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धूप आने दो: हनुमान को सूर्यदेव से कैसे मिला ज्ञान, अचंभित करने वाली है पवनपुत्र की मेधा

Sun, 05 Nov 2023 06:52 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 05 Nov 2023 06:52 AM IST
सार

हनुमान के उत्साह और उनकी लगन से प्रभावित होकर सूर्य ने उन्हें समस्त ज्ञान प्रदान कर दिया। इस तरह, हनुमान जल्द ही चारों वेद, छहों दर्शन, चौंसठ कलाओं और एक सौ आठ तांत्रिक रहस्यों में पारंगत हो गए।

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Let sunshine come: How Hanuman got knowledge from Sun God, intelligence of Pawanputra surprising
हनुमान

विस्तार

हनुमान थोड़े बड़े हुए तो महर्षि अगस्त्य ने सुझाव दिया कि हनुमान को शिक्षा के लिए सूर्यदेव के पास जाना चाहिए क्योंकि सूर्यदेव प्रकाश और ज्ञान के सर्वोच्च स्रोत हैं। ग्रंथों में हनुमान द्वारा सूर्यदेव से शिक्षा प्राप्त करने की एक से अधिक कथाएं मिलती हैं।

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हनुमान जब सूर्यदेव के पास पहुंचे तो सूर्य ने पहले उन्हें टालना चाहा। वे बोले- ‘मैं अपने रथ में बैठकर निरंतर आकाश की परिक्रमा करता हूं। तुम्हें पढ़ाने के लिए मुझे रुकना पड़ेगा, जो कि असंभव है। इसलिए तुम्हें शिक्षा देना मेरे लिए संभव नहीं है।’ परंतु हनुमान भी निश्चय करके आए थे। वे हंसकर सूर्यदेव से बोले-‘आप परिक्रमा करते हुए ही मुझे ज्ञान दीजिए। मैं आपकी गति से आपके रथ के साथ चलूंगा। इससे आपको रुकना नहीं पड़ेगा और मेरी शिक्षा भी पूर्ण हो जाएगी।’
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आखिर सूर्यदेव को हनुमान की बात माननी पड़ी। हनुमान ने अपना आकार बढ़ाया और स्वयं सूर्य की कक्षा में स्थापित कर लिया। फिर वे सूर्य के रथ की ओर मुख करके उल्टा चलने लगे। हनुमान के उत्साह और उनकी लगन से प्रभावित होकर सूर्य ने उन्हें समस्त ज्ञान प्रदान कर दिया। इस तरह, हनुमान जल्द ही चारों वेद, छहों दर्शन, चौंसठ कलाओं और एक सौ आठ तांत्रिक रहस्यों में पारंगत हो गए। शिक्षा समाप्त हुई तो गुरु-दक्षिणा देने का समय आ गया।
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सूर्यदेव ने हनुमान से कहा कि विद्यार्थी का निष्ठावान होना ही पर्याप्त है। परंतु हनुमान ने जब दक्षिणा देने का हठ पकड़ लिया, तो सूर्यदेव ने हनुमान से अपने पुत्र सुग्रीव को सहयोग देने और उसकी देखभाल करने को कहा। इस तरह, हनुमान और सुग्रीव के बीच स्नेह-मैत्री का संबंध स्थापित हुआ। इस विषय में एक अन्य कथा यह है कि हनुमान जब शिक्षा पाने सूर्यदेव के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि वहां पहले से ही बहुत लोग मौजूद थे।

दरअसल, वे सब अंगूठे के आकार वाले बालखिल्य ऋषि थे, जो सूर्य की किरणों का सेवन करते हुए उनके रथ के साथ चलते हैं। हनुमान ने जब सूर्यदेव के रथ के साथ चलने की बात कही तो बालखिल्य ऋषियों को यह पसंद नहीं आया। वे कुपित हो गए और बोले–‘हम ऋषि हैं जबकि यह वानर निम्न श्रेणी का जीव है! हम इसके साथ चलकर सूर्य की परिक्रमा नहीं करेंगे!’

सूर्यदेव को ऋषियों के शाप का भय था, इसलिए वे कुछ नहीं कह पाए। परंतु हनुमान बलवान होने के साथ कुशाग्रबुद्धि भी थे। उन्होंने तुरंत इस समस्या को हल कर दिया और सूर्य के रथ के आगे चलने की तरकीब सोच ली, ताकि सूर्य से ज्ञान मिल जाए और बालखिल्य ऋषियों से उनकी दूरी बनी रहे। कहते हैं, लंबे समय तक सूर्य के आगे चलने से हनुमान का रंग सांवला हो गया था!

एक अन्य कथा के अनुसार, हनुमान इतने बुद्धिमान थे कि उन्होंने पंद्रह दिनों में सूर्यदेव से वेदों का समस्त ज्ञान प्राप्त कर लिया। हनुमान की असाधारण मेधा से अचंभित सूर्यदेव, अपने अद्भुत विद्यार्थी हनुमान को, जो भगवान शिव का अंश भी था, जल्दी छोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए वे जान-बूझकर हनुमान को अपनी दिव्य शक्ति से बीच-बीच में पाठ भुला दिया करते जिसके कारण हनुमान को पाठ फिर से पढ़ना पड़ता था।

इस तरह सूर्यदेव ने काफी समय तक हनुमान की शिक्षा पूर्ण नहीं होने दी और उनके सान्निध्य का आनंद लिया। हनुमान की विनयशीलता और निष्ठा से प्रसन्न सूर्यदेव ने वरदान दिया कि जो व्यक्ति हनुमान की नियमित रूप से उपासना करेगा, उसका ज्ञान कभी क्षीण नहीं होगा!

वेद और दर्शन का ज्ञान प्राप्त करके हनुमान अपने माता-पिता के पास लौट आए। फिर उन्होंने भगवान शिव से तंत्र-मंत्र-यंत्र व आध्यात्मिक रहस्यों का गूढ़ ज्ञान भी प्राप्त किया। कहा जाता है कि हनुमान को भक्ति योग, सांख्य योग और हठ योग की शिक्षा स्वयं भगवान विष्णु ने दी थी।


विष्णु के ही छठे अवतार परशुराम जी ने हनुमान को कुश्ती के अपराजेय रहस्य सिखाए थे। हनुमान थोड़े और बड़े हुए, तो वायुदेव ने उनकी शिक्षा का दायित्व अपने ऊपर ले लिया और उन्होंने हनुमान को प्राणायाम अर्थात् श्वास पर नियंत्रण का गूढ़ रहस्य तथा पक्षियों की भांति लंबी दूरी की छलांग लगाने का अद्भुत ज्ञान दिया। हनुमान, ज्ञान एवं तप में देवगुरु बृहस्पति के समतुल्य हैं। उनके इन्हीं विलक्षण गुणों के चलते उन्हें बल और बुद्धि, दोनों का दाता माना जाता है।

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