाया जाता है जिसका कुछ मांसभक्षी जानवरों द्वारा शिकार होता है और यह बालू में अपने खाद्य और शयन के लिए बिल खोदता है।
पश्चिमी अरावली जंगल में ४०० से भी अधिक पक्षियां पाई जाती हैं जिनमें से काफी प्रवासी पक्षी प्रजातियां हैंए जैसे कि जैकोबिन कोयल। ग्रेट इंडियन बस्टर्ड या गोडावण यहां की एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति हैए और लेसर फ्लोरिकन या खरमोर भी यहां की प्रमुख प्रजातियां हैं।
यहां के बिश्नोई समुदाय ने इस जंगल की रक्षा में अपना कर्तव्य निभाते हुए कृष्णमृग को अपने का दर्जा दिया है।
काठियावाड़ गिर शुष्क पर्णपाती वन का मुख्य भाग अरावली पर्वतमाला में पड़ता है। यह स्थान शुष्क जलवायु का है। यह वन गुजरात में शुरू होते हुए राजस्थान और मध्य प्रदेश तक फैला हुआ है। इस जंगल के कुछ हिस्सों में सबसे उल्लेखनीय प्रजाति सागौन है।
शुष्क स्थानों में टर्मिनलिया पेंडुला यानी ढोक सबसे अधिक मात्रा में पाई जाती है। कांटेदार पेड़ और झाड़ियां इसके सूखे हिस्सों में प्रमुख हैं। माउंट आबू इस वन का हिस्सा है। यहां उष्णकटिबंधीय मानसून जलवायु है।
मंगार बनीए दिल्ली.हरियाणा सीमा में एक गांव है जो उत्तरी अरावली पे पड़ता है। ष्बनीष् यहां की भाषा में वन का नाम है। यह एक उच्च जैव विविधता ज़ोन माना जाता है। यहां पर ३० से अधिक देशी पेड़ और १०० पौधे पाए जाते हैंए और यह ९५ः ढोक के पेड़ से ढका हुआ है।
इसकी विशेषता यह है कि यहां के प्रसिद्ध गुड़रिया दास बाबा मंदिर के कारण यह एक पूजनीय स्थल है जो गुज्जर समुदाय के लिए पवित्र माना जाता है। यह समुदाय इस कुंज की रक्षा करता है। मंगार बनी एक पुरातात्त्विक स्थल भी है। यह स्थान उत्तरी अरावली तेंदुआ वन्यजीव गलियारे का हिस्सा है।
अरावली पर्वतमाला में दो वन्यजीव गलियारे हैंए जो तेंदुओं को शिकार के लिए अवकाश देते हैं और वन्यजीव के मेल जोल को बढ़ाते हैं।
अतिक्रमण के कारण यहां के वन का नाश हो रहा है। ग्रेनाइट और संगमरमर के खनन के कारण पश्चिमी अरावली में आवास का नाश हो रहा है। खनन की मात्राओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं और इनका लागू करना महत्वपूर्ण है। अरावली में पर्यावरण के नाश के कारण कई जीवों ने अपना आवास खोया है।
यहां के पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक से अधिक जागरूकता और संरक्षण के प्रचार को करना महत्वपूर्ण है।
वृहत हरित दीवार या ष्अरावली ग्रीन वॉलष् एक प्रास्ताविक १४०० किमी लंबी और ५ किमी चौड़ी हरित पट्टी है जो पोरबंदर से लेके पानीपत तक निर्माणित की जायेगी जिसका मकसद क्षेत्र की बिगड़ती हुई ज़मीन को निम्नीकरण से बचाते हुए उसके हरित आवरण को बढ़ाना है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।