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भारत की सड़कों पर तेजी से बढ़ रही है गाड़ियां? कैसे हल होगी ट्रैफिक की समस्या?

Arvind Kumarअरविंद कुमार Updated Wed, 10 Jul 2019 12:41 PM IST
भारत में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार पेचीदा हो रही है।
भारत में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार पेचीदा हो रही है। - फोटो : PTI
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कोस-कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी अर्थात्  भारत में हर एक कोस दूर जाने पर पानी का स्वाद बदल जाता है और 4 कोस पर भाषा यानी वाणी भी बदल जाती है, इसीलिए हमारे देश को भिन्नताओं का देश कहते हैं, लेकिन इतनी भिन्नताओं के बावजूद एक सामान्यता ऐसी है जो आपको अक्सर तमाम शहरों में एक जैसी दिखाई देगी और वह है बढ़ती हुई गाड़ियां और उनका कोलाहल और ट्रैफिक जाम झेलती सड़कें।

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गुरुग्राम के ट्रैफिक को कौन भूल सकता है? 
कौन भूल सकता है गुडगांव को जो अब गुरुग्राम के नाम से जाना जाता है, जो हाल में एक बारिश के बाद ही इस कदर बदहाल हो गया था कि लोगों को ट्रैफिक जाम की वजह से पूरी रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। पुलिस को ट्रैफिक हटाने के लिए लोगों से उन सड़कों से न गुजरने की अपील करनी पड़ी थी और तब भी काम नहीं चला तो धारा 144 तक लगाने की नौबत आन पड़ी थी। 

यह सिर्फ गुरुग्राम की ही बात नहीं है बल्कि अगर आप विश्व के उन 10  शहरों को देखें जहां ट्रैफिक की समस्या सबसे ज्यादा है तो उस सूची में आपको दिल्ली और मुंबई का नाम भी दिख जाएगा। पिछले महीने एक रिपोर्ट आई थी और इसमें भी ट्रैफिक जाम के मामले में मुंबई तथा दिल्ली  शीर्ष 10 शहरों में शामिल थे।

ट्रैफिक कंजेशन के मामले में मुंबई विश्व में पहले नंबर पर थी तो दिल्ली भी कहां पीछे रहने वाली थी। इस सूची में राजधानी दिल्ली चौथे पायदान पर थी। यह हालत सिर्फ दिल्ली और मुंबई की ट्रैफिक व्यवस्था का नहीं है अपितु भारत के कमोबेश हर महानगर की यही स्थिति है। आप बेंगलुरु को देख लो, चेन्नई या गुवाहाटी पर नज़र डालें, हर जगह आप को ऐसे ही हालात दिखेंगे।

बढ़ती हुई गाड़ियां और प्रदूषण 
भारत की सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या देखें तो इनमे हाल के दशक में कई गुना वृद्धि हुई है | मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन की 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 से 2016 के दौरान रजिस्टर्ड गाड़ियों की संख्या में करीब 400% बढ़ोतरी हुई है। 2001 में लगभग 5.5 करोड़ रजिस्टर्ड गाड़िया थीं, लेकिन 2016 आते-आते यह आंकड़ा 17.5 करोड़ पहुंच गया।

यह वृद्धि कारों और दुपहिया वाहनों में सबसे ज्यादा हुई। जीवनशैली में आते सुधारों और ऑटो लोन की उपलब्धता ने वाहन खरीद को काफी आसान बना दिया है। पहले गाड़ियों का सपना सिर्फ उच्च वर्ग के पहुंच में होता था, लेकिन अब मध्यमवर्ग भी गाड़ियों का मुख्य उपभोक्ता बन चुका है।

सड़कों का निर्माण और रखरखाव
एक तरफ हर साल लाखों नई गाड़ियां सड़कों पर आ रही हैं तो उसी के मुताबिक सड़कों का निर्माण करना भी जरूरी है और इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि सड़कें बनें वे टिकाऊ भी हों। हालांकि सड़कों की तरफ पिछले कुछ वर्षो में सरकारों का ध्यान गया है और अब एक निश्चित लक्ष्य बनाकर हर रोज़ सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।  इस काम के लिए बजट भी आबंटित किया जा रहा है।

सड़कों की गुणवत्ता का भी अब ध्यान रखा जा रहा है। टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी सड़कें न सिर्फ ट्रैफिक जाम को बढ़ाती हैं बल्कि हर साल ना जाने कितने लोगों की मौत की वजह  भी बनती हैं। पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह से इस दिशा में काम हो रहा है, उससे उम्मीद बंधी है कि संभवत: आने वाले समय में इस समस्या से निदान मिल जाए।
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