फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   KL Rahul: The new wicket keeper of Indian Cricket Team, Is he good behind stumps

केएल राहुल जैसी कीपिंग तो अच्छे-अच्छे स्पेशलिस्ट विकेटकीपर नहीं कर पाते

Shivendra Kumar Singh शिवेंद्र कुमार सिंह
Updated Mon, 27 Jan 2020 06:03 PM IST
विज्ञापन
KL Rahul: The new wicket keeper of Indian Cricket Team, Is he good behind stumps
केएल राहुल - फोटो : ट्विटर

साल 2020 की शुरुआत धमाकेदार हुई है। श्रीलंका के खिलाफ टी-20 सीरीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज भारतीय टीम जीत चुकी है। न्यूजीलैंड के दौरे पर भी पांच टी-20 मैचों में शुरुआती दो मैच जीतकर भारतीय टीम ने इरादा साफ कर दिया है कि इस बार टी-20 सीरीज में जीत हासिल करनी है। इस शानदार प्रदर्शन में एक खिलाड़ी का रोल बहुत बड़ा दिख रहा है। वो खिलाड़ी हैं केएल राहुल। केएल राहुल पर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि हाल ही में कप्तान विराट कोहली ने उन्हें विकेटकीपिंग का जिम्मा सौंपा।

विज्ञापन


ये वही ‘थ्योरी’ थी जो 2003 विश्व कप में कप्तान सौरव गांगुली ने अपनाई थी जब उन्होंने राहुल द्रविड़ को कीपिंग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी थी। कुछ ऐसा ही फैसला विराट कोहली ने किया जब ऑस्ट्रेलिया  के खिलाफ मैच के दौरान ऋषभ पंत को चोट लग गई। टीम मैनेजमेंट ने संजू सैमसन को आजमाया, लेकिन आखिरकार बात बनी जब केएल राहुल के हाथों में ग्लव्स आए।
विज्ञापन


अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे वन-डे को याद कीजिए। भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 341 रनों का लक्ष्य दिया था। इस लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरॉन फिंच को रवींद्र जडेजा ने आउट किया। डेविड वार्नर पहले ही आउट हो चुके थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


फिंच के आउट होने के बाद कंगारुओं की उम्मीदें कमजोर दिखने लगी। आखिर में भारत ने 36 रनों से मैच जीता। आरोन फिंच के विकेट पर चर्चा इसलिए जरूरी है क्योंकि जिस फुर्ती के साथ केएल राहुल ने उन्हें स्टंप किया उससे एक बात साफ हो गई। केएल राहुल को पार्टटाइम विकेटकीपर कहना अन्याय है। आज हम भी केएल राहुल की बल्लेबाजी की नहीं बल्कि उनकी कीपिंग की ही चर्चा करेंगे।

बतौर कीपर क्यों कामयाब हैं केएल राहुल

KL Rahul: The new wicket keeper of Indian Cricket Team, Is he good behind stumps
ऋषभ पंत और केएल राहुल - फोटो : ट्विटर

लेग साइज पर केएल राहुल की कैचिंग अच्छी है। इसके पीछे है उनका शानदार फुटवर्क। कहा जाता है कि एक अच्छा विकेटकीपर डाइव मारने की बजाए अपने फुटवर्क पर ज्यादा ध्यान देता है। यानी आसान भाषा में कहें तो गेंद की तरफ उछाल लगाने की बजाए तेज कदमों से गेंद तक पहुंचने की कोशिश करता है। केएल राहुल इस कसौटी पर खरे उतरते हैं। केएल राहुल का गिव-इन भी सटीक है। जिसकी वजह से गेंद उनके दस्ताने में आने के बाद उछलती नहीं है।

स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ भी केएल राहुल की रणनीति बहुत साफ है। वो स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ अपनी कीपिंग पोजीशन से थोड़ी देरी से उठते हैं। इस वजह से वो स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ गेंद ‘मिस’ नहीं करते हैं। केएल राहुल की कीपिंग में उनका सलामी बल्लेबाज होना भी  बड़ा रोल अदा करता है।

फॉर्मेट कोई भी हो सलामी बल्लेबाजों की एकाग्रता अलग ही होती है। उन पर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी होती है। वो विरोधी टीम के तेज तर्रार गेंदबाजों का सामना सबसे पहले करते हैं, जब गेंद बिल्कुल नई रहती है। पिच का मिजाज समझ से बाहर रहता है। ऐसे मुश्किल हालात में पारी की बेहतर शुरुआत के लिए तकनीक के साथ साथ सबसे ज्यादा एकाग्रता की जरूरत होती है। केएल राहुल की यही एकाग्रता उन्हें बेहतर कीपिंग में मदद करती है।

केएल राहुल के बयान में ही दिखती है कीपिंग की उनकी समझ

KL Rahul: The new wicket keeper of Indian Cricket Team, Is he good behind stumps
पंत-केएल राहुल - फोटो : सोशल मीडिया

विकेट के पीछे की जिम्मेदारी का पूरा आनंद उठा रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये नया लग रहा होगा और ऐसा लगता है कि जैसे मैंने कभी कीपिंग नहीं की, लेकिन ऐसा नहीं है। आईपीएल में अपनी टीम के लिए मैंने तीन-चार साल तक कीपिंग की है। मैने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी टीम के लिए ओपनिंग के साथ कीपिंग की है। मैं अब भी विकेट के पीछे की जिम्मेदारी को निभाते हुए खुश होता हूं। विकेट के पीछे रहने से मैं जान जाता हूं कि विकेट कैसा खेल रहा है। विकेट के बारे में अपनी समझ गेंदबाजों को बात बता सकता हूं। साथ में कप्तान को ‘फील्ड प्लेसमेंट’ में मदद कर सकता हूं। एक कीपर के तौर पर मेरी जिम्मेदारी सतर्क रह कर कप्तान को ये ‘मैसेज’ देने की होती है कि किस बल्लेबाज को कौन सी लेंथ पर गेंदबाजी की जानी चाहिए। विकेट के पीछे रहने से ये एक्सट्रा जिम्मेदारी होती है, इससे बल्लेबाजी में भी फायदा होता है। 20 ओवर तक कीपिंग करने के बाद आपको पता चल जाता है कि पिच पर कैसे शॉट्स खेलने हैं। मैं इस जिम्मेदारी का लुत्फ उठा रहा हूं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed