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सिंगला की बर्खास्तगी गुजरात के लिए भी संदेश है...?

Wed, 25 May 2022 02:31 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Wed, 25 May 2022 02:31 PM IST
सार

पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व स्टैंड-अप कमेडियन भगवंत मान ने अपने ही एक कैबिनेट मंत्री डॉ विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर इस बात को रेखांकित किया है कि कमेडियनों में निर्भीकता और जीवटता शायद दूसरे लोगों से कहीं ज्यादा होती है।

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Punjab health minister Vijay Singla's dismissal is also a message for Gujarat
भगवंत मान ने अपने ही एक कैबिनेट मंत्री डॉ विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर इस बात को रेखांकित किया है कि कॉमेडियन में निर्भीकता और जीवटता शायद दूसरे लोगों से कहीं ज्यादा होती है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व स्टैंड-अप कमेडियन भगवंत मान ने अपने ही एक कैबिनेट मंत्री डॉ विजय सिंगला को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर इस बात को रेखांकित किया है कि कॉमेडियन में निर्भीकता और जीवटता शायद दूसरे लोगों से कहीं ज्यादा होती है। फिर चाहे वो भगवंत मान हों या फिर व्लादिमिर जेलेंस्की।

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राजनीतिक हल्कों में सीएम मान द्वारा मात्र दो माह के कार्यकाल में ही अपने ही एक मंत्री का स्टिंग ऑपरेशन करवाकर ताबड़तोड़ उन्हें बर्खास्त कर गिरफ्तार करने के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। इस पर पंजाब भाजपा नेता हरजीत ग्रेवाल ने कहा कि यह कोई तरीका नहीं किसी को एकदम बर्खास्त कर दिया जाए।
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पहले मंत्री से बातचीत की जानी चाहिए, समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई भ्रष्ट नेता पार्टी में शामिल है तो इसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की भी है। उधर पंजाब के कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री डॉ राज कुमार वेरका ने भी मान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पंजाब में 'आप' सरकार के मंत्रियों को कोई हक नहीं कि वे रिश्वत मांगें, क्योंकि पंजाब में से रिश्वत मांगने का काम तो अरविन्द केजरीवाल की टीम ने संभाला हुआ है। 

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तीन कारणों से सख्त कार्रवाई

इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से हटकर देखें तो मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह सख्त कार्रवाई तीन कारणों से की है। पहला तो बतौर मुख्यमंत्री राज्य में अपनी अथॉरिटी को स्थापित करना, दूसरे भ्रष्टाचार को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अमल करना और तीसरे तथा राजनीतिक दृष्टि से गुजरात राज्य को संदेश देना कि आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार को कतई गवारा नहीं करती। क्योंकि अब पंजाब के बाद आम आदमी पार्टी (आप) गुजरात में अपनी संभावनाएं देख रही है।


गुजरात में इसी साल अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वहां बरसों से दो ध्रुवीय राजनीति कायम है और भाजपा ढाई दशकों से अंगद की पैर की तरह सत्ता पर काबिज है। गुजरात हिंदुत्व की पहली प्रयोगशाला भी है।  

करप्शन नहीं होगा बर्दाश्त

बहरहाल, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ा कदम उठाकर पंजाब और देश को एक संदेश जरूर दिया है कि करप्शन को वो किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। वैसे भी मान इस देश में मोदी योगी परंपरा के नेता हैं, जिनका अपना कोई परिवार नहीं है (मान की पत्नी पहले ही तलाक ले चुकी है)।

गौरतलब है कि इसके पहले मान के राजनीतिक गुरू अरविंद केजरीवाल ने भी सीएम के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री आसिम अहमद खान को 6 लाख की घूस लेने के आरोपों के बाद मंत्री पद से हटा दिया था। आसिम से भी पहले केजरीवाल ने दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जीतेंद्र तोमर को भी फर्जी डिग्री मामले में बर्खास्त किया था। तब केजरीवाल पर राजनीतिक स्वार्थों के चलते ऐसा करने के आरोप लगे थे। लेकिन जनता में इसका अनुकूल संदेश गया था। तब हटाए गए मंत्री आसिम अली खान ने तो केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार उजागर करने का दावा भी किया था, लेकिन बाद में वो खुद ही सियासी परिदृश्य से नदारद हो गए। 

हिम्मत भरा फैसला

भगवंत मान का यह हिम्मत भरा फैसला कई मायनों में अहम है। आज देश में तकरीबन सभी सरकारें कम या ज्यादा मात्रा में भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। तमाम ठेकों, टेंडरों, ट्रांसफर व पोस्टिंग में कमीशन, बयाना, नजराना और शुक्राना तय है। ये अमूमन 10 फीसदी से लेकर 25 फीसदी तक हो सकता है। अगर किसी मंत्री या अफसर तक अगर दस्तूरी के हिसाब से यह रकम पहुंचती रहे तो भी वो ‘ईमानदार’ की श्रेणी में ही गिना जाता है। ‘भ्रष्टाचारी’ शब्द का व्यावहारिक अर्थ है तयशुदा कमीशन अथवा पैसे से ज्यादा की लालच करना।

Punjab health minister Vijay Singla's dismissal is also a message for Gujarat
डॉ. विजय सिंगला दस साल पहले आम आदमी पार्टी में शरीक हुए थे। पेशे से वो डेंटिस्ट और साढ़े 6 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। - फोटो : फाइल फोटो

डॉ. विजय सिंगला दस साल पहले आम आदमी पार्टी में शरीक हुए थे। पेशे से वो डेंटिस्ट और साढ़े 6 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। डॉ. होने के कारण ही उन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का अहम पद दिया गया था। लेकिन लालच और भ्रष्टाचारी कल्चर का कोई ‘दि एंड’ नहीं होता। इस हिसाब से देखें तो विजय सिंगला ने बतौर कमीशन विभागीय खरीद और ठेकों का 1 फीसदी ही मांगा था, जो कमीशन की प्रचलित दरों के हिसाब से नगण्य ही कहा जाएगा। कहते हैं कि सिंगला ने 58 करोड़ के कामों के बदले सिंगला ने 1.16 की रिश्वत ठेकेदार व अफसरों से मांग थी।
 

राजनेताओं का चरित्र यह है कि वो पूरी बेशरमी के साथ झूठ बोल सकते हैं। भ्रष्टाचार करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण दे सकते हैं। विजय सिंगला ने भी कुछ दिन पहले मंत्रालय की कमान संभालते हुए दावा किया था कि वो भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। हो सकता है कि उनकी  नजर में 1 परसेंट कमीशन ‘भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में न आता हो।


भ्रष्टाचार से कमाया पैसा

इस देश में अमूमन राजनेताओं और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ रहा है। खासकर बीते कुछ सालो में तो भ्रष्टाचार से कमाया हुआ पैसा राजनीति में किए गए इन्वेस्टमेंट का अपेक्षित डिविडेंड ही माना जाता है। कई राजनेता और अफसर भ्रष्टाचार को कोसते हुए अरबों की संपत्ति अर्जित करते जाते हैं और जनता उनकी इस मासूम अदा को हतप्रभ होकर देखती रहती है।

उल्टे कई जगह तो वो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नेताओं को जिता भी देती है। सरकार में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार का यह कारोबार बेखटके चलता रहता है। अलबत्ता निजी तौर पर कुछ राजनेता जरूर बेदाग दिखते हैं, लेकिन वो अपवाद हैं। 

बचाने की होती है कोशिश

अगर उनके सहयोगी भ्रष्टाचार करते पकड़े जाते हैं तो उन्हें बचाने का खेल शुरू हो जाता है। यह बचाव अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप राजनीति से प्रेरित होने, विपक्ष का षड्यंत्र होने, करप्शन के ठोस सबूत पेश करने की चुनौती देने या फिर किसी जांच कमेटी से जांच कराकर रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालने के रूप में होता है। कुछेक मामले कोर्ट में चले जाते हैं। उन पर बरसो सुनवाई चलती है। बिरले मामलों जैसे लालू प्रसाद यादव, ओमप्रकाश चौटाला, पी. शशिकला जैसे मामलों में सजाएं भी हो जाती हैं। लेकिन इससे भ्रष्टाचारियों का हौसला कम नहीं होता। केवल करप्शन के रेट रिवाइज होते रहते हैं, जो रूपये की ताकत नापने का एक नकारात्मक जरिया होते हैं।

भ्रष्टाचार की स्वीकृति और एसीबी द्वारा अपनी गिरफ्तारी के बाद विजय सिंगला ने भी वही सफाई दी, जो अमूमन ऐसे मामलो में दी जाती है। सिंगला ने कहा कि ‘मुझे फंसाया गया है।‘ जबकि सीएम मान के मुताबिक सिंगला ने खुद उनके सामने कबूला कि उन्होंने ठेकों में 1 परसेंट रिश्वत मांगी थी। बतौर सबूत सिंगला का ऑडियो टेप भी है। 

आप का कांग्रेस पर आरोप

जहां तक भ्रष्टाचार के आरोपों का सवाल है तो आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी भाजपा व कांग्रेस ऐसे आरोप लगाती रही है। कहा गया कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल भी कोई दूध के धुले नहीं है। बावजूद इसके करप्शन के आरोप में घिरे किसी अपने सहयोगी मंत्री को ताबड़तोड़ चलता कर देना कोई आसान बात नहीं है।

भले ही यह मामला पंजाब का हो, लेकिन संदेश सभी सरकारों और उसमें शामिल मंत्रियों के लिए है। हालांकि इससे सरकार और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, यह मान लेना मासूमियत भरा होगा, लेकिन आम आदमी पार्टी और भगवंत मान ने उस गुजरात को स्पष्ट संदेश जरूर दिया है, जहां वह सत्ता में आने के ख्वाब देख रही है।

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि आप गुजरात में सत्ता में भले न आ पाए, लेकिन वो वहां प्रतिपक्षी कांग्रेस को हाशिए पर धकेल कर विपक्ष का स्पेस हथिया सकती है। हार्दिक पटेल के कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद अब वहां कोई चमकदार नाम कांग्रेस में नहीं बचा है।

ऐसे में आप दशकों से सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति एक स्वाभाविक असंतोष का सियासी फायदा उठा सकती है। यह इसलिए भी अहम है कि गुजरात ही सत्तर के दशक में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ जन्मे ‘नवनिर्माण आंदोलन’ की जन्म भूमि रही है। वहां 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल की भ्रष्ट सरकार के खिलाफ छात्रो  ने आंदोलन शुरू किया था।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।  

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