मिशन चंद्रयान-3 की कामयाबी और इसरो के बढ़ते कदम: हम चांद के अंगना उतरे
चांद की धरा पर भेजे हमारे स्मार्ट दूत वहां के वातावरण का अध्ययन करेंगे, जमीन को जानेंगे, जानकारियां जुटाएंगे। कोई वहां के रसायन को समझेगा और कोई कई अहम सुराग बटोर कर हम तक भेजेगा और उनमें से कई राज ऐसे होंगे जो हमें चौंका सकते हैं।
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चांद का माथा चूमा या ठोड़ी को छू लिया। तकनीकी पक्ष मैं नहीं जानती पर चंद्रयान-3 के चांद से अभिस्पर्श करते ही मन के भीतर और तन के बाहर बहुत कुछ हुआ, रोंगटे खड़े हुए, पलकें छलक गई, आंखें चमक गई। रोम-रोम में स्फुरण हुआ और इसी के साथ चंद्रयान 2 की विफलता का भी स्मरण हुआ।
हमारे सुयोग्य वैज्ञानिकों की टीम ने कोशिश की.. करते रहे। अपने इरादों पर अडिग रहे और हमने कोशिश करने से मिलने वाली कामयाबी को देखा। हमने सफलता को मुस्कुराते हुए देखा। चांद पर लिखे गाने याद किए गए। शायरियां निकल आई, फिल्में, किताबें, लेख, निबंध सब सामने आए। विज्ञान और धर्म का सुंदर सुखद संयोजन हमारी चर्चा का विषय बना। ज्योतिष की गणना, चंद्रमा की उत्पत्ति, इतिहास,अस्तित्व सब खंगाला गया। चंद्र, मून, आफताब, चंद्रमा, शशि, मयंक, शशांक, सुधांशु सारे नामों के साथ चांद हर लेखनी की नोंक पर झिलमिला उठा।
चांद को पाने के लिए चांद तक जाने के लिए चांद जैसा ही धैर्य, शीतलता और मन की शांति चाहिए थी जो हमारे वैज्ञानिक साथियों में थी। अब आप फिर देखिएगा उन खिलखिलाते चमकते चेहरों को, अथक परिश्रम से आंखों के नीचे आए उनके स्याह घेरों को, कितने लोग, कितने दिमाग, कितने दिल, कितनी रातें, कितने दिन, कितने पल कितने अनुपल, कितने ख्वाब कितने ख्याल, सब कुर्बान हुए होंगे। कितने सपने चटके होंगे, बुरे विचार भी फटके होंगे। पर अपने संयम और संकल्प को थामे रखकर बस एक ही शब्द, एक ही भाव, एक ही विचार, एक ही तस्वीर को संजोया होगा चंद्रयान और सिर्फ चंद्रयान।
14 जुलाई के दिन भी धड़कन तेज रही होगी और 23 अगस्त को भी दिल में अकुलाहट हुई होगी। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर निगाहें रही होंगी। पहला देश बनने के गौरव की खुशी क्षण भर में चूर भी हो सकती थी, लेकिन धीरज को मुठ्ठी में बांधे इसरो के वैज्ञानिकों की ट्रैनिंग देखिए कि वे कितनी तल्लीनता से कर्मरत थे। जरा आंखें खोलिए। रख दीजिए मोटिवेशनल किताबों और वीडियोज की लिंक और देखिए कि अपने ही आसपास से कितना कुछ सीखा जा सकता है।
अब जबकि विक्रम और प्रज्ञान व रंभा जैसे इसरो के नन्हे जादूगर चांद के आंगन में है तब 4 साल और 40 दिनों की लम्बी यात्रा को भी याद किया जाना चाहिए।
बहरहाल, चांद की धरा पर भेजे हमारे स्मार्ट दूत वहां के वातावरण का अध्ययन करेंगे, जमीन को जानेंगे, जानकारियां जुटाएंगे। कोई वहां के रसायन को समझेगा और कोई कई अहम सुराग बटोर कर हम तक भेजेगा और उनमें से कई राज ऐसे होंगे जो हमें चौंका सकते हैं। आखिर जल, जीवन या जड़ता क्या होगा वहां?
चंद्रयान अभियान की सबसे कठिन घड़ी थी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाकर छोड़ना और दूसरी मुश्किल घड़ी चांद पर उसे लैंड कराना थी। आखिर 4 साल की सोची और संजोई चमत्कारी सफलता ने सभी शामिल वैज्ञानिकों के साथ देशवासियों के चेहरे भी चमका दिए और एक आश्चर्यजनक पल के हम सब साक्षी हुए। अब बस दुआ कीजिए कि हम चांद के अंगना उतरे, जल्दी ही ऐसी रैन मिले।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।