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अतिरिक्त प्रयास से ही बनेगी बात: नकारात्मक गुणों पर विजय प्राप्त करें, जीवन का हर पल जिएं...
Fri, 21 Mar 2025 08:09 AM IST
शुभम कुमार
स्वामी शिवानंद सरस्वती
स्वामी शिवानंद सरस्वती
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 21 Mar 2025 08:09 AM IST
सार
इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी कि कोई इन्सान किसी कार्य को करने के लिए एक ही प्रयास करता है, अगर वह काम हो गया, तो ठीक और नहीं हुआ, तो वह संतुष्ट हो जाता है। वह अतिरिक्त प्रयास करना भूल गया है।
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जीवन का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
क्या आपने कभी मानव जीवन के महत्व और महिमा को समझा है? और आपने कभी महसूस किया है कि यह जीवन कितना अनमोल उपहार है? क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि जीवन एक उत्कृष्ट उद्देश्य की पूर्ति के लिए है? वास्तव में इसका उद्देश्य चिरस्थायी शांति और खुशी की प्राप्ति के लिए है। आप भी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि जीवन केवल सांस लेना, खाना, पचाना, सोना भर नहीं है, बल्कि जीवन में कुछ सार्थक हासिल भी करना है। आप जीवन को अच्छी तरह से तब जीते हैं, जब आप मन का संतुलन और उच्चतम आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करने के साथ-साथ मानवता के कल्याण के लिए प्रयास करते हैं। कुछ लोग जीवन को इस तरह परिभाषित करते हैं कि किसी व्यक्ति के पास खाने को टोस्ट, मक्खन और जैम, पहनने को फैशनेबल कपड़े, रहने को एक बंगला और घूमने के लिए एक मोटर कार तो होनी ही चाहिए।
यह सब मिल भी गया, तो उसके बाद क्या? क्या केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही आपको वास्तविक सुख दे सकती हैं? केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही क्या आत्म को उन्नत कर सकती हैं? क्या केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही आपको साहस, शांति और आनंद प्रदान कर सकती हैं? निरंतर ध्यान भटकाने वाली इच्छाओं के चक्कर में जीवन के वास्तविक लक्ष्य को कभी नहीं भूलना चाहिए।
अवास्तविक को वास्तविक, क्षणभंगुर को स्थायी समझने की भूल करना तथा जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य आत्म-साक्षात्कार को भूल जाने से बड़ी कोई भूल नहीं है। इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है कि कोई इन्सान किसी कार्य को करने के लिए एक ही प्रयास करता है, अगर वह काम हो गया, तो ठीक और नहीं हुआ, तो वह संतुष्ट हो जाता है। वह अतिरिक्त प्रयास करना भूल गया है। आपने कभी सोचा है कि जब आप बच्चे थे, तब आप असहाय थे।
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अगर आपको बीमारी घेर लेती है और आप गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तब भी आप असहाय ही होते हैं। जब बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी आपदाएं आप पर टूट पड़ती हैं, उस वक्त भी आप असहाय ही होते हैं। जब आप बूढ़े हो जाते हैं, तब भी आप असहाय ही होते हैं। फिर आप इतने घमंडी और अहंकारी क्यों हो गए हैं? अपने भ्रमों से ऊपर उठकर विवेक, आत्म-विश्लेषण के माध्यम से अच्छाई प्राप्त करने का हरसंभव प्रयास ही जीवन को सही दिशा देगा।
तभी आप अपने शरीर और मन से परे जा पाओगे, तभी मुक्त और खुश रह पाओगे। सत्य को साथी मानें और अच्छाई के मूल सिद्धांतों से विचलित न हों। इसके साथ परिश्रम और सावधानी से हृदय के श्रेष्ठ गुणों को विकसित करें। साहस, दृढ़ विश्वास और सामान्य ज्ञान के साथ सच्चाई से अपना जीवन जिएं। समाज में कितने लोग आपसे डरते हैं, यह असली वीरता और साहस नहीं है, बल्कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर अहंकार पर काबू पाना असली वीरता है। पूर्वाग्रह से पैदा हुए सभी भेद और मतभेदों को त्याग दें। सभी से प्यार करें। भाईचारे की भावना से सभी के साथ सहयोग करें और अपने दिल में करुणा की ज्योति जलाएं।
सूत्र- जीवन का हर पल जिएं
नकारात्मक गुणों पर विजय प्राप्त करें और अपने मधुर मूल घर, शाश्वत शांति और आनंद के निवास पर लौटें। परिश्रमपूर्वक संघर्ष करके और व्यावहारिक अच्छाई के जीवन के माध्यम से, जिसे योग कहा जाता है, इसी जीवन में आध्यात्मिक पूर्णता प्राप्त करें। इस तरह जीवन का हर पल जिएं।
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यह सब मिल भी गया, तो उसके बाद क्या? क्या केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही आपको वास्तविक सुख दे सकती हैं? केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही क्या आत्म को उन्नत कर सकती हैं? क्या केवल भौतिक सुख-सुविधाएं ही आपको साहस, शांति और आनंद प्रदान कर सकती हैं? निरंतर ध्यान भटकाने वाली इच्छाओं के चक्कर में जीवन के वास्तविक लक्ष्य को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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अवास्तविक को वास्तविक, क्षणभंगुर को स्थायी समझने की भूल करना तथा जीवन के सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य आत्म-साक्षात्कार को भूल जाने से बड़ी कोई भूल नहीं है। इससे बड़ी त्रासदी क्या हो सकती है कि कोई इन्सान किसी कार्य को करने के लिए एक ही प्रयास करता है, अगर वह काम हो गया, तो ठीक और नहीं हुआ, तो वह संतुष्ट हो जाता है। वह अतिरिक्त प्रयास करना भूल गया है। आपने कभी सोचा है कि जब आप बच्चे थे, तब आप असहाय थे।
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अगर आपको बीमारी घेर लेती है और आप गंभीर रूप से बीमार होते हैं, तब भी आप असहाय ही होते हैं। जब बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी आपदाएं आप पर टूट पड़ती हैं, उस वक्त भी आप असहाय ही होते हैं। जब आप बूढ़े हो जाते हैं, तब भी आप असहाय ही होते हैं। फिर आप इतने घमंडी और अहंकारी क्यों हो गए हैं? अपने भ्रमों से ऊपर उठकर विवेक, आत्म-विश्लेषण के माध्यम से अच्छाई प्राप्त करने का हरसंभव प्रयास ही जीवन को सही दिशा देगा।
तभी आप अपने शरीर और मन से परे जा पाओगे, तभी मुक्त और खुश रह पाओगे। सत्य को साथी मानें और अच्छाई के मूल सिद्धांतों से विचलित न हों। इसके साथ परिश्रम और सावधानी से हृदय के श्रेष्ठ गुणों को विकसित करें। साहस, दृढ़ विश्वास और सामान्य ज्ञान के साथ सच्चाई से अपना जीवन जिएं। समाज में कितने लोग आपसे डरते हैं, यह असली वीरता और साहस नहीं है, बल्कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण कर अहंकार पर काबू पाना असली वीरता है। पूर्वाग्रह से पैदा हुए सभी भेद और मतभेदों को त्याग दें। सभी से प्यार करें। भाईचारे की भावना से सभी के साथ सहयोग करें और अपने दिल में करुणा की ज्योति जलाएं।
सूत्र- जीवन का हर पल जिएं
नकारात्मक गुणों पर विजय प्राप्त करें और अपने मधुर मूल घर, शाश्वत शांति और आनंद के निवास पर लौटें। परिश्रमपूर्वक संघर्ष करके और व्यावहारिक अच्छाई के जीवन के माध्यम से, जिसे योग कहा जाता है, इसी जीवन में आध्यात्मिक पूर्णता प्राप्त करें। इस तरह जीवन का हर पल जिएं।