जीत के बाद मोदी को उठाना चाहिए ये ऐतिहासिक कदम, राहुल को करना चाहिए ये बड़ा काम
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मैं नतीजों से बहुत खुश हूं। देश को एक स्थिर और मजबूत सरकार मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 5 सालों में कई योजनाएं शुरू की हैं। जाहिर तौर पर उन्हें अमली जामा पहनाने के लिए कुछ और समय की जरूरत थी। यह समय भारतीय जनमानस ने उन्हें दे दिया है। देखते हैं वह इसका कितना इस्तेमाल कर पाते हैं।
विपक्ष की स्थिति?
विपक्ष पूरी तरह से टूटा और कमजोर दिखाई दे रहा है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है। राहुल गांधी के नेतृत्व को जनता खारिज कर चुकी है। जरूरत है कांग्रेस को कोई बड़ा फैसला लेने की, या फिर राहुल गांधी को स्वत: अध्यक्ष पद छोड़ कोई और जिम्मेदारी स्वीकार करने की। विपक्ष को मोदी पर निजी आक्षेप लगाने के बजाय योजनाओं की कमियों और उन्हें सुधारने के प्रयासों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जनता विकल्प में विश्वास रखती है विरोध में नहीं।
जनादेश से बड़े नायक बने मोदी को आगे क्या करना चाहिए?
इन चुनावों में निश्चित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही सबसे बड़े नायक के तौर पर उभर कर आए हैं। इस जनादेश ने उनके कद को और बढ़ा दिया है। देश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाने की तरफ भारतीय जनता पार्टी को विशेष प्रयास करने चाहिए।
खासतौर पर मुस्लिमों को भी बड़ी तादाद में अपने साथ जोड़ने पर काम करना चाहिए। गुजरात मॉडल सचमुच काम करता दिख रहा है, लेकिन गुजरात की तरह संपन्नता भी हर तरफ दिखनी चाहिए। मुझे उम्मीद है अगले 5 सालों में प्रधानमंत्री मोदी कुछ बेहतर योजनाओं के साथ आएंगे। साथ ही पुरानी योजनाओं, जैसे स्टार्टअप इंडिया, स्किल डेवलपमेंट इंडिया, उज्जवला और घर-घर शौचालय को और बेहतर करेंगे। आयुष्मान योजना अच्छी है, लेकिन विसंगतियों से भी भरी हुई है उस पर भी काम किया जाएगा।
अब विधानसभा के लिए उत्तर प्रदेश और बंगाल में क्या हो?
महागठबंधन ने उत्तर प्रदेश में एक प्रयास किया, लेकिन यह आधा अधूरा था और इसमें सत्ता का लालच साफ था। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले प्रदेश में यह गठबंधन गंभीर और नया स्वरूप ले, तो विपक्ष की राजनीति के लिए बेहतर होगा।
बंगाल की गंदगी और गुंडागर्दी से भी इस देश को निजात मिलनी चाहिए। बंगाल में कुछ संकेत लोकसभा चुनाव में मिल गए हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान यह स्थितियां और बिगड़ सकती हैं। ऐसे में चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों को पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव और सुरक्षित राजनीति के विशेष इंतजाम पर अभी से काम करना शुरू करना चाहिए।
चुनाव बेहद शानदार रहा, लेकिन फटाफट आए नतीजों ने बोर किया
अपने करियर का सबसे शानदार चुनाव देखा, लेकिन आज का दिन नतीजों के लिहाज से बहुत बोरिंग रहा। पिछले 2 महीने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल की राजनीति को जमीन पर जाकर समझने और कवर करने का मौका मिला। बहुत कुछ सिखाने वाला चुनाव रहा 2019 का लोकसभा चुनाव। नतीजे बहुत फटाफट आए और जब आए, तो एक झटके में सूपड़ा साफ।
कुछ उल्लू टाइप अंध विरोधियों का जरूरत से ज्यादा मोदी के खिलाफ गंदगी फैलाना बहुत चुभ रहा है। तो कुछ स्वयंभू भविष्य वक्ताओं का अपनी भविष्यवाणियों को बार-बार बांटना भी परेशान कर रहा है। दिल्ली के कई तिराहों पर गाड़ियां गुजरने के बाद जिस तरह कबूतर उड़ते हैं, उस तरह एंकरों का स्टूडियो में उड़ना बहुत अच्छा नहीं लग रहा। सौभाग्य से मुझे किसी चैनल को झेलने का कष्ट नहीं हुआ। बाद में फेसबुक पर ही सारी गंदगी को सरसरी निगाह से देख लिया। सबसे ज्यादा घटियापन हार के बावजूद विपक्ष के कौवों का कांय कांय करते रहना लगा, तो सत्ता पक्ष के समर्थकों का दंभ से फूल जाना भी दुखी ही कर रहा है।
देश के चुनाव खत्म हुए हैं, दुश्मन देश से लड़ाई नहीं जीती है। शांत हो जाओ और भगवान के लिए रुदाली मत बनो और ना ही मस्ताने हो जाओ। एक बड़ा चुनाव खत्म हुआ है और जनता ने बड़ा फैसला किया है। एक स्थिर सरकार के साथ देश के सामने अपार संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं। हर नागरिक को अपने रचनात्मक सहयोग के बारे में विचार करना चाहिए और राजनैतिक नफरत से भरी हुई बातों को विराम देना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।