फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   martyrs day shaheed diwas 2020 mahatma gandhi death anniversary why nathuram godse killed Bapu

गांधीजी का पक्का अनुयायी था नाथूराम गोडसे, फिर क्यों बन गया उनका सबसे बड़ा विरोधी?

Thu, 30 Jan 2020 03:15 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Thu, 30 Jan 2020 03:15 PM IST
विज्ञापन
martyrs day shaheed diwas 2020 mahatma gandhi death anniversary why nathuram godse killed Bapu
गोडसे शुरू में महात्मा गांधी का पक्का अनुयायी था - फोटो : Amar Ujala

30 जनवरी 1948, भारत के लिए वह मनहूस दिन, जब देशवासियों ने अपना राष्ट्रपिता खो दिया। नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी के सीने में गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। इस जुर्म में नाथूराम को 15 नवंबर, 1949 को फांसी दी गई थी। नाथूराम गोडसे को हिंदू राष्ट्रवाद का कट्टर समर्थक माना जाता है। कभी गांधीजी का पक्का अनुयायी रहा नाथूराम आखिर क्यों उनका सबसे बड़ा विरोधी हो गया? आखिर उसकी पृष्ठभूमि क्या रही होगी? महात्मा गांधी, अहिंसा और शांति पर अध्ययनरत शोधार्थियों से इन्हीं बिंदुओं पर बातचीत के बाद कई ऐसी बातें सामने आई, जो मैंने अबतक नहीं सुनी थी। 

विज्ञापन


नाथूराम कौन था, उसकी पारिवारिक, शैक्षणिक और सामाजिक पृष्ठभूमि क्या थी? नाथूराम का जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था। हाई स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वह स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गया था। दावा ये भी किया जाता है कि गोडसे अपने भाइयों के साथ आरएसएस से भी जुड़ा था। हालांकि बाद में उसने 'हिंदू राष्ट्रीय दल' के नाम से अपना संगठन बना लिया था। गोडसे की रुचि लेखन में भी थी और वह हिंदू राष्ट्र नाम से अपना अखबार भी निकालता था। इस अखबार के अलावा अन्य अखबारों में भी उसके विचार और लेख प्रकाशित होते थे। 
विज्ञापन


महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में शोधरत नरेश गौतम कहते हैं कि गोडसे शुरू में महात्मा गांधी का पक्का अनुयायी था। गांधीजी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया था तो उसने बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया था। बाद में उसके दिमाग में यह बात बैठ गई कि गांधीजी ने अपनी 'आमरण अनशन' नीति से हिंदू हितों की अनदेखी की और इसके बाद से वह गांधीजी के खिलाफ हो गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


गांधीजी की हत्या के पीछे कई सारी बातें कही जाती है। न्यायालय में चली कार्यवाहियों में भी बार-बार हत्या के कारणों का जिक्र किया गया, लेकिन हत्या के पीछे असल वजह क्या थी, कहीं किसी राजनीतिक पार्टी के इशारे पर तो ऐसा नहीं हुआ, ऐसे कई सवाल अनुत्तरित रह गए हैं। कहा तो यह भी जाता है कि नाथूराम ने कई बार पहले भी गांधीजी की हत्या की कोशिश की थी, लेकिन कामयाब नहीं हुआ। 30 जनवरी को आखिरकार वह अपने नापाक मकसद में कामयाब हो ही गया। 

martyrs day shaheed diwas 2020 mahatma gandhi death anniversary why nathuram godse killed Bapu
nathuram godse and mahatma gandhi - फोटो : Social Media

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचार विभाग से महात्मा गांधी के सामाजिक योगदान पर शोध कर चुके डॉ. सत्यम कहते हैं कि आजादी के बाद देश के विभाजन के लिए नाथूराम गांधीजी को जिम्मेदार मानता था। गोडसे को लगता था कि गांधीजी ने ब्रिटिश आलाकमान, मुसलमानों के बीच अपनी अहिंसा और शांति  वाली छवि बनाने के चक्कर में देश का बंटवारा होने दिया।

गोडसे का मानना था कि तत्कालीन सरकार महात्मा गांधी के दबाव में मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ऐसा कर रही है। गोडसे इस बात पर भी तनाव में था कि कश्मीर समस्या के बावजूद मोहम्मद जिन्ना ने गांधीजी के पाकिस्तान दौरे की सहमति दी है। गांधीजी का मुस्लिमों के प्रति दया भाव से वह नफरत करता था। उसका मानना था कि गांधीजी को हिंदुओं की भावनाओं की परवाह नहीं है। 

गोडसे ने खुद गांधीजी के बारे में कहा था कि वह एक साधु हो सकते हैं लेकिन एक अच्छे राजनीतिज्ञ नहीं है। गौतम बताते हैं कि गांधीजी की हत्या के पीछे एक तर्क पाकिस्तान को दिए जाने वाले सरकारी कोष के संबंध में भी दिया जाता है। कांग्रेस पाकिस्तान को वादे के बावजूद 55 करोड़ रुपये नहीं देना चाहती थी, जबकि गांधीजी ने पाकिस्तान को पैसे देने के लिए आमरण अनशन करने की भी बात कही थी। गोडसे को लगता था कि गांधीजी मुस्लिमों के लिए ऐसा कर रहे हैं।

महात्मा गांधी की हत्या के बाद गोडसे को गिरफ्तार कर उस पर मुकदमा चलाया गया। पंजाब हाई कोर्ट में 8 नवंबर, 1949 को उसका ट्रायल हुआ और 15 नवंबर, 1949 को उसे अंबाला जेल में फांसी की सजा दी गई।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed