भारतीय संस्कृति के रंग में रंगा स्वीडन, ‘नमस्ते स्टॉकहोम’ में उतरा जनसैलाब
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भारतीय कला और संस्कृति से स्वीडन को रूबरू कराने के लिए पिछले दिनों राजधानी स्टॉकहोम में इंडियन कल्चर फ़ेस्टिवल ‘नमस्ते स्टॉकहोम’ का आयोजन हुआ। एक ओर जहां इस समारोह के जरिए स्थानीय लोगों को भारतीय कला, संस्कृति और स्वाद को क़रीब से जानने का मौक़ा मिला, तो वहीं यहां रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह समारोह किसी बहुप्रतिक्षित जश्न से कम नहीं था।
यहां बड़ी संख्या में भारतीयों के आने की वजह से यह कल्चरल फेस्टिवल मिनी इंडिया की तरह दिखाई दे रहा था। यहां आयोजित कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों की भाषाएं, उनके प्रमुख नृत्य संगीत और स्वाद का संगम हो रहा था।
5 सालों से हो रहा है आयोजन
स्वीडन में पिछले 5 सालों से लगातार आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम की लोकप्रियता का आलम यह है कि लोग देश के दूसरे हिस्सों से भी इसे देखने बड़ी संख्या में पहुंचे थे। एक तरह के मेले के रूप में तब्दील इस कार्यक्रम की लोकप्रियता यहां दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यहां के स्थानीय लोग न केवल भारतीय कला, संस्कृति को पसंद करते हैं बल्कि उसे गहराई से जानना भी चाहते हैं। वे भारतीय स्वाद के भी कायल हैं।
स्टॉकहोम के कुंगस्त्रागार्डन में आयोजित इस कार्यक्रम में तक़रीबन 40 फ़ूड स्टॉल और फ़ूड ट्रक लगे हुए थे। नज़ारा ऐसा था कि हर स्टॉल पर लंबी लाइन थी। महज़ जलेबी और छोले भटूरे के स्वाद के लिए लोग आधे-आधे घंटे तक लंबी लाइनों में खड़े रहे। भारतीय जायके का स्वाद लेने वाले देसी-विदेशी हर तरह के लोग थे। यही हाल पकौड़े, चाट, इडली, डोसा, बिरयानी और भारतीय आमों के स्टॉल पर भी थी। भारत में आम खाने के लिए बीस मिनट तक लाइन में शायद ही कोई खड़ा हो। लेकिन यहां तो बस देखने लायक नज़ारे थे।
यहां रहने वाले एक भारतीय परिवार ने कहा कि अगर कोई अपने वतन को याद कर रहा है या फिर वहां के सांस्कृतिक रंगों का आनंद उठाना चाहता है तो उसे निश्चित तौर पर यहां आना चाहिए, साथ ही भारतीय स्वाद का लुत्फ़ उठाने का इससे अच्छा मौक़ा तो हो ही नहीं सकता।
खास बात यह है कि इस इंडियन कल्चरल फ़ेस्टिवल के ज़रिये कलाकारों को अपने हुनर के प्रदर्शन का ज़बरदस्त मंच भी मिल रहा है। कई महीनों से नमस्ते स्टॉकहोम कार्यक्रम के प्रचार और इसमें लोगों की दिलचस्पी की वजह से इस आयोजन को कवर करने के लिए मीडिया का जमावड़ा भी ख़ूब लगा था। यह कार्यक्रम प्रमुख रूप से भारतीय दूतावास के सहयोग से यहां आयोजित होता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारत के अलग-अलग राज्यों की नृत्य शैली को यहां के कलाकारों ने पेश किया। वहीं संगीत और वाद्ययंत्रों का फ़्यूज़न भी अद्भुत था। इन कार्यक्रमों को प्रस्तुत करने वाले अधिकतम कलाकार भारतीय थे। लेकिन महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए एक विदेशी कलाकार ने उनके प्रिय गुजराती भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीड़ पराई जाने रे’ गाने से समां बांध दिया।
काफ़ी ख़ास था इस बार का नमस्ते स्टॉकहोम
कोलकाता की फ़ैशन डिज़ाइनर मेघना नायक ने यहां ज़ीरो वेस्ट और इकोफ्रेंडली जैसे विषयों के थीम पर अपने परिधानों को पेश किया। उनके कलेक्शन को पेश करने के लिए एनआरआई और ओसीआई महिलाओं के अलावा स्वीडिश महिलाएं और कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी रैंप पर कैट वॉक करती नज़र आईं, जिसे यहां काफ़ी सराहा भी गया। हैंडिक्राफ्ट के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त 5 हुनरमंदों को स्वीडन में प्रदर्शन का मिला मौक़ा।
स्वीडन में भारतीय दूतावास और भारतीय एनजीओ सहर की मदद से 5 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं को पहली बार यहां अपने हुनर का प्रदर्शन करने का मौक़ा मिला। इनके स्टाॅल पर पूरे दिन लोगों को जमावड़ा रहा। इनकी कारीगरी को देखने-सराहने के साथ ख़रीदारी करने वालों की संख्या भी अच्छी खासी थी, जिन मास्टर कारीगरों को यहां स्टॉल लगाने का मौक़ा मिला था उनमें जयपुर के आभूषण मीनाकारी में दक्ष कैलाश सोनी, नेचुरल फ़ाइबर आर्ट में माहिर उड़ीसा की जशोबंती मेहर,जम्मू कश्मीर से papier-mache आर्ट में मास्टर रियाज़ अहमद खान, सोंजी इंब्रॉडरी में माहिर गुलाम मुस्तफ़ा मीर और गुजरात के टाई एंड डाई क्राफ़्ट में नाम कमा चुके माहमेद याकूब शामिल थे। इनकी कारीगरी आयोजन में आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई थी।
इस आयोजन में बॉलीवुड पर सालों राज करने के साथ दुनिया भर में शोहरत हासिल कर चुकीं अभिनेत्रियों को भी यहां कलाकारों ने अपने प्रदर्शन से ट्रिब्यूट दिया। उन्होंने अपने डांस को अभिनेत्री रेखा, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित समेत कई दूसरी बेहतरीन अभिनेत्रियों को समर्पित किया।
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