फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Mp election congress and bjp rahul gandhi and shivraj

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की नर्इ रणनीति, राहुल के इस दांव से मुश्किल में शिवराज

Thu, 22 Nov 2018 04:27 PM IST
Updated Thu, 22 Nov 2018 04:27 PM IST
विज्ञापन
Mp election congress and bjp rahul gandhi and shivraj
बीते एक दशक में कांग्रेस की चुनावी रणनीति में बदलाव आए हैं। - फोटो : File Photo

बीते एक दशक में कांग्रेस की चुनावी रणनीति में बदलाव आए हैं। पार्टी ने प्रादेशिक चुनावों में क्षेत्रीय क्षत्रपों को आगे रखने की बजाय राष्ट्रीय स्तर के चेहरों को कमान सौंपी है और इसके नतीजे पार्टी को कर्इ राज्यों में हार रूप में भी मिले हैं। सीएम चेहरा ना घोषित करना और क्षेत्रीय ताकत के मुख्य चेहरों प्रचार से दूर रखने की रणनीति कांग्रेस के लिए घाटे का सौदा साबित हुई है।

विज्ञापन


बात करें मध्य प्रदेश की तो प्रदेश में कांग्रेस अमूमन अपने प्रादेशिक क्षत्रपों को सामने रख कर मैदान में उतरती रही है, लेकिन यहां भी बदलाव नजर आ रहे हैं। यहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद को फ्रंट पर रखते हुए मैदान में हैं। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज के खिलाफ पार्टी की तरफ से करीब आधा दर्जन चेहरों को कमलनाथ और सिंधिया के रूप में दो चेहरों में सीमित कर दिया है, यहां तक कि दिग्विजय सिंह जैसे नेता को नेपथ्य में भेज दिया गया है. लेकिन इससे कांग्रेस के लिए यह सवाल पूरी तरह से हल नहीं हो सका है कि शिवराज के सामने कांग्रेस की तरफ से किसका चेहरा होगा? ऐसे में राहुल गांधी कमलनाथ और सिंधिया दोनों को साथ में रखते हुए खुद फ्रंट पर दिखाई दे रहे हैं.
विज्ञापन

 

राहुल गांधी सीखने और समझने की राह 
मध्य प्रदेश में राहुल जैसे दिखार्इ दे रहे हैं उससे लगता है कि एक नेता के तौर पर उनकी लंबी और उबाऊ ट्रेनिंग खत्म हो चुकी है। हालांकि परिपक्वता का स्तर वैसा नहीं है और वे अपनी पुरानी समस्याओं से अभी तक उबर नहीं पाये हैं, लेकिन उनके हमले विरोधियों को परेशान करते दिखार्इ देते हैं।  मालवा में अपने अभियान के दौरान राहुल गलती से कह गये कि पनामा पेपर में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र का नाम है, जिसने भाजपा और शिवराज को उन पर हमला करने का मौका दे दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन


इस पर शिवराजसिंह का कहना था कि ‘राहुल कंफ्यूज आदमी हैं जो मामा को पनामा कह गए।’ उन्होंने राहुल पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा कि ‘वे राहुल गांधी के खिलाफ उनके परिवार पर कीचड़ उछालने के आरोप में मानहानि का मुकदमा करेंगे.’बाद में राहुल गांधी इस पर सफाई पेश करते हुए नजर आये हालांकि उनके इस सफाई का अंदाज भी दिलचस्प और चिढ़ाने वाला था। अपने बयान पर सफाई पेश करते हुए राहुल ने कहा कि ‘भाजपा शासित राज्यों में इतने घोटाले हुए हैं कि मैं कन्फ्यूज हो गया, पनामा पेपर लीक तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बेटे का मामला है, मप्र के सीएम ने तो ई-टेंडरिंग और व्यापमं घोटाला किया है.’
 

Mp election congress and bjp rahul gandhi and shivraj
कांग्रेस के लिए मप्र की राहें आसान नहीं है। - फोटो : File Photo

गुजरात की ट्रेनिंग एमपी में  
गुजरात विधानसभा चुनाव ने राहुल गांधी और उनकी पार्टी को एक नई दिशा दी है, इसे भाजपा और संघ के खिलाफ काउंटर नैरेटिव तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इसने राहुल और उनकी पार्टी को मुकाबले में वापस आने में मदद जरूर मिली है। मध्य प्रदेश में भी पिछले कुछ महीनों के अपने चुनावी अभियान के दौरान वे ध्यान खीचने  कामयाब रहे हैं जिसमें प्रदेश की जनता के अलावा प्रदेश के कई सीनियर पत्रकार भी शामिल हैं।  पहले राहुल गांधी का भाषण मुख्य रूप राष्ट्रीय मुद्दों और मोदी सरकार को निशाना बनाने पर ही फोकस रहता था जिसकी वजह से उनके भाषण स्थानीय लोगों को कनेक्ट नहीं कर पाते थे. लेकिन अब वे लोकल मुद्दों पर ज्यादा जोर देते हुए नजर आ रहे हैं.

क्या मप्र में सत्ता वापसी करेगी कांग्रेस  
पिछले 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस को इस बार मध्य प्रदेश में  माहौल अपने अनुरूप लग रहा है, लेकिन राह आसान भी नहीं है। मंदसौर में किसान आंदोलन मुद्दा, भ्रष्टाचार और व्यापमं जैसे मसले पर चुनाव जीतने का सपना पाल रही है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने की गुटबाजी बाधा बन सकती है। इधर, बसपा से गठबंधन का न हो पाने को भी कांग्रेस अपने लिये प्लस पॉइंट के रूप में देख रही है। कांग्रेस को लगता है कि इससे स्वर्ण मतदाता उसकी तरफ वापसी कर सकते हैं. लेकिन जमीन पर ऐसा है नहीं। राहुल के चुनावी अभियान के उमड़ने वाली भीड़ का वोट में तब्दील होना इतना भी आसान नहीं है। 

प्रदेश में बीजेपी की स्थिति
इधर बात यदि बीजेपी की करें तो इस बात में कोर्इ राज्य में पार्टी की जड़ें मजबूत है।  शिवराज की लोकप्रियता में कमी नहीं आर्इ है। पार्टी के कार्यकर्ता बढ़े हैं और वे मेहनत भी कर रहे हैं। इस सबकी तुलना में कांगेस के लिए जमीन पर हालात अब भी कठिन हैं। कार्यकर्ताओं में वैसा जोश और उत्साह नहीं है जो होना चाहिए। राहुल के बयान उनमें जोश भरते हैं, लेकिन अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की गलतियां निराश भी करती हैं।

इधर बीजेपी में प्रदेश में अब भी पीएम नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं में कमी की गई है। इसी तरह से अमित शाह भी यहां उतने सक्रिय दिखाई नहीं पड़ रहे हैं जितना दावा किया जा रहा है। पहले बताया गया था कि विधानसभा के दौरान वे मध्यप्रदेश में ही कैम्प करेंगें, लेकिन अंत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। राज्य में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान में भी केंद्र की उपलब्धियां पर ना के बराबर ही फोकस किया जा रहा है।

बहरहाल, भाजपा की तरफ से फ्रंट पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ही नजर आ रहे हैं, जिन्होंने लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिये अपने आप को पूरी तरह से झोंक दिया है. लेकिन इस बार उनका रास्ता आसान नहीं है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed