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जीवन धारा: विज्ञान अनुशासन भी सिखाता है; प्रकृति भी हर दिन हमें धैर्य का पाठ पढ़ाती है

Sat, 23 May 2026 09:06 AM IST
Pavan शिवदान सिंह
शिवदान सिंह Published by: Pavan Updated Sat, 23 May 2026 09:06 AM IST
सार

विज्ञान हमें केवल तथ्य नहीं देता, बल्कि अनुशासन, विनम्रता और सत्य के प्रति सम्मान भी सिखाता है। इसी तरह पेड़, मिट्टी, बीज और ऋतुओं की शक्ल में प्रकृति भी हर दिन हमें धैर्य का पाठ पढ़ाती रहती है।

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Jeevan Dhara: Science also teaches discipline; nature also teaches us patience every day.
विज्ञान अनुशासन भी सिखाता है - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

विज्ञान ने मुझे सिखाया है कि दुनिया उतनी सरल नहीं है, जितनी वह पहली नजर में दिखाई देती है। यहां हर उत्तर के पीछे एक और प्रश्न छिपा होता है, हर खोज के भीतर एक दूसरा रहस्य छिपा होता है। और यही जीवन की सबसे सुंदर बात भी है कि मनुष्य अपनी खुशी किसी खोज में भी ढूंढ सकता है। क्योंकि, जब कोई व्यक्ति किसी नई सच्चाई को समझने की कोशिश करता है, जब वह प्रकृति के किसी छोटे-से संकेत को ध्यान से समझता है, तब उसके भीतर एक ऐसी जिज्ञासा जन्म लेती है, जो अधिक स्थायी होती है।
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 विज्ञान केवल प्रयोगशाला की ठंडी दीवारों में बंद विषय नहीं है, बल्कि यह संवेदनाओं, धैर्य और स्मृतियों का जीवंत संसार है। इसलिए, हमें अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण चीज व क्षण को लिख लेना जरूरी हो जाता है, क्योंकि समय किसी का इंतजार नहीं करता है। वह हमें लोगों से दूर कर देता है और हमारी यादों को धुंधला बना देता है। तब, लिखे गए शब्द ही हमारे सच्चे गवाह बनते हैं। जो लिखा गया, वही भविष्य तक पहुंचता है, जो अनकहा रह गया, वह धीरे-धीरे खो जाता है। शायद यही कारण है कि कोई वैज्ञानिक शब्दों को उतनी ही गंभीरता से चुनता है, जितनी तसल्ली से कोई कवि अपनी कविता के लिए भाव का चयन करता है।
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विज्ञान हमें केवल तथ्य नहीं देता, बल्कि अनुशासन, विनम्रता और सत्य के प्रति सम्मान भी सिखाता है। संवेदनशील होना कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी शक्ति है। पेड़, मिट्टी, बीज और ऋतुओं की शक्ल में प्रकृति हर दिन हमें धैर्य का पाठ पढ़ाती है। एक बीज वर्षों तक अंधेरे में रहकर भी सही समय आने पर अंकुरित हो जाता है। ठीक वैसे ही मनुष्य के भीतर के सपने भी कभी व्यर्थ नहीं जाते। जीवन में सबसे सुंदर लोग वही होते हैं, जो सीखना कभी बंद नहीं करते, जो बार-बार टूटने के बाद भी अपनी जिज्ञासा को बनाए रखते हैं, और जो अपने अनुभवों को शब्दों में बदलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए रोशनी छोड़ जाते हैं।
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