कभी एनडीए के साथ थे नवीन पटनायक लेकिन ऐसे टूट गए थे रिश्ते, कैसे बने ओडिशा के मसीहा?

Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Fri, 24 May 2019 07:16 PM IST
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कभी एनडीए के साथ थे नवीन पटनायक लेकिन ऐसे टूट गए थे रिश्ते, कैसे बने ओडिशा के मसीहा?
कभी एनडीए के साथ थे नवीन पटनायक लेकिन ऐसे टूट गए थे रिश्ते, कैसे बने ओडिशा के मसीहा? - फोटो : सोशल मीडिया

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ज्योति बसु, माणिक सरकार, पवन चामलिंग और नवीन पटनायक में आखिर क्या समानताएं है? सिर्फ यही कि ये तमाम हस्तियां सबसे लंबे समय तक अपने अपने राज्यों के मुख्यमंत्री रहे हैं? या फिर उनकी सादगी और अपने राज्य को लेकर वह समर्पण जिसकी बदौलत वहां की जनता ने उन्हें अपना मसीहा मान लिया? लेफ्ट का किला बेशक अब पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में ढह चुका हो, लेकिन ज्योति बाबू और माणिक सरकार आज भी वहां के लिए एक आईकॉन तो हैं ही।
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सियासत के आईकॉन नवीन पटनायक 
ऐसे ही आईकॉन बनकर एक बार फिर उभरे हैं नवीन पटनायक। अगर आपने नवीन बाबू का कोई भाषण सुना हो या इंटरव्यू देखा हो तो याद कीजिए आपने उन्हें कभी ज्यादा बोलते हुए और अपनी शेखी बघारते हुए नहीं देखा होगा। वह किसी भी सवाल का बेहद संक्षिप्त जवाब देते हैं, कभी भी 4 या 5 मिनट से लंबा भाषण नहीं देते हैं,लेकिन उड़ीसा में जहां भी जाते हैं, उनकी सादगी उन्हें आम आदमी के बहुत करीब ला खड़ा करती है। इसलिए कि वो सिर्फ और सिर्फ उड़ीसा की बात करते हैं। उनके लिए ये मायने नहीं रखता कि केन्द्र में एनडीए की सरकार है या यूपीए की, बीजेपी है या कांग्रेस.. वह सीधे तौर पर यही कहते हैं कि जो उनके राज्य के लिए सोचेगा, उसके विकास में मदद करेगा, विशेष पैकेज देगा, वह उसी का साथ देंगे।


दरअसल उड़ीसा पिछले डेढ़-दो दशकों में काफी बदला है। जो उड़ीसा कालाहांडी और अपने तमाम पिछड़े इलाकों की वजह से दुनिया में बदनाम था, वहां की तस्वीर धीरे-धीरे बदली है। जो उड़ीसा वहां आने वाले समुद्री तूफानों से तबाह हो जाता था और कई साल पीछे चला जाता था, अब वहां हर साल आने वाले नये-नये तूफानों का सामना करने और उससे निपटने के रास्ते तलाशे गए हैं। पहले से सावधानियां बरती जाती हैं।

प्राकृतिक आपदाओं को नवीन पटनायक या कोई भी सरकार रोक भले ही न पाए, लेकिन उसके लिए एहतियात बरतने, जान माल के कम से कम नुकसान की गारंटी तो दे ही सकती है। नवीन पटनायक ने वह काम किया। चुनावों के दौरान आए फैनी तूफान से प्रभावित लोगों को भी नवीन पटनायक ने काफी राहत दी, एहतियात इतनी बरती कि नुकसान कम से कम हुआ।
 
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