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इमरान खान का एक साल: भरोसे पर कितने खरे उतरे पाकिस्तानी पीएम

rajesh badalराजेश बादल Updated Sun, 18 Aug 2019 09:43 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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ठीक एक साल पहले अठारह अगस्त को इमरान ख़ान सत्ता में आए थे। उससे पहले उन्हें कभी भी पाकिस्तान की राजनीति में गंभीरता से नहीं लिया जाता था। बीते एक साल में उनकी हरकतों ने साबित कर दिया है कि उनकी छबि प्लेबॉय की क्यों थी और अब उन्हें यू टर्न प्राइम मिनिस्टर क्यों कहा जाता है। प्रधानमंत्री बनने से पहले वे पाकिस्तान पर अमेरिका का ग़ुलाम होने का आरोप लगाते थे।
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अपने वतन पर चीन के चंगुल में फंंसने का आरोप लगाते थे। चीनी बैंकों के पाकिस्तान में कारोबार करने और चीनी मुद्रा को पाकिस्तान में मान्यता देने का विरोध करते थे। दिवालिया होने की कग़ार पर खड़े मुल्क़ को जादुई छड़ी से अमीर बना देने के वादे करते थे।

मंंहगाई रोकने और बेरोज़गारी दूर करने के सपने दिखाते थे। अंंधेरे में डूबे रहने वाले पाकिस्तान को बिजली के उजाले से भर देने का वादा करते थे और सबसे बड़ी बात अपने देश में दिए जा रहे आतंकवाद को सरकारी संरक्षण का विरोध करते थे। आज पाकिस्तान के लोग पाते हैं कि वे सपनों के इस सौदागर के जाल में फंंसकर रह गए हैं।
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