बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

कुरुक्षेत्रः अमेरिका को तो उसकी संस्थाओं ने बचा लिया बाकी देश अपनी चिंता करें

Vinod Agnihotri विनोद अग्निहोत्री
Updated Mon, 11 Jan 2021 03:36 PM IST

सार

भीड़ के हिंसक और अराजक होने का दौर भारत में 1967 में प. बंगाल से शुरू हुए हथियारबंद नक्सलवादी आंदोलन से शुरू हुआ जब वर्ग शत्रु के सफाए के नाम पर हथियारबंद वामपंथी नक्सलवादियों ने जन अदालतें लगाकर कथित सामंतों और अत्याचारी वर्ग शत्रुओं को त्वरित न्याय के नाम पर उन्हें गावों में भीड़ के द्वारा दंडित करवाना शुरू किया...
विज्ञापन
USA Capitol building
USA Capitol building - फोटो : PTI (File Photo)
ख़बर सुनें

विस्तार

छह जनवरी 2021 को संयुक्त राज्य अमेरिका में जो कुछ भी हुआ, वह न सिर्फ अमेरिका बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया के लोकतांत्रिक देशों के लिए एक चुनौती और सबक दोनों है। चुनौती इसलिए कि पिछले करीब एक दशक से दुनिया में सोशल मीडिया के जरिए जो माहौल बनाया गया है वह अब नेताओँ और उनकी विचारधारा के समर्थकों को अराजक और हिंसक भीड़ में तब्दील करता जा रहा है और अगर इस प्रवृत्ति पर कारगर रोक नहीं लगाई गई तो जो अब अमेरिका में हुआ है वह कल कई और लोकतांत्रिक देशों में भी देखने को मिल सकता है।
विज्ञापन


सबक इसलिए कि वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के परिसर और उसके दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव और सीनेट) के भवनों के भीतर घुसकर ट्रंप समर्थक हिंसक भीड़ ने अमेरिकी लोकतंत्र पर जो कालिख पोती है, देश को उससे शर्मसार होने से आधुनिक विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र की मजबूत संस्थाओं ने तो बचा लिया। लेकिन क्या दुनिया के दूसरे देशों की संस्थाएं इतनी मजबूत और रीढ़युक्त हैं कि ऐसा कोई दुर्भाग्यपूर्ण मौका अपने यहां आने पर मजबूती से बिना किसी दबाव में आए वही करेंगी, जो संविधान और न्याय सम्मत हो।


अमेरिका की लोकतांत्रिक परंपराओं एवं मूल्यों से पूरी दुनिया लोकतंत्र की प्रेरणा लेती है। भारतीय संविधान निर्माताओं ने भी देश में ब्रिटिश संसदीय प्रणाली पर आधारित संसदीय लोकतंत्र के साथ-साथ अमेरिकी संविधान और संस्थाओं से भी काफी कुछ लिया है। मसलन अमेरिकी संघीय व्यवस्था, स्वतंत्र सर्वोच्च न्यायालय, विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के बीच अधिकारों, कर्तव्यों के विभाजन की सीमा रेखा, अमेरिकी सीनेट की ही तरह भारतीय संघ के राज्यों का प्रतिनिधि करने वाली राज्यसभा (उच्च सदन) और मौलिक अधिकारों की अवधारणा अमेरिकी व्यवस्था से ही हमने ली हैं। इसका लाभ भी भारत को मिलता रहा है और भारतीय लोकतंत्र दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X