चुनाव से पहले नेताओं के बीच इस बड़ी प्रतियोगिता से जनता परेशान, नेता खेल रहे ये अनोखा खेल
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हरिशंकर परसाई ने अपने एक व्यंग्य में प्रजातंत्र को बचाने के सवाल को मजेदार तरीके से उठाया है। उन्होंने कहा है- ये प्रजातंत्र कैसे बचेगा और बच भी गया तो इसका करेंगे क्या? उस दौर के किस्सों को उन्होंने शामिल किया था, लेकिन उनका एक किरदार भैया जी अब भी मौजूं है। वो भैया जी से पूछते हैं ये प्रजातंत्र कैसे बचेगा। भैया जी जवाब में कहते हैं हमें तो बस इतना पता है हम बचेंगे तो प्रजातंत्र बचेगा। अब चलूं जरा टिकट की जुगाड़ करनी है। एक लाइन में भारतीय टिकट पार्टी की बेहतरीन भूमिका परसाई जी ने रख दी थी।
मेरे अपने निजी अनुभव में मजेदार किस्सा तब हुआ जब दो दिन पहले कांग्रेस प्रवक्ता के रूप में मेरी एक डिबेट में शामिल हुए जगदंबिका पाल बीजेपी के वरिष्ठ नेता के रूप में शामिल हुए। मैंने मजाक में कहा भी- समझ नहीं आ रहा आपसे सवाल पूछते पूछते कन्फ्यूज हो जा रहा हूं.. कांग्रेस के सवाल आप पर आ रहे हैं। वो मुस्कुराते रहे क्योंकि मुझसे ज्यादा असहज वो थे। ऐसा ही धुआंधार सिद्धू पाजी का मामला रहा। कभी मनमोहन सिंह पर करारे वार करने वाले सरदार जी ने मनमोहन के चरणों में नतमस्तक होकर भारतीय टिकिट पार्टी को सलाम ठोंक दिया।
चुनावी सीजन है तो प्रजातंत्र को बचाने के लिए सारे के सारे पहले खुद को बचाने में लगे हैं। अब जिसे जहां जगह मिल रही है टप्पा खाकर वहां जा रहा है। कुछ बड़े चेहरों की बात करें तो परदे पर खामोश खामोश कहने वाले शत्रुघ्न ने अपनी खामोशी को तोड़ा और खुलकर मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला। वहीं बहुत दिनों से बीजेपी के इर्द-गिर्द घूमने वाले अमर सिंह जी की प्रबल समर्थक जया प्रदा जी को फाइनली रामपुर से बीजेपी ने आजम के खिलाफ अपना उम्मीदवार बना दिया।
मेरी महासंग्राम यात्रा के दौरान एक मजेदार वाकया तब सामने आया जब सुबह से शाम तक में प्रयागराज के सांसद श्यामाचरण गुप्ता के कामकाज का जायजा लेता रहा और शाम होते होते पता चला कि वो तो साइकिल की सवारी कर रहे हैं। दरअसल, उनका टिकट कट चुका था और टिकट परमो धर्म के सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने प्रजातंत्र को बचाने के लिए खुद को बचाना ही बेहतर समझा।
ऐसे ही करीब दो दशक तक कांग्रेस से जुड़े रहे टॉम वडक्कन ने अपनी विचारधारा से माफ कीजिए पार्टी से किनारा कर लिया और बीजेपी में शामिल हो गए। वे यूपीए अध्यक्ष सोनिया के सबसे करीबी लोगों में गिने जाते थे। वहीं, कभी ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी रहे जय पांडा अब बीजेपी के हो चले हैं। वो लंबे समय पहले ही पार्टी से अलग हो गए थे। दूसरी ओर बीजेपी ने बीजेडी के सांसद बलभद्र मांझी को भी अपने साथ जोड़ा है। बीजेपी ने बंगाल में भी सेंध लगाई है. टीएमसी सांसद अनुपम हाजरा बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर। भारतीय टिकट पार्टी ही एक मात्र विचारधारा है। आप हमें टिकट देंगे तो हमारी विचारधारा आपकी दिशा में बहेगी नहीं तो विपक्षी पार्टी को भी हमारी उतनी ही जरूरत है। पॉलीटिक्स में हुजूर नफा नुकसान देखना जरूरी है क्योंकि प्रजातंत्र तो तभी बचेगा ना जब हम बचेंगे।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।