फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Self Defense is needful for girls, Blog about Missing lady doctor Dead Body found in Telangana

#कबतकनिर्भयाः केवल सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने से कुछ नहीं होगा

Dr. Divya Gupta डॉ.दिव्या गुप्ता
Updated Sat, 30 Nov 2019 01:53 PM IST
विज्ञापन
Self Defense is needful for girls, Blog about Missing lady doctor Dead Body found in Telangana
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कल से फिर बहुत गुस्सा आ रहा है। मन एक बार फिर दुखी है, व्यथित है पर गुस्सा ज्यादा है। जब एक जघन्य कांड होता है तो सोशल मीडिया पर लोग दुहाई देना शुरू कर देते हैं। देश, सरकार, पुलिस, नेता सब कठघरे में खड़े कर दिए जाते हैं। बहुत बहसें होती हैं। कुछ पोस्ट लिखकर, आपस में चर्चा कर और Hang the rapists के पोस्टर सोशल मीडिया पर लगा कर लोग सोचते हैं, बहुत कर लिया।

विज्ञापन


यहां याद दिला दूं कि निर्भया के पापियों को अभी तक फांसी नहीं हुई है। इससे ज्यादा गुस्सा भी नहीं आता और कुछ करने का जज्बा भी नहीं होता। लेकिन मुझे गुस्सा एक और बात का है। हमारी संस्था 'ज्वाला' विगत् 8 वर्षों से लड़कियों को आत्म सुरक्षा सिखाने का काम कर रही है, बिना किसी सरकारी मदद के। उद्देश्य सिर्फ यही कि हर लड़की सबला हो। हमारी यह पहल डेढ़ लाख लड़कियों तक पहुंची है। बावजूद इसके ये तो कुछ भी नहीं, मंज़िल अभी और दूर है।
विज्ञापन


गुस्सा इस बात का है कि स्कूलों, कॉलेजों को कहते हैं कि ट्रेनिंग करा दें, तो वे कहते हैं, फ्री में कर दीजिए। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के पैसे वसूल लेंगे माता-पिता से, पर सेल्फ डिफेंस सिखाने के लिए मामूली रकम नहीं खर्च कर सकते। 
विज्ञापन
विज्ञापन


चार साल पहले हमने एक कार्यक्रम शुरू किया था- 'मैं रक्षक', जोकि लड़कों के लिए था। हम सारा ज्ञान लड़कियों को ही क्यों दे रहे हैं, जबकि ज्ञान की ज़रूरत तो दूसरों को है। लड़कियों को सबल बनाएं पर लड़कों को भी तो कुछ सिखाएं। रिक्शा चालकों, बस ड्राइवर, क्लीनर, हेल्पर जैसे लोगों को भी हमने 'मैं रक्षक' की शपथ दिलवाई।

कोई भी काम सहभागिता के बिना आगे नहीं बढ़ता। समाज में बदलाव लाने के लिए सभी को तैयार होना पड़ेगा। जो इस दिशा में काम कर रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना होगा। हर कोई मशाल नहीं उठा सकता, लेकिन जो उठा चुके हैं, उनका साथ तो दे ही सकते हैं। हमारे अनेक साथी हमारा मज़ाक तक बना डालते हैं, पर हम अपनी सोच और कार्यों के प्रति समर्पित हैं। 

एक और जरूरी बात यह कि हमने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भी लिखा है कि हर स्कूल में आत्मरक्षा प्रशिक्षण आवश्यक किया जाए। महिला संवेदनशीलता, जेंडर सेंसटाइजेशन को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। ऐसे अनेक विचार हैं, जिनसे समाज में बदलाव लाया जा सकता है। 

एयर कंडीशन वाले कमरों में होने वाली बहसों में नहीं, धरातल पर काम करना होगा, बहुत काम। तेलंगाना में एक लड़की के साथ जो हुआ, निंदनीय  ऐसी घटनाएं होती ही क्यों है? हमारा पुरुष प्रधान समाज जब इतनी आसानी से मां-बहन की गाली दे देता है, तो वह मां-बहन की इज्जत क्या करेगा? सोचिएगा जरुर। 


परिचय: डॉ दिव्या गुप्ता, ज्वाला संस्था (jwala.org.in) की संस्थापक अध्यक्ष हैं।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed