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सऊदी अरब की तेल इकनॉमी पर ईऱान की नजर?

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Mon, 16 Sep 2019 05:11 PM IST
एक बार फिर पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व एशिया के देशों में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया है।
एक बार फिर पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व एशिया के देशों में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया है। - फोटो : Pixabay
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एक बार फिर पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व एशिया के देशों में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया है। सऊदी अरब के अबकैक और खुरैश स्थित दो बडे तेल रिइफाइनरियों पर ड्रोन से हमला किया गया है। इस हमले के बाद ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ गया है। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी यमन के हाउथी विद्रोहियों ने ली है। उन्होंने सऊदी अरब की रिफाइनरों और ऑयल फील्ड पर हमला करने का दावा किय है। सऊदी अरब में हुए हमले के बाद अंतराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल मची है। क्योंकि यह हमला सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था पर ही सिर्फ नहीं है, इससे वैश्विक तेल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

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हमले के बाद सऊदी अरब ने इन केंद्रों से प्रतिदिन शुद्ध किए जाने वाले 57 लाख बैरल के उत्पादन को निलंबित कर दिया है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के अनुसार हमले के शिकार हुए दोनों केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 57 लाख बैरल तेल की सफाई की जाती है, जो सऊदी अरब के प्रतिदिन होने वाले कुल तेल उत्पादन का 60 प्रतिशत है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का 5 प्रतिशत है। गौरतलब है कि सऊदी अरब इस समय लगभग 98 लाख बैरल तेल प्रतिदिन उत्पादन कर रहा है। जिन फैसिलिटी सेंटरों पर  हमला हुआ, वहां कड़वे तेल को मीठे तेल में तब्दील किया जाता है।

ईरानी विरोधी देशों के लिए हमला एक खतरनाक संकेत
हालांकि अमेरिका इस हमले में सीधे तौर पर ईऱान को भागीदार मान रहा है, लेकिन फिलहाल ईऱान ने इससे साफ इंकार कर दिया है। अगर इस हमले के पीछे हाउथी विद्रोही है तो यह अमेरिकी गठबंधन और पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगियों के लिए गंभीर चेतावनी है।

अगर हमले में ईऱान पीछे से भी शामिल है तो यह सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के तेल फैसिलिटी सेंटरों पर हमला कर अमेरिकी गठबंधन को साफ बताया गया है कि अमेरिका और पश्चिमी ताकतों को कहीं भी चुनौती दे सकती है। संदेश यही है कि तमाम अमेरिकी दावों के बीच ईऱान समर्थित गुट इस इलाके में मजबूत है, वे कहीं भी हमला करने में सक्षम है।

क्योंकि सऊदी तेल कंपनी अरामको के फैसिलिटी सेंटर पर यह पहला हमला नहीं है। इससे पहले भी सऊदी अरब के अंदर अरामको के तेल पाइप लाइन और एलएनजी गैस सेंटर हमला किया गया था। इन हमलों में भी ईऱान और हाउथी विद्रोहियों का हाथ बताया गया था। यमन के एक इलाके पर कब्जा कर बैठे हाउथी विद्रोहियों को ईऱान खुलकर समर्थन कर रहा है। हाउथी विद्रोहियों ने 2014 में यमन की राजधानी साना पर कब्जा कर लिया था औऱ सऊदी अरब समर्थित सरकार को खदेड़ दिया था। इसके बाद 2015 से लगातार सऊदी अर और उसके सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात की सेना ने हाउथी विद्रोहियों के खिलाफ य़ुद छेड़ रखा है। हालांकि अभी तक अमेरिकी एजेंसियों को शक है कि हमला ईऱान या इराक से किया गया है और इसमें ईरान सीधे तौर पर शामिल है।  

 

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