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जंगल और प्राणियों का संसार: गिलहरी ने मुझे ऐसा बनाया

Rehanul Islam Sarkar रेहानुल इस्लाम सरकार
Updated Fri, 25 Aug 2023 10:30 AM IST
सार

लेंस के माध्यम से वन्य जीवन का अवलोकन करना एक ऐसी क्रिया है जिससे कोई भी कभी ऊब नहीं सकता। हर तस्वीर अनोखी है और अपने आप में एक अलग कहानी है। यह एक फ्रेम में पूरी कहानी कहने जैसा है।

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My journey of Wildlife photography competition
मेरे विश्वविद्यालय में आयोजित एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता में शुरू हुई। - फोटो : रेहानुल इस्लाम सरकार

विस्तार

जब आप कर्नाटक का नाम सुनते हैं, तो जो चीजें सबसे पहले आपके मन में आती हैं, वे हैं विशाल जोग जलप्रपात, शानदार मैसूर पैलेस या हम्पी में विस्मयकारी विट्ठला और विरूपक्षा मंदिर। हालांकि, केवल पर्यटक आकर्षण ही कर्नाटक की बेशकीमती पेशकश नहीं हैं, बल्कि इसका अद्भुत वन्य जीवन भी हैं। और मुझे इस खूबसूरत राज्य में काफी लंबा समय बिताने का सौभाग्य मिला है, और इस खजाने के हर रत्न से मैंने प्रेरणा ली है।

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यहां तक कि वन्यजीव फोटोग्राफी में मेरी यात्रा कलबुरगी में मेरे विश्वविद्यालय में आयोजित एक फोटोग्राफी प्रतियोगिता में शुरू हुई, जहां मैंने एक विनम्र भारतीय गिलहरी की तस्वीर ली जो मटर खाने के लिए मेरे हाथ पर चढ़ गई थी। इस व्यवहार ने मुझे इतना प्रभावित किया कि मैं सोचने लगा कि जानवरों को उनके प्राकृतिक रूप में देखना कितना शानदार है। तब से मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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लैंस का महत्व

लेंस के माध्यम से वन्य जीवन का अवलोकन करना एक ऐसी क्रिया है जिससे कोई भी कभी ऊब नहीं सकता। हर तस्वीर अनोखी है और अपने आप में एक अलग कहानी है। यह एक फ्रेम में पूरी कहानी कहने जैसा है। फील्ड के कुछ अनुभव इतने अविस्मर्णीय होते हैं कि वे आपकी स्मृति में जीवन भर के लिए अंकित हो जाते हैं।

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उनमें से एक मुझे याद है जब मैं पक्षी गणना के लिए नई दिल्ली में स्थित संजय वन गया था। विभिन्न पक्षियों को देखते हुए अचानक  मेरा ध्यान एक शोर की तरफ गया। देखा तो एक पुराने पीपल के तने पर दो मैना एक तोते का पीछा कर रहे थे जो तने के एक छेद में छिप गया था। मैना ने बहुत आक्रामक तरीके से तोते को छेद से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। तोता भी कहाँ अपने हथियार डालने वाला था,  इसलिए वह भी मैना से लड़ गया।

यह दो विरोधियों के बीच कुश्ती का रोचक द्वन्द था, जिसमे कलैया, गुलाटियां और कलाबाजी भी देखने को मिली। पूरा एपिसोड लगभग 10 मिनट तक चला, जिसके बाद तोता विजयी हुआ। इस व्यवहार पर मेरा अनुमान यह है कि चूंकि दोनों पक्षी गुफा-जीवी हैं,  इसलिए उन्होंने शरण हेतु छेद पर अपना दावा किया, और तोता मैना पर हावी हो गया। दो प्रजातियों के बीच इस तरह की दुर्लभ पारिस्थितिक परस्परक्रिया को देखने का ही अवसर वन्यजीव फोटोग्राफी प्रदान करती है।

हालांकि, इन अमूल्य अनुभवों के अलावा, वन्यजीव फोटोग्राफी की अपनी चुनौतियां हैं। हम सभी "लाइट्स, कैमरा और एक्शन" वाक्यांश से भली-भांति परिचित हैं। लेकिन मेरे लिए एक फोटोग्राफर के रूप में, ये तीन शब्द मेरी मुख्य समस्याएँ हैं क्योंकि ये किसी भी छवि को बिगाड़ने में सक्षम हैं। जब फोटोग्राफी की बात आती है तो लाइट सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है। शटर गति और आई.एस.ओ से प्रकाश को कुछ हद तक नियंत्रित करने के लिए समायोजित किया जा सकता है, लेकिन वे खराब रोशनी के लिए रामबाण नहीं हो सकते।

My journey of Wildlife photography competition
बुनियादी डीएसएलआर का उपयोग करके बड़े जानवरों को कैप्चर किया जा सकता है। - फोटो : रेहानुल इस्लाम सरकार

कैमरा है जरूरी

कैमरा दूसरी सबसे महत्वपूर्ण चीज है। उन्नत ज़ूम क्षमताओं वाला एक अच्छा कैमरा इस क्षेत्र में एक अच्छा निवेश है। बुनियादी डीएसएलआर का उपयोग करके बड़े जानवरों को कैप्चर किया जा सकता है, लेकिन पक्षियों या कीड़ों जैसे छोटे जानवरों के लिए एक पेशेवर कैमरे की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अधिकांश वन्यजीव तस्वीरें गति में ली जाती हैं। इसके लिए, कैमरे में ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइज़ेशन (OIS) होना अच्छा है। और अंत में, एक्शन।

एक्शन से मेरा तात्पर्य उस गति से है जिससे हम क्लिक करते हैं। वन्य जीवन में क्षण तात्कालिक होते हैं। उन्हें सही समय पर कैप्चर करना मुश्किल होता है। इसलिए,  फोटोग्राफर को कैमरे को सेट करने और शॉट्स लेने में बहुत तेज होना पड़ता हैं,  जो अतिरिक्त अभ्यास के साथ ही मुमकिन है। इन बातों का ध्यान रखकर तस्वीर में आने वाली विकृतियों को दूर किया जा सकता है।

वन्यजीव फोटोग्राफी कौशल और जुनून का मिश्रण है। इसलिए, इस अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति फोटोग्राफी दिवस पर, मैं सभी वन्यजीव फोटोग्राफी पेशेवरों और उत्साही लोगों को बधाई देता हूं, जिन्होंने वन्यजीवों के रहस्यों को दुनिया के सामने उजागर किया, और उस गिलहरी को भी जिसने मुझे अपनी दुनिया में प्रवेश करने का अवसर दिया।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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