एशेज में कहां गुम हो गई है डेविड वॉर्नर के बल्ले की गूंज
- एशेज 2019 के दूसरे मुकाबले में हारा ऑस्ट्रेलिया
- बेन स्टोक्स ने ऑस्ट्रेलिया के जबड़े से छीनी जीत
- एशेज 2019 के तीन मैच में वॉर्नर ने बनाए सिर्फ 79 रन
- पांच मैच की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबरी पर
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एशेज 2019 के दूसरे मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई टीम की नाकामी की एक वजह डेविड वॉर्नर भी हैं, क्योंकि वॉर्नर का बल्ला बुरी तरह खामोश है। अब तक खेले गए तीन टेस्ट मैचों में उनके बल्ले से 79 रन निकले हैं। एशेज से ठीक पहले 2019 विश्व कप में उन्होंने कमाल की बल्लेबाजी की थी। उससे पहले इंडियन प्रीमियर लीग में भी डेविड वॉर्नर का बल्ला जमकर गरजा था, लेकिन अपने देश के लिए सबसे प्रतिष्ठित एशेज सीरीज के आते आते उनके बल्ले की गूंज एक जबरदस्त खामोशी में बदल गई।
इस खामोशी की वजह तलाशने से पहले आपको याद दिला दें कि 2019 विश्व कप में डेविड वॉर्नर ने अपनी टीम के लिए सबसे ज्यादा 647 रन बनाए थे। इसमें 3 शतक और 3 अर्धशतक शामिल थे। उनकी औसत 71.88 की थी। इससे पहले आईपीएल 2019 में डेविड वॉर्नर का बल्ला खूब चला था। उन्होंने 12 मैचों में 692 रन बनाए थे। इसमें 1 शतक और 8 अर्धशतक मौजूद थे। उनकी स्ट्राइक रेट 143.86 की थी।
ऐसा भी नहीं है कि डेविड वॉर्नर को सिर्फ फटाफट क्रिकेट का बड़ा बल्लेबाज माना जाता हो। 21 टेस्ट शतक, साढ़े छह हजार के करीब टेस्ट रन किसी बल्लेबाज के खाते में यूं ही नहीं इकट्ठा होते। यानी टेस्ट फॉर्मेट में बल्ले की खामोशी की वजह कुछ और ही है।
फटाफट क्रिकेट पर ज्यादा फोकस
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में गेंद के साथ छेड़छाड़ के बाद डेविड वॉर्नर पर प्रतिबंध लगाया गया था। ये प्रतिबंध एक साल का था। तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ के साथ जब डेविड वॉर्नर पर बैन लगाया गया था, तब इस बात पर संदेह था कि ये दोनों खिलाड़ी मैदान में वापसी कर पाएंगे।
आधुनिक क्रिकेट में एक साल का अंतराल काफी लंबा होता है। इस बात का डर था कि कोई ना कोई खिलाड़ी इन दोनों को ‘रिप्लेस’ कर देगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। करीब साल भर बाद बैन हटने के बाद डेविड वॉर्नर के पास अपनी रनों की भूख को दिखाने का पहला मौका था-आईपीएल।
आईपीएल और उसके तुरंत बाद विश्व कप को ही दिमाग में रखकर संभवत: उन्होंने तैयारी भी की थी। यही वजह है कि जैसे ही टेस्ट क्रिकेट में उन्हें मौका मिला वो खुद को बदलने में अब तक असहज हैं। एशेज सीरीज के पहले टेस्ट मैच की दोनों पारियों में स्टुअर्ट ब्रॉड ने उन्हें अपना शिकार बनाया। पहली पारी में वॉर्नर 2 और दूसरी पारी में सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए।
लॉर्ड्स टेस्ट मैच में भी डेविड वॉर्नर दोनों पारियों में दहाई के आंकड़े तक पहुंचने से पहले ही पवेलियन लौट गए। लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 3 और दूसरी पारी में 5 रन बनाए। तीसरे टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 61 रन बनाए तो लगा कि अब वॉर्नर का बल्ला बोलेगा। लेकिन अगली पारी में एक बार फिर स्टुअर्ट ब्रॉड ने उन्हें खाता तक खोलने नहीं दिया।
वॉर्नर के फेल होने के पीछे इंग्लिश फार्मूला
इंग्लैंड के गेंदबाजों ने डेविड वॉर्नर के लिए खास प्लान तैयार किया था। इसके तकनीकी पक्ष को भी समझ लेते हैं। सबसे पहले तो इंग्लिश गेंदबाजों ने वॉर्नर को होरिजांटल शॉट्स खेलने के लिए रूम नहीं दिया। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने जान बूझकर गेंद की लेंथ को आगे रखा जिससे डेविड वॉर्नर नई गेंद के मूवमेंट में फंसे। जिसमें उन्हें सफलता भी मिली।
इंग्लैंड के गेंदबाजों ने डेविड वॉर्नर को ऑफ स्टंप पर ही लगातार गेंदबाजी की। किसी भी गेंदबाज ने उन्हें बड़े शॉट्स खेलने की आजादी नहीं दी। तेज गेंदबाजों ने डेविड वॉर्नर को जो गेंदें फेंकी उसमें मिडिल से आफ स्टंप पर एंगल लेती गेंदों का परसेंट ज्यादा था। साथ ही साथ डेविड वॉर्नर को स्ट्राइक भी ज्यादा बदलने नही दी गई।
स्टुअर्ट ब्रॉड, बेन स्टोक्स और जोफ्रा आर्चर ने अपनी स्टाक गेंद इन स्विंग,जो डेविड वॉर्नर के लिए बाहर जाती है का जबरदस्त इस्तेमाल किया। इंग्लिश गेंदबाजों ने वॉर्नर को राउंड द विकेट भी गेंदबाजी की। इन्हीं हमलों की काट डेविड वॉर्नर नहीं खोज पाए।