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झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर तीसरे गठबंधन की सुगबुगाहट

Thu, 17 Oct 2019 01:59 PM IST
Gautam Chaudhary गौतम चौधरी
Updated Thu, 17 Oct 2019 01:59 PM IST
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jharkhand legislative assembly election 2019 third front and politics nitish kumar babulal marandi
झारखंड विधानसभा चुनाव दिसंबर-जनवरी में हो सकते हैं। - फोटो : social media

झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट प्रारंभ हो गई है। राजनीतिक गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली झारखंड विकास मोर्चा एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला जनता दल (यूनाइटेड) के बीच गठबंधन की खबर तैरने लगी है।

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इस मामले में संयुक्त साम्यवादी गठबंधन के नेताओं का कहना है कि दोनों नेता अविश्वसनीय हैं। इन दोनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है, लेकिन कोई बड़ा गठबंधन बना तो साम्यवादी दल उस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।
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वामपंदी दलों के नेता चाहे कुछ भी कह लें, लेकिन साम्यवादी रणनीतिकार पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता के मुताबिक हमारा एक मात्र लक्ष्य प्रदेश में भाजपा को सरकार से बेदखल करना है, इसलिए हमें किसी भी प्रकार के गठबंधन से परहेज नहीं है लेकिन सम्मानजनक सीट मिलनी चाहिए।
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तीसरे मोर्चे का गणित और झारखंड 
इधर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठबंधन लगभग तय हो चुका है। दोनों पार्टियों ने हेमंत सोरेन को अपना नेता मान लिया है लेकिन अभी सीटों के बटवाड़े को लेकर गतिरोध है लेकिन इतना तय है कि दोनों पार्टियां आसन्न विधानसभा का चुनाव इकट्ठे लड़ेंगे।

इधर बाबूलाल मरांडी, जदयू और साम्यवादी एक साथ कोई गठबंधन बना सकते हैं। वैसे साम्यवादियों का कहना है कि हमें झामुमो वाले गठबंधन में यदि 15 सीटें मिल गईं तो हम उनके साथ चुनाव लड़ेंगे और 15 सीटें नहीं मिली तो हम लोग प्रदेश के 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।

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रघुबर दास के लिए आसान होगी सत्ता की राह - फोटो : Facebook

सूत्रों की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी से दो बार बात की है। हालांकि झारखंड विकास मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के निजी सचिव राजेन्द्र तिवारी ने इस बात का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।

गठबंधन को लेकर जनता दल (यू) के झारखंड प्रदेश महासचिव श्रवन कुमार कहते हैं कि विगत् 9 जून को पटना में हुए राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठम में यह तय हुआ था कि हमलोग प्रदेश के सभी 81 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन राजनीति में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई बात नहीं है। हमलोग सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित 
जानकार बताते हैं कि बाबूलाल मरांडी से नीतीश कुमार की गठबंधन को लेकर बात हुई है। दोनों नेता इस बात पर एकमत हैं कि साथ-साथ चुनाव लड़ें लेकिन मरांडी के टीम के लोग नीतीश कुमार पर भरोसा करने से हिचक रहे हैं। हालांकि बाबूलाल मरांडी ने गठबंधन को लेकर अभी तक ना नहीं बोला है लेकिन गठबंधन के लिए उन्होंने हां भी नहीं कहा है।
 

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क्या नीतीश कुमार पार्टियों के लिए होंगे भरोसेमंद - फोटो : Facebook

बाबूलाल की टीम के नेताओं का कहना है कि जनता दल (यू) का झारखंड में वजूद नहीं है। इसलिए उनको जमीन उपलब्ध कराना ठीक नहीं होगा। दूसरी बात यह है कि नीतीश कुमार के बारे में यह बात स्थापित हो चुकी है कि वे अपने हितों को लेकर किसी भी दल का समर्थन कर सकते हैं, यहां तक कि भाजपा का भी समर्थन करने में वे नहीं हिचकेंगे, जबकि बाबूलाल मरांडी का भाजपा के साथ छत्तीस का आंकड़ा है। इसी मुद्दे पर बात अटकी हुई है।

क्या हैं राज्य के सियासी हाल?  
झारखंड में तीन राजनीतिक गठबंधनों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। एक खेमे में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और स्वदेश महतो के नेतृत्व वाली आजसू है, दूसरे खेमे में कांग्रेस एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा है, जबकि तीसरे खेमे में संयुक्त वामपंथी दल हैं। वामपंथी दलों के बारे में भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश कार्यालय सचिव अजय कुमार कहते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर हमारा गठबंधन पांच वाम दलों के साथ है।

अजय बताते हैं- इस गठबंधन में भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कॉम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), आरएसपी और फारवर्ड ब्लाक इकट्ठे हैं। इसके अलावा झारखंड में स्थानीय स्तर पर मार्क्सवादी समन्वय समिति एवं एसयूसीआई को भी साथ लिया गया है।

हम सभी वाम दल पूरे प्रदेश में 50 से लेकर 60 सीटों पर चुनाव लड़ेने की योजना बना रहे हैं। हालांकि अजय ने यह भी बताया कि यदि कोई विश्वसनीय गठबंधन बना तो हम उसका अंग हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसकी संभावना नहीं दिख रही है। जहां तक बाबूलाल जी और नीतीश जी का सवाल है तो दोनों नेता विश्वास के लायक नहीं हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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