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मकर संक्रांति विशेषः गंगा का सागर में मिलन स्थल है गंगासागर, स्नान का है महत्व

Ramesh sarafरमेश सर्राफ Updated Tue, 14 Jan 2020 12:38 PM IST
गंगासागर की तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थयात्राओं के समान मानी जाती है।
गंगासागर की तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थयात्राओं के समान मानी जाती है। - फोटो : अमर उजाला
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भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना गया है। गंगा नदी गंगोत्री से निकल कर पश्चिम बंगाल में सागर से मिलती है। गंगा का जहां सागर से मिलन होता है उस स्थान को ही गंगासागर कहा जाता है। इस स्थान को सागरद्वीप के नाम से भी जाना जाता है। भारत के तीर्थों में गंगासागर एक महातीर्थ हैं। प्रतिवर्ष यहां मकर संक्रान्ति पर बहुत बड़ा मेला लगता है जहां दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु गंगा सागर स्नान के लिए आते हैं।
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गंगासागर की तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थयात्राओं के समान मानी जाती है। पहले गंगासागर जाना हर किसी के लिये सम्भव नहीं होता था। तभी कहा जाता था कि सारे तीरथ बार-बार गंगासागर एक बार। हालांकि यह पुराने जमाने की बात है जब यहां सिर्फ जल मार्ग से ही पहुंचा जा सकता था। आधुनिक परिवहन साधनों से अब यहां आना सुगम हो गया है।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण चौबीस परगना जिले में स्थित इस तीर्थस्थल पर कपिल मुनि का मंदिर है, जिन्होंने भगवान राम के पूर्वज और इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार किया था। मान्यता है कि यहां मकर संक्रान्ति पर पुण्य-स्नान करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

कुम्भ मेले को छोड़कर देश में आयोजित होने वाले तमाम मेलों में गंगासागर का मेला सबसे बड़ा मेला होता है। हिन्दू धर्मग्रन्थों में इसकी चर्चा मोक्षधाम के तौर पर की गई है, जहां मकर संक्रान्ति के मौके पर दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु मोक्ष की कामना लेकर आते हैं और सागर-संगम में पुण्य की डुबकी लगाते है। 2020 के मकर संक्रान्ति स्नान के अवसर पर यहां 15-20 लाख लोगों के पहुंचने की सम्भावना जताई जा रही है।
 
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