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राजस्थान चुनाव 2023 : मोदी की गारंटी बनाम गहलोत की गारंटी पर आकर टिका चुनाव

Fri, 24 Nov 2023 11:02 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Fri, 24 Nov 2023 11:02 AM IST
सार

राजस्थान में तीन दशक से यह एक परपंरा बन गई है कि 5 साल कांग्रेस सत्ता में रहती है और 5 साल भाजपा। 1998 के बाद तो कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत और भाजपा की ओर से वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री बनती आ रही हैं।

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Rajasthan election 2023 Result Is Based On The Game Of Election Promises Of BJP And Congress
राजस्थान चुनाव 2023 : मोदी की गारंटी बनाम गहलोत की गारंटी पर आकर टिका चुनाव। - फोटो : Social Media

विस्तार

राजस्थान में सर्दी ने प्रवेश कर लिया है, लेकिन राज्य का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर पहुंच गया है। विधानसभा चुनाव प्रचार का अंतिम दिन बीत चुका और सभी दलों ने पिछले एक महीने में मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। हालांकि, अंत में चुनाव मोदी की गारंटी बनाम अशोक गहलोत की गारंटी पर आकर टिक गया है।

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कांग्रेस जिसने पिछले कुछ महीनों में योजनाओं का अंबार लगा दिया और चुनाव से चंद रोज पहले सात गारंटियां लेकर आई। वो अब इन गारंटियों के सहारे चुनावी वैतरणी को पार करना चाहती है। भाजपा पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे और पांच साल में बदलाव के रिवाज के भरोसे है।
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राजस्थान में तीन दशक से यह एक परपंरा बन गई है कि 5 साल कांग्रेस सत्ता में रहती है और 5 साल भाजपा। 1998 के बाद तो कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत और भाजपा की ओर से वसुंधरा राजे ही मुख्यमंत्री बनती आ रही हैं। दोनों नेताओं ने कुल मिलाकर 25 साल तक राज किया है।

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2018 से अशोक गहलोत मुख्यमंत्री की कुर्सी पर हैं और अपनी पार्टी में भारी अंतर्विरोधों के बावजूद उन्होंने अपनी कुर्सी को बचाए रखा है, क्योंकि 2018 में जब पार्टी साधारण बहुमत से चुनाव जीती थी तो यही माना गया था कि कुर्सी पर पहला अधिकार सचिन पायलट का बनता है, क्योंकि उनके पार्टी अध्यक्ष रहते चुनाव लड़ा गया था, लेकिन तब सीनियर अशोक गहलोत कुर्सी पर बैठ गए थे। हालांकि, तब से लेकर चुनाव तक सचिन बनाम गहलोत ही राजस्थान में चला।  


अब चुनाव प्रचार में कांग्रेस यह नहीं कह रही है कि जीते तो अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री होंगे। बार-बार कांग्रेस नेता यही दोहरा रहे हैं कि चुनाव के बाद विधायक और आलाकमान तय करेगा कि किसको कुर्सी मिले? लेकिन अशोक गहलोत को करीब से जानने वाले जानते हैं कि यदि पार्टी पुनः सत्ता में आई तो कुर्सी पर कौन बैठेगा?

पार्टी के भीतर अंदरुनी लड़ाई से जूझ रहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कुछ महीने पहले फ्री बिजली, चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना में 25 लाख का बीमा, महिलाओं को रोडवेज यात्रा में छूट, महिलाओं को फ्री मोबाइल जैसी कई योजनाएं शुरू कीं। चुनाव से पहले वो 7 गारंटियां लेकर भी आए, जिनमें ओल्ड पेंशन स्कीम पर कानून बनाना, 2 रुपए किलो पर गोबर खरीदना, मुफ्त में अंग्रेजी शिक्षा, कॉलेज जाने वाले हर बच्चे को लैपटॉप, महिलाओं को साल में 10,000 रुपए, 15 लाख का आपदा राहत बीमा आदि शामिल हैं। 

Rajasthan election 2023 Result Is Based On The Game Of Election Promises Of BJP And Congress
जहां तक भारतीय जनता पार्टी की बात है तो यहां भी नेतृत्व को लेकर एक अंतरद्वंद्व चला आ रहा है। - फोटो : Social Media

कांग्रेस पार्टी ने मतदान से 4 दिन पहले अपना जो घोषणा पत्र जारी किया, उसमें जातीय जनगणना से लेकर फसलों पर एमएसपी कानून, लाखों नौकरियां, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा 50 लाख, ब्याज मुक्त कर्ज समेत ढेरों वादे किए गए हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर सभा और मंच पर यही बात दोहरा रहे हैं कि यह उनकी गारंटी है...। आश्चर्यजनक बात है कि अशोक गहलोत तो अपने नाम की गारंटी दे रहे हैं, लेकिन चुनाव के बाद वही मुख्यमंत्री बनेंगे, इस बात की गारंटी कांग्रेस नहीं दे रही है।

जहां तक भारतीय जनता पार्टी की बात है तो यहां भी नेतृत्व को लेकर एक अंतरद्वंद्व चला आ रहा है। पार्टी ने किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बदल दिया था। यही कारण है कि राजस्थान में इस समय भाजपा में चेहरों की भरमार है।

मुख्यमंत्री की रेस में कई नेता लगे हुए हैं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, राजेंद्र राठौड़, सतीश पूनियां, दीया कुमारी, बाबा बालकनाथ, डॉ. किरोड़ी लाल मीणा जैसे नाम लिए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नाम की चर्चा भी होती रहती है। इन सब के बावजूद चुनाव के अंत में बात मोदी की गारंटी पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के मतदाताओं को स्वयं की गारंटी दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि उनकी गारंटी है कि पेट्रोल-डीजल सस्ता करेंगे, गरीब महिलाओं को 450 रुपए में गैस सिलेंडर देंगे, मेधावी छात्राओं को स्कूटी और छात्रों को लैपटॉप दिया जाएगा, बेघरों आवास देंगे, 2025 तक हर घर तक पानी पहुंचाएंगे समेत कई और गारंटी हैं। भाजपा ने संकल्प पत्र भी जारी किया है, जिसमें कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार की जांच, पेपरलीक की जांच, महिला सुरक्षा, रोमियो स्क्वाड समेत ढेरों वादे किए गए हैं। 

सभी नेताओं को रैलियों में भीड़ भी जुट रही है। मतदाता स्पष्ट कुछ नहीं बता रहा। मतलब, किसकी गारंटी पर अब मतदाता ज्यादा भरोसा करेगा, इसका खुलासा 3 दिसंबर को चुनाव परिणाम के दिन ही होगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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