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Radhika Yadav Murder Case: क्या ‘रील लाइफ’ अब ‘रियल लाइफ’ को निगल रही है?

Sat, 12 Jul 2025 01:09 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Sat, 12 Jul 2025 01:09 PM IST
सार

रील की लत सामाजिक रिश्तों को भी कैसे तार-तार कर रही है, उसका ताजा उदाहरण हरियाणा के गुरूग्राम का है, जहां एक पिता दीपक यादव ने अपने लायसेंसी पिस्टल से रील बनाने की शौकीन अपनी बेटी राधिका की बेधड़क हत्या कर दी।

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Radhika Yadav Murder Case: Is reel life now swallowing real life
राधिका यादव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में ‘ऑनर किलिंग' , ईर्ष्या और रील बनाने तथा उसे देखने के पागलपन का यह नया और डरावना एंगल है। जहां रील बनाने के लिए लोग अपनी जानें तक गंवा रहे हैं, वहीं रील बनाने से नाराज लोग रीलबाजों की जान लेने में कोताही नहीं कर रहे हैं। रील देखने के लती (जिन्हें आजकल डिजीटल क्रिएटर कहा जाता है) लोग अपना ‘हीरा’ बर्बाद करने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं।

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दरअसल, यह 21 वीं सदी का नया समाज है, जहां ‘रील लाइफ’,  ‘रियल लाइफ’ पर हावी होती दिख रही है। ‘रील लाइफ’, रियल लाइफ के मूल्यों को निगलती जा रही है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन इस रीलबाजी से हासिल क्या हो रहा है, सिवाय एक नई और अतृप्त लत के? ये रील संस्कृति समाज के बदलते मानस का परिचायक तो है, लेकिन क्या ये मानव समाज को सही दिशा में भी ले जा रही है? 
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‘रील’ और ‘रियल’ लाइफ के बीच केवल एक अक्षर का भर नहीं बल्कि संस्कारों और जिंदगी की तल्ख सच्चाइयों का एक लंबा फासला है, जिसे रीलबाज या तो समझना नहीं चाहते या फिर उससे भागकर खयाली दुनिया में जीने को ही ‘जिंदगी’ मान बैठे हैं। दुनिया भर में आज हर मिनट इतनी रीले और शॉर्ट वीडियो अपलोड हो रहे हैं और हर दम करोड़ों लोग उन्हें देख रहे हैं तो प्रश्न यह भी उठता है कि आखिर लोग अपने दैनंदिन जीवन के अनुशासन और कर्तव्यों को किस कोने में धकेल रहे हैं?
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क्या रील बनाने और देखने की जितनी उपयोगिता है, क्या उससे ज्यादा  वक्त की बर्बादी नहीं है? क्या इससे एक  अश्लील, उन्मुक्त और उद्दंड समाज आकार नहीं ले रहा है?

रील की लत सामाजिक रिश्तों को भी कैसे तार-तार कर रही है, उसका ताजा उदाहरण हरियाणा के गुरूग्राम का है, जहां एक पिता दीपक यादव ने अपने लायसेंसी पिस्टल से रील बनाने की शौकीन अपनी बेटी राधिका की बेधड़क हत्या कर दी।

राधिका रील बना बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड किया करती थी। शुरूआती जानकारी में सामने आया कि बाप को बेटी द्वारा रीलें बनाना नापसंद था। क्योंकि इसके लिए वह सामाजिक मर्यादा और परिवार की गरिमा को भी ताक पर रख रही थी।

कहा यह भी जा रहा है कि टेनिस प्लेयर बेटी द्वारा अकादमी खोलकर की जाने वाली कमाई से बाप के पुरूषवादी अहम को ठेस पहुंचती थी। बाप स्वयं क्या काम करता है, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। इसके अलावा इस वीभत्स घटना का एक और एंगल बेटी का एक मुस्लिम युवक से दोस्ताना और उसके साथ रील बनाना यादव परिवार को नागवार गुजरा था।

अपनी सगी होनहार बेटी को तीन गोलियों से छलनी करते वक्त बाप के हाथ अगर नहीं कांपे तो इसका अर्थ यही है कि रीलबाजी का जुनून अब सामाजिक मर्यादाओं को लांघ गया है। इस मामले में मृतका राधिका की मां की भूमिका भी संदिग्ध है। शायद उसे भी बेटी की मौत से ज्यादा परिवार की प्रतिष्ठा की चिंता थी।  

हाल में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं और ये मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। मसलन  बिहार के सुपौल में एक महिला निर्मला देवी की रील बनाने की लत से परेशान उसके पति और सास-ससुर ने मिलकर उसकी हत्या कर शव गड्ढे में गाड़ दिया। बिहार के बेगूसराय में सोशल मीडिया रील्स बनाने से मना करने से खफा होकर पत्नी रानी कुमारी ने अपने पति महेश्वर राय को मायके वालों के साथ मिलकर मार डाला।

बिहार के ही रोहतास जिले के विक्रमगंज में एक पति टीपू साहू  ने नवविवाहिता पत्नी ममता देवी की इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट करने की आदत से आजिज आकर उसे मौत के घाट उतार दिया। कानपुर जिले के भीतरगांव में एक पत्नी रीना साहू ने रील बनाने से रोकने पर अपने पति धीरेन्द्र पासी की प्रेमी भतीजे रवि के साथ मिलकर हत्या कर दी।

दूसरी तरफ आगरा में एक पति ने न केवल अपनी पत्नी की हत्या की बल्कि लाश के साथ तीन दिन पर कमरे में ही रहा। दोनो ने लव मैरिज की थी, लेकिन पति शक्तिसिंह को पत्नी पार्वती द्वारा रील बनाना नापसंद था। हरियाणा के भिवानी में यूट्यूबर पत्नी रवीना ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति प्रवीण की हत्या की थी। दोनो के बीच हरियाणवी शार्ट फिल्में और रील बनाने और पोस्ट करने पर झगड़ा हुआ था। दोनो का एक बेटा भी है।

रवीना का प्रेमी सुरेश भी यूट्यूबर है। रवीना इंस्टाग्राम 35 हजार के करीब फालोअर्स हैं। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार के धीरज रात्रे ने पत्नी ज्योति द्वारा रील बनाने से खफा होकर उसका हथौड़ी और कैंची मारकर कत्ल कर दिया। ज्यादातर मामलो में विवाद की वजह केवल रील बनाना ही नहीं है बल्कि उसके पीछे उन्मुक्त आचरण भी है।

आखिर इस रील बनाने और उन्हें देखते रहने  के जुनून के पीछे मनोविज्ञान क्या है? विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत कम प्रयासों, संसाधनों, न्यूनतम निवेश और समय सीमा में व्यापक लोकप्रियता हासिल करने की अदम्य आकांक्षा इसके पीछे बड़ा कारण है। आज लोग किसी भी कीमत पर बस ‘फेमस’ होना चाहते हैं। निजता और सार्वजनिकता मिलकर नाचने लगे हैं। बदनामी और शोहरत के बीच फासला शून्य हो चुका है। नैतिक दूरियां बेमानी हो चुकी हैं।

क्रूरता और ममता मानो ए क ही फ्रेम में हैं। भाषा में शालीनता और अशालीनता की सीमाएं मिट गई हैं। चर्चित होना ही इसका महत्तम हासिल है। और  इस ‘फेम’के लिए आदमी कुछ भी करेगा। गोया जिंदगी कुल जमा लाइक्स और व्यूज की संख्या में समाहित हो गई है। और इसे पाने के लिए लोग खाई में गिरने, समंदर में डूबने, आकाश से कूदने और सरेआम अंतरंग सम्बन्ध बनाने के लिए बेहिचक तैयार हैं।

चाहे उन्हें इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े, जो जान से लेकर पारिवारिक रिश्तों के कत्ल तक कुछ भी हो सकती है। इन सबका अंतिम परिणाम क्या होगा, यह सोचने की फुरसत किसी को न तो है और न ही वैसा सोचकर अपने जुनून इंच भर भी कम होने देना चाहते हैं।

जिस प्रकार रील बनाने वालों के लिए ‘फेमस होना’ही मूल प्रेरक तत्व है तो इसे सतत देखने वालों के लिए ‘वर्च्युअल लाइफ’ में जीने का खयाली जुनून ही प्रेरणा है। लिहाजा रीलबाज ऐसी-ऐसी हरकतें कर रहे हैं कि जो सभ्यता के मान्य पैमानो के हिसाब से पागलपन ही कही जाएंगीं। वह रील बनाकर उसे पोस्ट करने के लिए जान पर खेलने को तैयार हैं। पोस्टेड रील पर अपेक्षित व्यूज का न मिलना उन्हें डिप्रेशन में झोंक सकता है। इस रीलबाजी का आर्थिक पहलू भी है। सोशल मीडिया कंपनियां इस प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने के लिए इन रील्स और शाॅर्ट फिल्म निर्माताओं को व्यूज के आधार पर पैसा भी देती हैं।

देश में इंस्टाग्राम के अलावा फेसबुक, यू ट्यूब, टिक टॉक आदि पापुलर प्लेटफार्म हैं। जो इंस्टाग्राम पर रील कहलाती है, वही यूट्यूब पर शॉर्ट फिल्म कहलाती है। हालांकि पैसा देने के रेट और नियम सबके अलग-अलग हैं। भारत में रीलबाजी के लिए इंस्टाग्राम सबसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म है। ऐसे में कई घरेलू महिलाएं भी रील बनाने को घर बैठे कमाई का जरिया मान बैठी हैं। शोहरत का नशा उन्हें और ऐसे काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इन्हीं में कई सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर का दर्जा पा जाते हैं, जिनकी अहिमयत अब राजनीतिक पार्टियों की नजर में भी बढ़ गई है। क्योंकि माना जाता है कि युवा वर्ग आजकल इन्हीं इन्फ्लूएंसरों की रीलों से प्रभावित होता है।  

बहरहाल इस ‘रील वर्ल्ड’ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया में रोजाना 2 अरब लोग इन रीलों के माध्यम से संवाद करते हैं। हालांकि हर प्लेटफार्म की प्रतिदिन रील व शॉर्ट फिल्म अपलोड करने की सीमा है। अलबत्ता भारत इंस्टाग्राम यूजरों का सबसे बड़ा केन्द्र है।

यहां इस प्लेटफार्म के 38 करोड़ से ज्यादा कंज्यूमर हैं, जो दुनिया में सर्वाधिक है। इनमें भी बड़ी संख्या 18 से 24 वर्ष के आयु वालों की है। वैसे रील बनाने के पीछे बेरोजगारी और अकेलापन भी कारण है। कई बार यह मनुष्य को असामाजिक बनने को विवश करता है। इसके अलावा फेसबुक रील्स के विश्व के 150 देशो में 80 करोड़ यूजर बताए जाते हैं।

इनसे डिजीटल क्रिएटर व्यूअर्स की संख्या के हिसाब से प्रतिमाह 35 हजार अमेरिकी डाॅलर तक कमा सकते हैं, जो भारतीय रूपए में करीब 30 लाख रू. होते हैं।  यूट्यूब पर प्रतिदिन 20 लाख से ज्यादा वीडियो अपलोड होते हैं, जबकि इंस्टाग्राम पर अपलोडेड रील्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा बताई जाती है। खुद सोशल मीडिया प्लेटफार्म भी इनसे खासी कमाई करते हैं।
 
डिजीटाइजेशन आज के युग का अभिन्न हिस्सा है। इससे हम चाहकर भी नहीं बच सकते। लेकिन इसकी अति भी खतरनाक है। इससे एक तरफ सही गलत सूचनाओं की बमबारी हो रही है तो दूसरी तरफ युवाओं पर इसका नकारात्मक शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ रहा है। यह प्रवृत्ति बढ़ती ही जा रही है, कहां जाकर रूकेगी, कोई नहीं कह सकता।

प्रौद्योगिकी रील बाजी को किस नए मुकाम तक ले जाएगी, उससे मानव समाज कितना प्रभावित होगा, यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन आज जो रहा है, वह भी कम चिंताजनक नहीं है।  मुकेश का गाया एक पुराना भजन है। ‘तूने रात गंवाई सोय कें, दिवस गंवाया खाय के, हीरा जनम अमोल था, कौड़ी बदले जाए। नए हालात में इसे संशोधित कर गाना पड़ेगा ‘हीरा जनम अमोल था, रील के बदले जाए..।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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