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घर के साथ-साथ बच्चे संभालने में भी परफेक्ट होते हैं स्वीडिश पिता

Tue, 02 Apr 2019 08:30 PM IST
Priyamvada Sahai प्रियंवदा सहाय
Updated Tue, 02 Apr 2019 08:30 PM IST
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Swedish Fathers are perfect in taking care of babies

पति घर के साथ बच्चों को संभालने में भी परफेक्ट हैं। यह कहने में ज्यादातर भारतीय महिलाएं कई दफा सोचेंगी। कोई पत्नी पूरे आत्मविश्वास के साथ शायद ही इसका एलान कर सके। लेकिन, स्वीडन में बराबरी के हक ने पुरूषों को ऐसे कामों में दक्ष बना दिया है। यहां बच्चों के डायपर बदलने, नहलाने, भोजन बनाने-खिलाने और लोरी गा कर सुलाने तक का काम केवल मां नहीं करती हैं, बल्कि इन सभी कामों में पिता भी बराबर हाथ बंटाते हैं।  

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यहां की सड़कों पर अधिकांश पुरूष अपने बच्चों को स्ट्रॉलर में टहलाते नजर आ जाएंगे। वहीं, कुछ बच्चों को पीठ या सीने से लपेटे मजे से शॉपिंग करते हुए दिख जाएंगे। दरअसल यहां बच्चे के जन्म के साथ उन्हें संभालने के लिए माता-पिता दोनों को दफ्तर से लंबी छुट्टी (पेड लीव) मिलती है, जिसे पैरेंटल लीव कहते हैं। यह गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले मैटरनिटी लीव की जगह है। यह छुट्टी सवा साल से ज्यादा की होती है। 
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स्वीडन के सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में 480 दिनों की अनिवार्य पैरेंटल लीव का प्रावधान है। जिसे माता-पिता के बीच बराबर दिनों में बांट दिया जाता है। इतनी लंबी छुट्टी लेने पर दफ्तर से वेतन नहीं कटता और न ही प्रमोशन में बाधा आती है इसके उलट कंपनियां पिता को पैरेंटल लीव लेने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। अगर कोई कामकाजी नहीं है तो इन दिनों के लिए सरकार आर्थिक सहायता भी देती है। 
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इस दौरान माता-पिता मिलकर बच्चों का ध्यान रखते हैं। पिता के साथ बच्चे के संबंध को प्रगाढ़ बनाने के लिए इस छुट्टी को खास तरीके से डिजाइन किया गया है। 480 दिनों के पैरेंटल लीव में से पिता को 90 दिनों का अवकाश निश्चित तौर लेना होता है। इस दौरान वे बच्चे की देखभाल के साथ घर के दूसरे कामों में हाथ बंटाते हैं और मां दूसरे जरूरी काम निपटाते हुए फुरसत के क्षणों का आनंद लेती हैं।



पिता अगर न्यूनतम 90 दिनों की छुट्टी नहीं लेते हैं तो कुल पैरेंटल लीव में से इतनी अवधि कम कर दी जाती है। लेकिन इसके बाद पिता को यह सफाई पेश करनी होती है कि आखिर अवकाश नहीं लेने का कारण क्या था और यह कितना मान्य है? 

आपको बता दें कि स्वीडन में किसी मेहमान के घर आने पर अगर घर की महिला ही केवल आवभगत करने में जुटी रहे तो इसे बुरा माना जाता है। ऐसे घरों में स्वीडिश लोग जाने और मेलजोल बढ़ाने से परहेज करते हैं। वे मानते हैं कि समानता के अधिकार के तहत मेहमानों का स्वागत करना घर के महिला-पुरूष दोनों का काम है, न कि किसी एक पर काम का दबाव बढ़ाना। 




स्वीडन में पहली बार समानता के अधिकार को तवज्जो देते हुए साल 1974 में ही मैटरनिटी लीव के प्रावधान को खत्म कर दिया गया था। इसकी जगह पैरेंटल लीव को लागू कर दिया गया। जिसे अब और भी लचीला बनाने की मशक्कत हो रही है।

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