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जीवन धारा: जीवन की भी तो हमसे अपेक्षाएं हैं
Tue, 25 Aug 2026 06:20 AM IST
निर्मल कांत
विक्टर ई फ्रैंकल
विक्टर ई फ्रैंकल
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:20 AM IST
सार
जीवन विश्वविद्यालय की परीक्षा की तरह नहीं है, जहां सभी को एक ही प्रश्न-पत्र मिलता है। जीवन में हर मनुष्य के सामने अलग-अलग सवाल होते हैं। उनका उत्तर दे पाने वाला ही जीवन को सार्थक बना पाता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
मनुष्य जीवन के सामने अक्सर एक याचक की तरह खड़ा रहता है। वह पूछता है- मुझे क्या मिलेगा, सुख कब मिलेगा, कामयाबी क्यों नहीं मिली, या मेरे साथ बुरा क्यों हुआ...आदि। वह जीवन से जवाब चाहता है, जैसे जीवन उसके सवालों का कर्जदार हो। तजुर्बों ने मुझे कुछ और सिखाया है। मैंने ऐसे लोग देखे, जिनसे उनकी संपत्ति छीन ली गई, और यहां तक कि उनका नाम व पहचान भी छीन ली गई। मैं ऐसे लोगों से मिला, जिनके पास भविष्य को लेकर कोई सपना या निश्चितता नहीं थी। यह भी देखा कि उन्हीं परिस्थितियों में कुछ लोग टूट गए, जबकि कुछ लोग भीतर से और मजबूत हो गए। तब मुझे समझ आया कि जीवन को समझने का तरीका बदलना होगा। हम जीवन से सवाल पूछने वाले नहीं हैं। वास्तव में जीवन ही हमसे सवाल पूछ रहा है।
हर सुबह जब हम जागते हैं, तो जीवन हमारे सामने एक मौन सवाल रखता है कि आज तुम क्या करोगे, दिन को कैसे सार्थक बनाओगे, जो परिस्थितियां तुम्हें मिली हैं, उनका जवाब कैसे दोगे?
जीवन किसी विश्वविद्यालय की परीक्षा की तरह नहीं है, जहां सभी को एक ही प्रश्न-पत्र मिलता है। जीवन में तो हर मनुष्य के सामने अलग-अलग सवाल होते हैं। किसी से जीवन प्रेम के माध्यम से जवाब मांगता है, तो किसी से कर्तव्य और किसी से दुख के माध्यम से जवाब मांगता है। यही कारण है कि जीवन का अर्थ कोई सार्वभौमिक सूत्र नहीं हो सकता। लोगों ने मुझसे पूछा कि जीवन का अर्थ क्या है? मैं कहता हूं कि यह सवाल वैसा ही है, जैसे कोई शतरंज का खिलाड़ी पूछे कि सबसे अच्छी चाल कौन-सी है? इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि खेल की स्थिति क्या है। उसी प्रकार जीवन का अर्थ भी हर व्यक्ति और हर क्षण के लिए अलग-अलग होता है। यह अर्थ खोजा नहीं जाता, बल्कि पहचाना जाता है। कभी-कभी जीवन हमसे साहस की अपेक्षा करता है। जब सब कुछ अनुकूल हो, तब साहसी होना आसान है। परंतु, जब चारों ओर अंधकार हो, फिर भी मनुष्य अपने भीतर उम्मीद की छोटी-सी लौ को बचाए रखे, तब वह जीवन के सवाल का उत्तर दे रहा होता है। इसी तरह कभी-कभी जीवन हमसे धैर्य की अपेक्षा करता है। हम हर पीड़ा को तुरंत समाप्त नहीं कर सकते। कुछ जख्म समय मांगते हैं। कभी-कभी जीवन हमसे प्रेम की अपेक्षा करता है। प्रेम स्वयं में जीवन के सवाल का एक जवाब है।
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मैं कहूंगा कि जीवन को अदालत की तरह मत देखो, जहां लोग शिकायतें दर्ज कराते हैं। जीवन को एक जिम्मेदारी की तरह देखो। जीवन हमसे यह नहीं पूछेगा कि हमने कितना सुख पाया, कितना धन कमाया, बल्कि वह पूछेगा कि क्या तुमने उस अर्थ को पूरा किया, जो तुम्हारे हिस्से में आया था? क्या तुमने उस उत्तरदायित्व को स्वीकार किया, जो केवल तुम्हारा था? और यदि हम ईमानदारी से हां कह सकें, तो चाहे हमारा जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो, वह सार्थक होगा।
सूत्र:जिम्मेदार बनें
जीवन से शिकायतें करने के बजाय उसे एक जिम्मेदारी की तरह स्वीकार करें। हर परिस्थिति आपके सामने एक नया सवाल रखती है और साहस, धैर्य, प्रेम तथा कर्म ही उसका उत्तर है। कठिनाइयां आपको तोड़ने नहीं, भीतरी शक्ति की पहचान कराने आती हैं। जीवन का अर्थ सुख, धन या सफलता में नहीं, बल्कि उस उत्तरदायित्व को ईमानदारी से निभाने में है।
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हर सुबह जब हम जागते हैं, तो जीवन हमारे सामने एक मौन सवाल रखता है कि आज तुम क्या करोगे, दिन को कैसे सार्थक बनाओगे, जो परिस्थितियां तुम्हें मिली हैं, उनका जवाब कैसे दोगे?
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जीवन किसी विश्वविद्यालय की परीक्षा की तरह नहीं है, जहां सभी को एक ही प्रश्न-पत्र मिलता है। जीवन में तो हर मनुष्य के सामने अलग-अलग सवाल होते हैं। किसी से जीवन प्रेम के माध्यम से जवाब मांगता है, तो किसी से कर्तव्य और किसी से दुख के माध्यम से जवाब मांगता है। यही कारण है कि जीवन का अर्थ कोई सार्वभौमिक सूत्र नहीं हो सकता। लोगों ने मुझसे पूछा कि जीवन का अर्थ क्या है? मैं कहता हूं कि यह सवाल वैसा ही है, जैसे कोई शतरंज का खिलाड़ी पूछे कि सबसे अच्छी चाल कौन-सी है? इसका जवाब इस पर निर्भर करता है कि खेल की स्थिति क्या है। उसी प्रकार जीवन का अर्थ भी हर व्यक्ति और हर क्षण के लिए अलग-अलग होता है। यह अर्थ खोजा नहीं जाता, बल्कि पहचाना जाता है। कभी-कभी जीवन हमसे साहस की अपेक्षा करता है। जब सब कुछ अनुकूल हो, तब साहसी होना आसान है। परंतु, जब चारों ओर अंधकार हो, फिर भी मनुष्य अपने भीतर उम्मीद की छोटी-सी लौ को बचाए रखे, तब वह जीवन के सवाल का उत्तर दे रहा होता है। इसी तरह कभी-कभी जीवन हमसे धैर्य की अपेक्षा करता है। हम हर पीड़ा को तुरंत समाप्त नहीं कर सकते। कुछ जख्म समय मांगते हैं। कभी-कभी जीवन हमसे प्रेम की अपेक्षा करता है। प्रेम स्वयं में जीवन के सवाल का एक जवाब है।
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मैं कहूंगा कि जीवन को अदालत की तरह मत देखो, जहां लोग शिकायतें दर्ज कराते हैं। जीवन को एक जिम्मेदारी की तरह देखो। जीवन हमसे यह नहीं पूछेगा कि हमने कितना सुख पाया, कितना धन कमाया, बल्कि वह पूछेगा कि क्या तुमने उस अर्थ को पूरा किया, जो तुम्हारे हिस्से में आया था? क्या तुमने उस उत्तरदायित्व को स्वीकार किया, जो केवल तुम्हारा था? और यदि हम ईमानदारी से हां कह सकें, तो चाहे हमारा जीवन कितना भी कठिन क्यों न हो, वह सार्थक होगा।
सूत्र:जिम्मेदार बनें
जीवन से शिकायतें करने के बजाय उसे एक जिम्मेदारी की तरह स्वीकार करें। हर परिस्थिति आपके सामने एक नया सवाल रखती है और साहस, धैर्य, प्रेम तथा कर्म ही उसका उत्तर है। कठिनाइयां आपको तोड़ने नहीं, भीतरी शक्ति की पहचान कराने आती हैं। जीवन का अर्थ सुख, धन या सफलता में नहीं, बल्कि उस उत्तरदायित्व को ईमानदारी से निभाने में है।