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शपथ समारोह के लिए मोदी की अचूक रणनीति, विदेशनीति के मोर्चे पर चला अब तक का सबसे अलग दांव

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Wed, 29 May 2019 04:44 PM IST
इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में बिम्सटेक के सदस्य देश आएंगे।
इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में बिम्सटेक के सदस्य देश आएंगे। - फोटो : अमर उजाला
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इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथग्रहण समारोह में बिम्सटेक के सदस्य देश आएंगे। पिछली बार प्रधानमंत्री ने सार्क देशों के नेताओं को अपने शपथग्रहण समारोह में बुलाया था। इस बार मोदी के शपथग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को तो आमंत्रण भेजा गया है, पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान इस बार आमंत्रण से वंचित है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री शपथ ली थी तो उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ आए थे। लेकिन इस बार शपथग्रहण समारोह में विदेशी मेहमानों के आमंत्रण को लेकर गहन चिंतन किया गया।
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क्या खास है मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में 
इस बार आमंत्रण को लेकर साउथ एशिया और पूर्वी एशिया की कुटनीति का खासा ख्याल रखा गया है। समुद्री नौवहन पर कब्जे को लेकर चल रही आपाधापी के बीच भारत ने इस बार बिम्सटेक के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया है, क्योंकि बिम्सटेक के सदस्य देश पूर्वी एशिया और भारत के बीच सहयोग के पुल बन रहे है।

हालांकि भारत ने मध्य एशिया की कूटनीति पर खासा ख्याल रखा है, इसलिए शंघाई सहयोग संगठन के इस साल के मेजबान देश किर्गिस्तान को भी शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है। पाकिस्तान से खराब संबंध भारत के लिए मध्य एशिया के इस्लामिक देशों को महत्वपूर्ण बनाता है।  

बिम्सटेक का महत्व बढ़ा, सार्क गायब
प्रधानमंत्री के शपथग्रहण में पिछली बार सार्क के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष आमंत्रित थे। इस बार सार्क  गायब है। हालांकि सार्क के कई सदस्य देश बिम्सटेक के बैनर तले आमंत्रित किए गए हैं। लेकिन सार्क में पाकिस्तान की सदस्यता ने सार्क के महत्व को खासा घटा दिया है। सार्क के कई सदस्य देशों को पाकिस्तान के आतंक समर्थक अड़ियल रवैये के कारण खासी परेशानी झेलनी पड़ी है। इससे सार्क का महत्व भी घटा है। वैसे में सार्क का विकल्प बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक को ऑपरेशन) बना है।

बंगाल की खाड़ी के आसपास के देश बिम्सटेक के सदस्य देश हैं, जिसमें थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल और भूटान और भारत शामिल है। बिम्सटेक का महत्व इसलिए है कि बंगाल की खाड़ी विश्व नौवहन का एक प्रमुख रास्ता है, जो दक्षिण चीन सागर को अरब सागर और फारस की खाड़ी से जोड़ता है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ाना है। इसमें ऊर्जा, खेती, पर्यटन, स्वास्थ्य, गरीबी हटाओ, तकनीक, मछलीपालन आदि शामिल हैं। 
 
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