50 Years of ISRO: श्रीहरिकोटा से ही क्यों होते हैं सभी प्रक्षेपण?
देश अपना 73वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। एक समय पर सोने की चिड़िया कहलाए जाने वाले हमारे देश की बहुत सी बातें ऐसी हैं जिनपर हमें गर्व महसूस होता है। भारत को गौरवान्वित करने वाले संस्थानों में से एक है इसरो यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन। 15 अगस्त 2019 को इसरो भी अपनी 50वीं सालगिरह का जश्न मनाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का 1969 में गठन किया गया था।
इन वर्षों में, इसरो ने 60 तकनीकी विकास प्रक्षेपण, 87 भारतीय अंतरिक्ष शिल्प प्रक्षेपण, 8 छात्र उपग्रह प्रक्षेपण, दो प्रवेश मिशन और 23 देशों के 180 विदेशी उपग्रह श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किए हैं। इतना ही नहीं भारत के चांद पर पहुंचने के सपने को भी इसरो ने सफलतापूर्वक पूरा किया है। 2008 में चद्रयान 1 और 2019 में चंद्रयान 2 की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग ने भारत को नए मुकाम पर पहुंचाया है। ऐसे में ये जानना दिलचस्प होगा कि इसरो द्वारा किए जाने वाले प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से ही क्यों किए जाते हैं?
भारत का "स्पेसपोर्ट" श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश के पूर्वी तट पर एक स्पिंडल (धुरा-एक्सल) के आकार का द्वीप है। यह भारत का एकमात्र स्पेसपोर्ट है जहां से उपग्रह लॉन्च किए जाते हैं। आखिर किसी भी उपग्रह को श्रीहरिकोटा से ही क्यों लांच किया जाता है? आखिर वो क्या कारण हैं जो श्रीहरिकोटा को इतना खास बनाते हैं? आइए जानते हैं -
पूर्वी तट पर स्थित होने से इसे अतिरिक्त 0.4 km/s की गति (वेलोसिटी) मिलती है। ज्यादातर सैटेलाइट पूर्व की तरफ ही लॉन्च किए जाते हैं। इस जगह आबादी भी नहीं है। यहां इसरो के कर्मचारी और स्थानीय मछुआरे रहते हैं।
एक बार जब एक रॉकेट लॉन्च होता है तो वह निर्धारित पथ से भटक भी सकता है। ऐसी स्थिति आने पर उसे नष्ट करने का आदेश दिया जाता है। यह कमांड यानि आदेश रॉकेट को नष्ट या पूरी तरह से विघटित कर देता है और इसे समुद्र में गिरा देता है। यही वजह है कि समुद्र या रेगिस्तान के पास, बिना निवास वाले स्थानों को अंतरिक्ष बंदरगाहों के रूप में चुना जाता है। यही वजह है कि बंगाल की खाड़ी और पुलिकट झील से घिरा श्रीहरिकोटा एक आदर्श लॉन्च पैड है।
1969 में इस जगह को सैटेलाइट लॉन्चिंग स्टेशन के रूप में चुना गया। फिर 1971 में RH-125 साउंडिंग रॉकेट लॉन्च किया गया। पहला ऑर्बिट सैटेलाइट रोहिणी 1A था, जो 10 अगस्त 1979 को लॉन्च किया गया लेकिन खामी की वजह से 19 अगस्त को नष्ट हो गया। इन वर्षों में, इसरो ने 60 तकनीकी विकास प्रक्षेपण, 87 भारतीय अंतरिक्ष शिल्प प्रक्षेपण, 8 छात्र उपग्रह प्रक्षेपण, 2 पुन: प्रवेश मिशन और 180 विदेशी उपग्रह 23 देशों से श्रीहरिकोटा से लिफ्ट-ऑफ किए हैं।
कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कैनेडी स्पेस सेंटर के बाद, श्रीहरिकोटा दुनिया में दूसरा सबसे अच्छा स्पेसपोर्ट है। श्रीहरिकोटा स्पेस सेंटर नेशनल हाइवे पर है। सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन 20 किलोमीटर दूर है। इसका नजदीकी शहर सुल्लुर्पेता है, इसके पास रेलवे स्टेशन भी है। चेन्नई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से ये जगह 70 किलोमीटर दूर पड़ती है।