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जीवन धारा: निरंतरता ही विकास का आधार है; सूत्र- असफलताओं से सीखें

Wed, 08 Apr 2026 08:59 AM IST
Pavan एपीजे अब्दुल कलाम
एपीजे अब्दुल कलाम Published by: Pavan Updated Wed, 08 Apr 2026 08:59 AM IST
सार

हर इंसान अपनी प्रतिभा को अलग-अलग रूपों में प्रदर्शित करता है। ठीक वैसे ही, जैसे कुछ बीज सीधे पेड़ बन जाते हैं और कई नष्ट हो जाते हैं। पर वे भी व्यर्थ नहीं जाते, बल्कि खाद बनकर अगली पीढ़ी की जड़ों को मजबूत करते हैं।

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Life Stream: Neutrality is the foundation of growth; the key: learn from failures
निरंतरता ही विकास का आधार है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अक्सर हम अपनी वर्तमान समस्याओं और सीमित संसाधनों को ही अपनी अंतिम नियति मान लेते हैं, ठीक उसी ‘ईगो’ नामक शिशु की तरह, जो गर्भ के अंधेरे को ही पूरी दुनिया समझ बैठा था। गर्भ में पल रहे दो शिशुओं ‘ईगो’ और ‘स्पिरिट’ की कहानी मैंने इंटरनेट पर पढ़ी थी। स्पिरिट, ईगो से कहता है, ‘मुझे पता है कि तुम्हें यह स्वीकार करना कठिन लगेगा, पर मेरा विश्वास है कि जन्म के बाद भी जीवन है।’ ईगो उत्तर देता है, ‘मूर्ख मत बनो। अपने चारों ओर देखो। यही सब कुछ है। तुम हमेशा इस वास्तविकता से परे क्यों सोचते रहते हो?’ स्पिरिट कहता है, ‘ईगो, मेरा मानना है कि एक ‘मां’ भी होती है।’ इस पर ईगो हंसता है और कहता है कि क्या तुमने कभी मां को देखा है, तुम्हें पता भी है कि मां क्या होती है? तुम यह क्यों नहीं मान लेते कि यही सब कुछ है। यही वास्तविकता है।
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स्पिरिट कहता है, ‘ईगो, हम जो दबाव और अंधेरा लगातार महसूस करते हैं, जो हलचल हमें असहज कर देती है, यह एहसास कि हम जैसे-जैसे बढ़ रहे हैं, हमें संकुचित किया जा रहा है, क्या यह संकेत नहीं है कि हम एक नए जीवन की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हम प्रकाश देखेंगे?’ तब ईगो स्पिरिट से पूछता है कि तुमने कभी प्रकाश को देखा है भला? तुम्हें कैसे पता कि वह क्या होता है? इसलिए, यह दबाव और अंधकार ही जीवन है। थक हारकर स्पिरिट आखिरी बार कहता है, ‘ईगो, मुझे विश्वास है कि इस कष्टों के बाद हम न केवल प्रकाश देखेंगे, बल्कि मां से मिलने का आनंद भी अनुभव करेंगे।’ 
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मैं अपने देश के लोगों से यह कहना चाहता हूं कि हमें अपनी वर्तमान परिस्थितियों से कभी भी संतुष्ट होकर नहीं बैठना चाहिए। भारत की स्वतंत्रता के बाद के दशकों में हमें जो कुछ भी मिला, वह हमारी प्रगति का केवल एक छोटा-सा हिस्सा है। एक  छात्र ने मुझे पत्र लिखा-एक बरगद के पेड़ की पूरी शक्ति उसके बीजों में ही होती है। हर इन्सान लगभग एकसमान होता है, लेकिन अपनी प्रतिभाओं को अलग-अलग रूपों में प्रदर्शित करता है। ठीक उसी तरह, जैसे कुछ बीज सीधे पेड़ बन जाते हैं और कई बीज नष्ट हो जाते हैं। लेकिन जो बीज मिट्टी में मिलते हैं, वे भी व्यर्थ नहीं जाते; वे खाद बनकर अगली पीढ़ी की जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं।
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दरअसल, यह निरंतरता ही विकास का आधार है। उस छात्र ने मुझसे यह भी पूछा कि मैंने कैसे सुनिश्चित किया कि मेरे साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की क्षमताएं व्यर्थ न जाएं या उनका विकास समय से पहले रुक न जाए? मैंने उसे उत्तर भी दिया और बताया कि मैंने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों के साथ एकजुट टीम के रूप में काम किया है, ताकि कम समय में लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें। हमने कठिन समय में एक-दूसरे का हाथ थामा और असफलताओं से मिले सबक को अपनी अगली जीत की सीढ़ी बनाया। - इग्नाइटेड माइंड्स के अनूदित अंश 


सूत्र- असफलताओं से सीखें
हमें सीमित सोच के अंधकार में बंधकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि विश्वास, साहस और दूरदृष्टि के साथ एक उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करनी चाहिए; जैसे बीज में विशाल वृक्ष बनने की शक्ति होती है, वैसे ही हर व्यक्ति में अपार क्षमता छिपी होती है, जिसे सही मार्गदर्शन, परिश्रम और टीम की शक्ति से विकसित किया जा सकता है।
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