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हंगामा है क्यों बरपा: अदनान सामी को पद्मश्री के बहाने सीएए पर सियासत

Mon, 27 Jan 2020 01:18 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Mon, 27 Jan 2020 01:18 PM IST
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padma shri award 2020 adnan sami shaheen bagh protest against caa nrc narendra modi Amit Shah
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ अदनान सामी और उनका परिवार (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सम्मानों की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर एक ओर बधाई संदेशों की भरमार दिख रही है तो दूसरी ओर आपत्ति जताते संदेशों की भी कमी नहीं है। एक समय तक पाकिस्तानी रहे और भारत की नागरिकता हासिल कर चुके बॉलीवुड गायक अदनान सामी को मिले पद्मश्री सम्मान पर सियासत शुरू हो गई है। मनसे नेता ने इस फैसले को वापस लिए जाने की मांग कर डाली तो दिग्विजय सिंह ने भी उनके बहाने नागरिकता संशोधन कानून के फैसले पर निशाना साधा। व्यक्तिगत तौर पर भी लोग विरोध जता रहे हैं। 

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26 जनवरी की शाम साल 2020 के पहले 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्म पुरस्कारों को लेकर करीब 47 हजार नॉमिनेशन आने की बात कही, जिनमें से चुनिंदा लोगों का चयन किया गया। जाहिर है कि एक पूरा का पूरा सिस्टम है, ज्यूरी है, मानक हैं, काम का आधार है, तय पैमाने पर खड़ा उतरने वालों को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है। फिर हंगामा क्यों? क्या केवल इसलिए कि देश में एनआरसी और सीएए को लेकर बड़े स्तर पर विरोध है।
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अदनान सामी पिछले तीन साल से भारतीय नागरिक हैं, जबकि वहसाल 2001 से ही वीजा अवधि बढ़ाकर भारत में रहते रहे। उनके जन्म से लेकर भारतीय नागरिक होने पर भी बात करेंगे, लेकिन उसके पहले पद्मश्री सम्मान के बहाने शुरू हुई सियासत पर चर्चा करते हैं। 
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अदनान को पद्मश्री दिए जाने पर सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक में विरोध दिख रहे हैं। राज ठाकरे की अगुआई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता अमेय खोपकर ने तो उन्हें नकली भारतीय कह डाला। उन्होंने कहा कि अदनान सामी असली भारतीय नागरिक नहीं हैं और हमारी पार्टी का विचार है कि उन्हें पद्मश्री दिए जाने का निर्णय वापस लिया जाना चाहिए। विरोधियों का तर्क ये है कि सरकार की मानसिकता राजनीति करने की है। सरकार ने सीएए पर विरोध करने वाले लोगों को जवाब देने, बरगलाने और अपनी सहिष्णु छवि साबित करने के लिए ऐसा किया है। 

इधर अदनान, उन्हें ट्रोल करने वाले यूजर को अपने अंदाज में जवाब दे रहे हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शाहीन बाग में चल रहे आंदोलन पर निशाना साधा। उन्होंने अदनान को बधाई देते हुए कहा कि अदनान उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने भारत के संविधान में आस्था जताई और भारतीय नागरिकता पाई। मुझे उम्मीद है कि शाहीन बाग सुन रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत नागरिकता लेने में विश्वास नहीं करता है। 



नागरिकता अधिनियम में यह कोई पहला संशोधन नहीं
संविधान लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने और रद्द करने के संबंध में एक विस्तृत कानून है- नागरिकता अधिनियम, 1955, जोकि भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान करता है। सीएए के रूप में इस अधिनियम में यह कोई पहला संशोधन नहीं हुआ है। साल 2019 से पहले साल 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में इस कानून में संशोधन हो चुके हैं। लेकिन इस बार बवाल इसलिए है, क्योंकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को इससे अलग रखा गया है। इस बार हुए संशोधन के बाद इस अधिनियम में पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों, हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग ही भारतीय नागरिकता के योग्य हो पाएंगे। 

अब चर्चा अदनान के पाकिस्तानी से हिन्दुस्तानी बनने की

padma shri award 2020 adnan sami shaheen bagh protest against caa nrc narendra modi Amit Shah
adnan sami - फोटो : social media

कभी पाकिस्तानी रहे गायक अदनान सामी को साल 2016 की पहली जनवरी न केवल नए साल के जश्न के लिए, बल्कि जीवनभर याद रह जाने वाले दिन के रूप में यादगार रह जाने वाली है। इस दिन से ही वह भारतीय हुए थे, जबकि भारत की नागरिकता पाने का प्रयास वह साल 2000 से ही कर रहे थे। 

कम लोगों को जानकारी होगी कि अदनान सामी के पिता भले ही पाकिस्तान के एक डिप्लोमेट थे, लेकिन उनकी मां भारतीय मूल की रही हैं। उनके रूट्स जम्मू कश्मीर से जुड़े हैं। अदनान का जन्म लंदन में हुआ है, जबकि वह साल 2001 से ही भारत में रह रहे हैं। आज उन्हें मिले पद्मश्री सम्मान पर आपत्ति जताने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कभी विपक्ष में रहते हुए भाजपा उनकी वीजा अवधि बढ़ाए जाने के कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार के फैसले का विरोध करती थी। और फिर इसी भाजपा सरकार ने पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में अदनान को नागरिकता दी। 

हालांकि इसे भी बहुत आश्चर्य से नहीं देखा जाना चाहिए। बात कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की, अक्सर देखा गया है कि विपक्ष में रहते कोई भी पार्टी सत्तासीन सरकार के जिन फैसलों का विरोध करती है, सत्ता में आने पर उसे लागू कर देती है। आधार, एफडीआई और एनपीआर जैसे मामलों में भी यही बात लागू होती है। 

अदनान सामी को नागरिकता देकर मोदी सरकार ने अक्सर सहिष्णुता पर सवाल खड़ा करने वाले उस वर्ग को भी जवाब दिया था, जिनका कहना होता था कि कलाकारों के लिए सरहदें नहीं होती, कोई सीमा नहीं होती। उन्हें नागरिकता दस्तावेजों के आधार पर और अधिनियम के तहत दी गई थी, लेकिन सियासत तो तब भी हुई थी। कहा जा रहा था कि अदनान के संबंध बॉलीवुड के दबंग सलमान खान से अच्छे हैं और सलमान के संबंध पीएम मोदी से, इसलिए वह भारतीय नागरिक बन पाए। 

जबकि तथ्य ये है कि अदनान सामी ने तत्कालीन गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास नागरिकता के लिए तथ्य और दस्तावेज प्रस्तुत किया था और इसके बाद तत्कालीन अटार्नी जनरल मुकुल रहतोगी की राय ली गई थी और तब जाकर अदनान को नागरिकता दी गई थी। खैर, सियासी एंगल तलाशने का चलन कोई नया थोड़े ही है।

भारत अब भी दुनिया के दूसरे देशों से अधिक सहिष्णु है, जिसके कारण दुनिया भर के लोगों का इस देश के प्रति आकर्षण है। सीएए को किनारा कर के देखा जाए तो अब भी यहां हर धर्म, संप्रदाय, नस्ल, जाति के लोगों को बराबर स्वतंत्रता हासिल है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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