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पुण्यतिथि विशेष, उस्ताद बिस्मिल्लाह खानः संगीत का आठवा सुर !

Wed, 21 Aug 2019 01:02 PM IST
Dhruva Gupt ध्रुव गुप्त
Updated Wed, 21 Aug 2019 01:02 PM IST
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Ustad bismillah khan death anniversary and ustad bismillah khan biography
हिंदी की फिल्म 'स्वदेश' तथा सत्यजीत रे की चर्चित बंगला फिल्म 'जलसाघर' में भी उन्होंने अपनी शहनाई का जादू बिखेरा था। - फोटो : SELF

भारतीय शास्त्रीय संगीत के युगपुरुष, शहनाई के जादूगर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां देश के सबसे सम्मानित संगीत व्यक्तित्वों में एक रहे हैं। बिहार के एक छोटे-से कस्बे डुमरांव में जन्मे खां साहब की हर सांस शहनाई के सुरों को समर्पित थी। वे बनारस को अपनी कर्मभूमि बनाकर जीवन भर संगीत में मुक्ति की तलाश करते रहे।

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इस मुक्ति की खोज में उन्होंने शादी-ब्याह की महफ़िलों से लेकर संगीत के अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अथक शहनाई बजाई। काशी के विश्वनाथ मंदिर के वे अधिकृत शहनाई वादक थे। हिंदी फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' में उठी शहनाई की स्वरलहरियों ने उन्हें देश के आम लोगों के दिलों में जगह दी।
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हिंदी की फिल्म 'स्वदेश' तथा सत्यजीत रे की चर्चित बंगला फिल्म 'जलसाघर' में भी उन्होंने अपनी शहनाई का जादू बिखेरा था। फिल्मकार गौतम घोष ने उनके संगीत की अंतर्दृष्टि का स्पर्श करने वाली बेहतरीन फिल्म 'मीटिंग अ माइलस्टोन' बनाई थी। अपनी तमाम उपलब्धियों के बावज़ूद खां साहब अपनी संगीत-साधना से कभी भी संतुष्ट नहीं रहे। शायद उन्हें उस आठवें सुर की तलाश थी जो संगीत के प्रति एकांत समर्पण से उठता है।
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एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था - 'अभी सच्चा सुर लगा ही कहां है? उसी की तलाश में तो हम इतने बरस से बजाए जा रहे हैं। जब सच्चा सुर लगा जाएया तो समझिएगा कि हम पहुंच गए बाबा विश्वनाथ की शरण में।'

यह तो पता नहीं कि शहनाई के सुर उन्हें बाबा विश्वनाथ की शरण में ले गए या नहीं, लेकिन हमारे दिलों की गहराई में तो वे कब के पहुंच गए थे। उनकी सादगी, विनम्रता, बच्चों-सी निश्छल मुस्कान, फ़कीराना ज़िंदगी और सुरों के प्रति उनकी दीवानगी आने वाली संगीत-पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी। उनकी पुण्यतिथि (21 अगस्त) पर मरहूम उस्ताद को खिराज़-ए-अक़ीदत !


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।       

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