खुद से कहें, मैं हूं ना: खामियां हम सभी में.. तनावपूर्ण हालात में खुद के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण रवैया रख..
तनावपूर्ण हालात में दूसरों को सहारा देना आसान होता है, लेकिन खुद को संभालना मुश्किल। प्रो. किस्टिन नेफ के अनुसार, आत्म-करुणा यानी खुद के प्रति दयालुता अपनाने वाले लोग अधिक मानसिक रूप से लचीले होते हैं। यह भावना हमें स्वीकार करना सिखाती है कि गलतियां इंसानी हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अगर कोई दोस्त किसी समस्या से जूझ रहा है, तो अमूमन हमारी पहली प्रवृत्ति उसे सांत्वना देने की होती है, लेकिन जब बात खुद को संभालने की हो, तो यह इतना आसान नहीं होता। हालांकि, शोध यह बताते हैं कि तनावपूर्ण स्थितियों में जो लोग खुद के प्रति अधिक सहानुभूतिपूर्ण रवैया दिखाते हैं, वे अधिक लचीले होते हैं। टेक्सास यूनिवर्सिटी में शैक्षिक मनोविज्ञान की प्रोफेसर किस्टिन नेफ कहती हैं कि हमें यह कहने के बजाय कि ‘मैं गलत हूं’, यह कहना चाहिए कि ‘मुझसे गलती हुई है’।
आत्म-करुणा मुश्किल वक्त में स्वयं के प्रति समर्थन व्यक्त करने की प्रक्रिया
वह मानती हैं कि आपको खुद के प्रति सकारात्मक होना चाहिए, लेकिन उतना ही जरूरी यह भी है कि आप खुद के प्रति उदार हों। यह आत्म-करुणा दरअसल मुश्किल वक्त में स्वयं के प्रति समर्थन व्यक्त करने की प्रक्रिया है और इसमें यह स्वीकारना भी शामिल होता है कि आप अपनी खामियों में अकेले नहीं हैं।
खुद के प्रति दयालु लोग भी पराजित महसूस करते हैं, लेकिन...
यह आत्म-करुणा माइंडफुलनेस से उत्पन्न होती है, जिसमें बगैर खुद का आकलन किए, वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना शामिल होता है। प्रो. नेफ कहती हैं कि खुद के प्रति दयालु लोग भी पराजित महसूस करते हैं, लेकिन वे भावनाओं में खो जाने से बचते हैं, ताकि खुद के प्रति दयालुता दिखा सकें।
खामियां हर किसी में होती हैं और यही तो हमें मनुष्य बनाती हैं
खुद के प्रति दयालु होना इस समझ से आता है कि खामियां हर किसी में होती हैं और यही तो हमें मनुष्य बनाती हैं। एक आम मिथक है कि आत्म-करुणा की भावना खुद को या परिस्थितियों को बेहतर बनाने की प्रेरणा को कमजोर कर देगी।
बगैर किसी अनावश्यक बचाव के महसूस करना...
शोध बताते हैं कि नकारात्मक प्रतिक्रिया की तुलना में समर्थन, प्रोत्साहन और रचनात्मक आलोचना अधिक प्रभावी प्रेरक हैं। प्रो. नेफ कहती हैं कि आत्म-करुणा खुद के होने की भावना का सशक्तीकरण है, जिसका अर्थ ही है कि जो आप महसूस कर रहे हैं, उसे पूरी तरह से और बगैर किसी अनावश्यक बचाव के महसूस करना।
क्या आप सहायक और प्रोत्साहित करने वाले हैं?
आत्म-करुणा के गुण के विकास के लिए सबसे पहले इस बारे में सोचें कि आप दिन भर में खुद के प्रति कैसे पेश आते हैं। क्या आप सहायक और प्रोत्साहित करने वाले हैं या आप खुद के प्रति दुश्मनों की तरह पेश आते हैं?
खुद से दयालुता से बात करने की कोशिश करें
प्रो. नेफ के अनुसार, ज्यादातर लोग खुद की तुलना में दूसरों के प्रति ज्यादा दयालु होते हैं। वह कहती हैं कि जब भी आप खुद को कोसने के लिए प्रवृत्त हों, तो खुद से दयालुता से बात करने की कोशिश करें, ठीक वैसे ही, जैसे आप उसी स्थिति में किसी अच्छे दोस्त से बात करते हैं।
अपने दिल पर हाथ रखकर करीब बीस सेकेंड तक...
मनोवैज्ञानिक तारा ब्रैच कहती हैं कि खुद के लिए समय निकालना शुरू करें। वह कहती हैं कि अपने दिल पर हाथ रखें और खुद को आश्वासन दें कि ‘मैं हूं’। जो लोग नियमित रूप से अपने दिल पर हाथ रखकर करीब बीस सेकेंड तक यह सोचते हैं कि ‘मैं इस क्षण खुद का दोस्त कैसे बन सकता हूं,’ वे कम तनाव महसूस करते हैं।