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IPL 2019: गौतम गंभीर की भविष्यवाणी हुई सटीक, 12 साल में इसलिए नहीं जीती कोहली की बैंगलोर

Amitabh Srivastava अमिताभ श्रीवास्तव
Updated Wed, 10 Apr 2019 02:05 PM IST
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ipl 2019 gautam gambhir on virat kohli royal challengers bangalore mahendra singh dhoni
विराट कोहली और गौतम गंभीर के बीच मनमुटाव रहे हैं। - फोटो : अमर उजाला

बेशक विराट कोहली क्रिकेट के वर्तमान दौर के सबसे सफल खिलाड़ी हैं, किन्तु इंडियन टी20 लीग उनके करियर में चांद के धब्बे की तरह है। वे पिछले आठ इंडियन टी20 लीग के संस्करणों से रॉयल चैलेंजर्स बेंगलौर की कप्तानी कर रहे है, लेकिन उनके नेतृत्व में टीम एक बार भी ट्रॉफी चूम नहीं सकी है।

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इंडियन टी20 लीग का वर्तमान यानी 12वां संस्करण तो मानो कोहली के सिर पर रखे स्वर्ण मुकुट में कांटे बोने का काम कर रहा है। चारो तरफ कोहली की लगातार छह पराजयों की चर्चा है, उनकी आलोचनाएं हैं और कोहली के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ऐसा लगता है मानों विराट कोहली अपने सबसे बुरे दौर में प्रविष्ट कर चुके हैं। हालांकि हर खिलाड़ी का बुरा समय आता है, किन्तु जब इंडियन टी20 लीग की बात हो और वो भी ऐसी टीम की जिसमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी खेल रहे हों तो एक अदद  जीत के लिए टीम का तरसना उसके कप्तान की प्रतिभा को चकनाचूर करने जैसा है।  
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क्या कोहली को लेकर सही कहा था कभी गंभीर? 
इंडियन टी20 लीग शुरू होने से पहले भारतीय क्रिकेट के भूतपूर्व  खिलाड़ी गौतम गंभीर ने विराट कोहली को लेकर बयान दिया था और विवादित भी हुए थे क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरे को लगभग सफलतापूर्वक समाप्त कर कोहली स्वदेश लौटे थे। गंभीर ने उनकी कप्तानी पर सवाल उठाया था जिसका जवाब भी कोहली ने बिना उनका नाम लिए दिया था। लेकिन आज जब गंभीर की तमाम बातें साकार हो रही हैं, तो कोहली के पास कोई जवाब नहीं है। 
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यही वजह है कि गंभीर अपनी बातों पर न केवल अधिक विश्वस्त हुए हैं बल्कि खुलकर बोलने भी लगे हैं कि कोहली खिलाड़ी अच्छे हैं किन्तु उनमें नेतृत्व क्षमता का अभी अभाव है। सिर्फ गौतम गंभीर ही नहीं बल्कि अब तो लगभग हर बड़ा क्रिकेट समीक्षक,पूर्व खिलाड़ी उनको कोसने लगा है। खुद कोहली भी हैरान हैं। जाहिर है जब कोई खिलाड़ी खुद ही अपनी पराजयों को लेकर हैरान होने लगता है, तब जरूरी हो जाता है कि उसकी असफलताओं का पोस्टमार्टम किया जाए जिससे पता चल सके कि क्रिकेट दुनिया के इस बेताज बादशाह को हुआ क्या है?

तो आखिर ऐसा हो क्यों रहा है? 
दिग्गज खिलाड़ियों से भरी उसकी टीम के बावजूद वो लगातार क्यों हार रहा है? क्या उसकी टीम के खिलाड़ी उसका साथ नहीं दे रहे ? या कि वो सचमुच कप्तानी में अभी कच्चा है? वैसे तो कोहली को इन सारे सवालों का जवाब मैदान में ही देना होगा, अपनी नेतृत्व शक्ति से या अपने बल्ले से।

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क्या विराट कोहली एक कप्तान के रूप में सफल हैं? - फोटो : फाइल फोटो

क्या धोनी के बिना कोहली अधूरे हैं? 
दरअसल, महेंद्र सिंह धोनी ने जब एकदिवसीय और टी ट्वेंटी फार्मेट वाले क्रिकेट से संन्यास लिया तो उसकी जिम्मेदारी विराट को दी गई। विराट के बेहतरीन खेल और उनकी आक्रामकता को देखते हुए ही ये जिम्मेदारी उन्हें मिली थी। क्रिकेट प्रेमियों को विराट से न केवल धोनी की पूर्ति बल्कि अपनी टीम को लगातार जितवाने जैसी अपेक्षाएं बंध गई थी।  मगर ऐसा होता नहीं दिखा।

टेस्ट मैचों में विराट जीत रहे थे क्योंकि उनके पास धोनी एक खिलाड़ी के रूप में थे जो उन्हें लगातार बीच मैचों में सलाह देते हुए दिखते रहे, कभी तो ये लगने लगा और ये सच भी है कि धोनी की सलाह विराट की जीतो का कारण बन रही है।

इधर वनडे या टी 20 में विराट धोनी के बगैर अधूरे जान पड़े। हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे की सीरीज के आखिरी तीन मैच भारत ने धोनी के बिना खेले थे जिसमें कंगारू जीत गए थे। उसके बाद वो आईपीएल में आरसीबी की कप्तानी लेकर मैदान में उतरे और लगातार 6 मैचों में जीत का खाता तक नहीं खोल सके। तो ये बात उठाना लाजिमी है कि क्या धोनी के बिना कोहली अधूरे हैं? ऐसे में उनकी आलोचना करने वालों को पंख लगना स्वभाविक ही था और ये कोई गलत आलोचना भी प्रतीत नहीं होती। 

क्या कोहली को  लेकर गौतम गंभीर की भविष्याणी?   
बाएं हाथ के ओपनर और कोलकाता नाइट राइडर्स को वर्ष 2012 और 2014 में दो बार कप जिताने वाले कप्तान गौतम गंभीर ने स्पष्ट कहा कि कोहली भाग्यशाली हैं कि कप्तान के तौर पर पिछले आठ साल से टीम को खिताब नहीं दिला पाने के बावजूद वे  रॉयल चैलेंजर बेंगलोर के साथ बने हुए हैं। गंभीर ही नहीं बल्कि पूर्व अंग्रेज खिलाड़ी माइकल वॉन ने तो कोहली को आराम की सलाह तक दे डाली।

कोहली को लेकर इंडियन टी20 लीग कमेंट्री बॉक्स में बैठे सुनील गावस्कर हों या आकाश चोपड़ा या कोई भी समीक्षक एक तरह से सबके मन में कोहली की नेतृत्व अक्षमता का ख्याल ही आता है। हालांकि इन समीक्षकों ने सीधे तौर पर उनकी आलोचना नहीं की है किन्तु सवाल तो उठाए ही हैं कि ऐसा क्या हो गया कोहली को ? 

गंभीर और माइकल वान के तब अधिक विचारणीय हो जाते हैं जब हम इतिहास में झांकते हैं तो वहां कोहली से बड़े खिलाड़ी भी खराब कप्तानी के कारण हटे हैं। जैसे सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर। किन्तु क्या कोहली इनसे भी महान हैं, जो अब तक फ्रेंचाइजी की कप्तानी कर रहे हैं? प्रश्न खड़ा हो उठता है। कोहली को आरसीबी की कप्तानी क्यों दी जा रही है।

दरअसल, ये बाज़ार का मामला है। इस समय कोहली एक संसेशन हैं, बाज़ार में उनका मोल सबसे ज्यादा है। उनके रहते आरसीबी को भी ज्यादा लाभ है इसलिए उन्हें हटाने से पूर्व फ्रेंचाइजी को दस बार सोचना होगा। 

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क्या धोनी के बिना असफल हैं कोहली? - फोटो : फाइल फोटो

क्या कोहली की सफलता के लिए जरूरी हैं धोनी? 
बहरहाल, ये अलग मामला है। प्रश्न तो ये कि क्या धोनी के बिना कोहली अधूरे हैं। ये एक सच बात है। कभी शेनवार्न और बिशन सिंह बेदी ने भी कहा था कि कोहली धोनी के बिना आधे कप्तान हैं तो इसी वजह से कि टीम जब भी दबाव में होती है तो विराट कोहली को धोनी की सलाह उबार लेती है। धोनी में मैदान की सूझ-बूझ के साथ साथ फील्डिंग जमाने और किस गेंदबाज को कब उतारने जैसा अद्भुत कौशल है, उनमें रिस्क लेने का दमखम भी ज्यादा है और विराट धोनी पर आश्रित रहकर निसंकोच रिस्क ले लेते हैं जो अक्सर कामयाब हो जाती है। 

जब विराट को अकेले कप्तानी करनी होती है तब वे भी पूरी तरह अकेले जान पड़ते हैं।  मैदान में त्वरित और दबाव में बेहतर फैसले लेने के मामले में विराट सचमुच कमजोर दिखते हैं। यही वजह है कि दिग्गज खिलाड़ियों से सजी उनकी टीम इंडियन टी20 लीग में लगातार छह मैच हार चुकी है। 

तो क्या हैं कोहली की कमियां? 
दूसरी तरफ गौर करें तो पाएंगे कि विराट की कप्तानी में वैरिएशन का अभाव है। लगातार हार के बाद भी वे एक ही बल्लेबाजी क्रम के साथ मैदान पर उतर रहे हैं। अन्य बल्लेबाजों के क्रम को भी साध नहीं पा रहे और गेंदबाजी तो वैसे भी टीम की लंबे समय से कमजोरी रही है। गेंदबाजी रोटेशन में एक कप्तान की खूबी साफ़ झलकती है किन्तु कोहली इसमें भी कुछ खास चालबाज साबित नहीं हुए हैं।

वहीं दूसरी टीमों के कप्तानों को यदि देखें तो वे अलग स्तर पर प्रयोग करते नजर आते हैं जैसे केकेआर के दिनेश कार्तिक गेंदबाज सुनील नरायन से ओपन करवा देते हैं। धोनी अंतिम समय पर जिस गेंदबाज से अपेक्षा न हो उसे गेंद थमा देते हैं।  

विराट में क्यों नहीं है रोटेशन? 
इधर, रोहित शर्मा फील्डिंग बदलते रहते हैं। कोहली में अभी तक ऐसा कोई  बोल्ड निर्णय देखने में नहीं आया जो उन्होंने बीच मैच में लिया हो। अब यदि उनकी पिछली टीम के  एक बड़े  बल्लेबाज क्रिस जेल की बात करें तो कोहली को उनकी कमी निश्चित रूप से अखर रही होगी। गेल इस वक्त पूरे फॉर्म में हैं किन्तु वे इस बार पंजाब की तरफ से खेल रहे हैं। कोहली के दूसरे विश्वस्त खिलाड़ी एबी डीविलियर्स तो उनके पास हैं, मगर उनका वैसा प्रदर्शन देखने को नहीं मिल पाया है जैसी उनकी ख्याति है। 

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद वे थोड़े कमजोर हुए लगते हैं। पार्थिव पटेल टाइप्ड प्लेयर होकर रह गए हैं। यजुवेंद्र चहल जैसे स्पिनर भी कोहली के पास है मगर वही बात आ जाती है विकेट के पीछे से चहल को कैसे गेंदबाजी करनी है कोई दिशा नहीं दिखाई जाती जो धोनी दिखाते हैं। मोईन अली , शिमरॉन हेटमायर , ग्रैंडहोम, स्टोइनिस जैसे बल्लेबाजों को टिककर टीम को आधार देने की पट्टी शायद विराट कोहली नहीं पढ़वा पा रहे हैं। यही वजहें हैं कि जीत बिन सूने खेत को विराट अकेले न जोत  पा रहे हैं न ही सिंचाई कर पा रहे हैं, ऊपर से आलोचना के शिकार बनते जा रहे हैं। 

विराट में जो निराशा दिख रही है वो आसन्न विश्वकप के लिए हानिकारक साबित हो सकती है, मगर जैसा कि कहा जाता है यहां खेलना और देश की टीम के लिए खेलना दो अलग-अलग बात है, फिर विश्वकप टीम में तो उनके साथ महेंद्र सिंह धोनी भी होंगे, इसलिए उम्मीदें इंडियन टी20 लीग की इन पराजयों से तोड़ी न जाए बल्कि बनाई रखी जाए कि टीम इंडिया विश्वकप जीत सकती है।  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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