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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Lok Sabha Election 2024: Election Voting percentage and truth of Bihar

लोकसभा चुनाव 2024: वोटिंग प्रतिशत और बिहार का सच

Mon, 22 Apr 2024 02:21 PM IST
Praveen Baghi प्रवीण बागी
Updated Mon, 22 Apr 2024 02:21 PM IST
सार

किसी ने कहा लगन का समय है, लोग शादी-ब्याह में व्यस्त हैं, इत्यादि-इत्यादि, लेकिन किसी ने सच नहीं बताया। सच यह है कि बिहार के करीब आधे मतदाता राज्य से बाहर रहते हैं। बहुत कम घर ऐसे मिलेंगे जिसके दो-चार युवा सदस्य बाहर न रहते हों। कोई पढ़ाई के लिए, कोई नौकरी या नौकरी की तैयारी के लिए तो कोई मजदूरी के लिए दूसरे प्रदेश में रह रहा है।

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Lok Sabha Election 2024: Election Voting percentage and truth of Bihar
लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : istock

विस्तार

नाकामी राजनेताओं की और बदनामी बिहार की! जी हां, यही हो रहा है। 19 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि बिहार में बहुत कम मतदान हुआ। बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी के मुताबिक चार सीटों पर कुल मिलाकर 48.23 प्रतिशत मतदान हुआ। यह पिछले चुनाव से 5 प्रतिशत कम है।

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मीडिया से लेकर पक्ष-विपक्ष ने मतदान कम होने की अपने-अपने तरीके से विवेचना की। कहा गया कि मतदाता उदासीन है। शहरी बाबू मतदान करने नहीं निकलते। किसी ने कहा लगन का समय है, लोग शादी-ब्याह में व्यस्त हैं, इत्यादि-इत्यादि, लेकिन किसी ने सच नहीं बताया। सच यह है कि बिहार के करीब आधे मतदाता राज्य से बाहर रहते हैं। बहुत कम घर ऐसे मिलेंगे जिसके दो-चार युवा सदस्य बाहर न रहते हों। कोई पढ़ाई के लिए, कोई नौकरी या नौकरी की तैयारी के लिए तो कोई मजदूरी के लिए दूसरे प्रदेश में रह रहा है, लेकिन वो वोटर यहीं का है। उसके क्षेत्र के मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज रहता है।
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स्वाभाविक है कि दूसरे प्रदेश में रहने वाले वोट देने के लिए तो बिहार नहीं आएंगे? इनमें से काफी लोगों ने अपने नाम वहां की मतदाता सूची में भी दर्ज करा लिए हैं। तो 50 प्रतिशत वोट तो ऐसे ही एप्सेंट है। शेष बचे 50 में से 48/49 प्रतिशत वोट दे रहे हैं तो यह कम कैसे हुआ?
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इसके अलावा मतदाता सूची में काफी संख्या में मृत वोटरों के नाम भी शामिल हैं। कई वोटरों के बूथ बिना उनकी जानकारी के बदल दिए जाते हैं। वैसे मतदाता अपने पुराने बूथ पर जाते हैं तो बताया जाता है की आपका नाम यहां नहीं है। वे लौट आते हैं। वोटर लिस्ट को अपडेट करने में गंभीरता का अभाव दिखता है। चुनाव आयोग भले दावा करे की सभी वोटरों तक पर्ची पहुंचाई जाएगी, लेकिन वह पहुंचती नहीं है।

यह सच बिहार के नेता, अधिकारी और चुनाव आयोग भी जानता है, लेकिन बताने से बचता है। नेता इसलिए चुप्पी साधे रहते हैं कि 50 प्रतिशत वोटरों के बिहार से बाहर रहने की बात कहेंगे तो उनकी नाकामी उजागर होगी। उन्होंने बिहार में अवसर उपलब्ध नहीं कराए इसलिए लोगों को बाहर जाना पड़ा। अब तो लोग गोलगप्पे बेचने के लिए भी बिहार से बाहर जा रहे हैं।

यह अधिकृत आंकड़ा है कि कोरोनाकाल में 40 लाख बिहारी मजदूर दूसरे प्रदेशों से लौटकर बिहार आए थे। सरकारी नौकरियों, व्यापार या आइटी सेक्टर में कार्यरत लोग, जिनका ठोस कमाई का स्त्रोत था वे नहीं लौटे। अब सभी फिर से बाहर चले गए, क्योंकि घोषणा के बाद भी सरकार सभी को यहां रोजगार नहीं दे पाई।

अपनी विफलता छुपाने के लिए नेताओं की चुप्पी तो समझ में आती है, पर मीडिया बिहार की आधी आबादी के विस्थापन  का यह सच क्यों नहीं बताता, यह समझ से परे है।

इसलिए कृपा करके कोई यह न कहे की बिहार के मतदाता उदासीन हैं या वोट देने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। बिहार का वोटर तो वोट देना चाहता है, अवसर तो उपलब्ध कराईए।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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