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SIR In West Bengal: पश्चिम बंगाल में सियासत का हथियार बनता एसआईआर

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Sat, 08 Nov 2025 05:18 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक राज्य का हर नागरिक एसआईआर का फार्म नहीं भरता, वो खुद भी नहीं भरेंगी। दूसरी ओर, भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची से लाखों फर्जी नाम कटने और अपना अल्पसंख्यक वोट बैंक बिखरने की आशंका से तृणमूल कांग्रेस डरी हुई है।

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SIR In West Bengal: SIR becomes a political weapon in West Bengal
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण। - फोटो : एएनआई

विस्तार

बिहार के बाद अब इस सप्ताह जिन 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद शुरू हुई है उनमें सबसे ज्यादा सुर्खियां पश्चिम बंगाल ही बटोर रहा है।

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दरअसल, यहां यह कवायद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीति का मजबूत हथियार बन गया है। ममता बनर्जी सरकार जहां इसके विरोध में सड़कों पर उतर आई है, वहीं बीजेपी ने जवाबी रणनीति तैयार कर ली है।
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अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए दोनों राजनीतिक अपने-अपने सियासी हित साधने में इसका जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर एक भी वैध वोटर का नाम कटा तो पार्टी लाखों लोगों के साथ दिल्ली जाकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक राज्य का हर नागरिक एसआईआर का फार्म नहीं भरता, वो खुद भी नहीं भरेंगी। दूसरी ओर, भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची से लाखों फर्जी नाम कटने और अपना अल्पसंख्यक वोट बैंक बिखरने की आशंका से तृणमूल कांग्रेस डरी हुई है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 7।6 करोड़ वोटर हैं, इनमें से 2।4 करोड़ वोटरों के नाम का मिलान वर्ष 2002 की सूची से कर लिया गया है। यानी इन करीब 32 फीसदी वोटरों को फार्म के साथ कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। यहां एसआईआर के लिए 80 हजार बूथ लेवल आफिसर्स (बीएलओ) नियुक्त किए गए हैं।

चार नवंबर को एसआईआर की शुरुआत के दिन ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके विरोध में कोलकाता में रैली निकाली। उसमें उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोटों नहीं बल्कि नोटों के बल पर बंगाल विधानसभा चुनाव जीतना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी एसआईआर के जरिए लोगों को आतंकित करने का प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर एक भी वैध वोटर का नाम मतदाता सूची से कटता है तो हम भाजपा सरकार को गिरा देंगे। बंगाल के प्रवासी मजदूरों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उनको बांग्लादेशी बताते हुए बंगाल के खिलाफ झूठी खबरें फैला रही है।

तृणमूल कांग्रेस की इस रैली के जवाब में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी उत्तर 24-परगना जिले के आगरपाड़ा एक रैली निकाली। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर के बारे में झूठी खबरें फैला कर लोगों को गुमराह और आतंकित कर रही है।

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर के मुकाबले के लिए 'आमी बांग्लार  डिजिटल योद्धा' यानी 'मैं बंगाल का डिजिटल योद्धा हूं' कार्यक्रम शुरू किया है तो इसके मुकाबले बीजेपी ने डिजिटल सेना तैयार करने के लिए 'नमो युवा योद्धा' कार्यक्रम शुरू करने का एलान किया है।

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं कि पार्टी मतदाता सूची में पारदर्शिता की पक्षधर रही है। लेकिन किसी भी वैध वोटर का नाम इस सूची से नहीं काटा जाना चाहिए। हम ऐसी किसी कार्रवाई का कड़ा विरोध करेंगे। पार्टी विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन में एसआईआर के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने पर भी विचार कर रही है।

तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने एसआईआर की समयसीमा पर भी सवाल उठाया है। उसका सवाल है कि वर्ष 2002 में हुए एसआईआर करीब दो साल तक चला था। क्या अब चुनाव आयोग के पास ऐसी कोई जादू की छड़ी है जिससे वह इतने कम समय में ही सात करोड़ वोटरों तक पहुंच सकता है?

आखिर ऐसी जल्दी क्यों है? पार्टी ने एसआईआर के कारण खासकर राज्य के सीमावर्ती और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में अस्थिरता पैदा होने का अंदेशा जताया है। पार्टी का कहना है कि अगर ऐसा कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी।

उधर, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस वोट बैंक हाथ से निकलने के डर से ही एसआईआर का विरोध कर रही है। उसे मालूम है कि इस कवायद से मतदाता सूची में शामिल अवैध बांग्लादेशी लोगों के नाम हट जाएंगे। वह तृणमूल का मजबूत वोट बैंक रहा है।

सीपीएम के सचिव मोहम्मद सलीम का कहना है कि एसआईआर में पारदर्शिता बरतते हुए सही मतदाता सूची प्रकाशित होनी चाहिए। उनका सवाल है कि जनसंख्या की गिनती के बिना ही बीजेपी के प्रदेश और केंद्रीय नेता कैसे इस बात का दावा कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से एक करोड़ नाम हटाए जाएंगे?

प्रदेश कांग्रेस ने सरकार से एसआईआर मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सर्वदलीय बैठक बुलाकर सुप्रीम कोर्ट में जाने का एलान कर चुके हैं।

केरल विधानसभा में भी एक प्रस्ताव पास हो चुका है। लेकिन यहां मुख्यमंत्री आखिर इस मुद्दे पर रसर्वलदीय बैठक बुला कर सरकार के अगले कदम की जानकारी क्यों नहीं दे रही हैं?

इसबीच, एसआईआर के कथित आतंक के कारण राज्य में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ ने अपने सुसाइड नोट में यह बात कही है तो कुछ के परिवार वालों ने यह आरोप लगाया है।

तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपकते हुए इसके लिए केंद्र सरकार और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन दूसरी ओर, भाजपा ने इन मौतों के लिए तृणमूल कांग्रेस की गलतबयानी को ही जिम्मेदार ठहराया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एसआईआर के मुद्दे पर राज्य में जारी विवाद के लगातार होने का अंदेशा है। यह अगले चुनाव में भी दोनों राजनीतिक दलों का प्रमुख मुद्दा बन सकता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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