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विश्व योग दिवस 2019: योग के लिए कितना सावधान रहने की है जरूरत

Fri, 21 Jun 2019 08:07 AM IST
Pankhuri Singh पंखुड़ी सिंह
Updated Fri, 21 Jun 2019 08:07 AM IST
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international yoga day 2019 people should avoid modify certain yoga poses

योगश्चित्त वृत्ति निरोधः महर्षि पतंजलि के योग शास्त्र, योग सूत्र का यह भाव योग के बारे में केवल बाहरी चित्र नहीं खींचता बल्कि योग को आंतरिक रूप से भी व्याख्या करता है। दअरसल, योग केवल एक शारीरिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि यह व्यक्ति अथवा योग करने वाले की मानसिक अवस्था को भी नियंत्रित करता है। यही वजह है कि महर्षि पतंजलि ने योग को मनुष्य के अंतःकरण में चित्त में उठने वाली वृत्त्तियों और प्रवृत्तियों के निषेध के रूप में भी व्याख्यायित किया है। जानकर मानते हैं की योग और योगासनों को केवल कुछ शारीरिक अवस्थाओं तक ही सीमित नहीं माना जा सकता। कहा जाता है योग के आसनों कि संख्या असंख्य है और इस पृथ्वी पर जलचर, थलचर और उभयचर जितने भी प्राणी या जीवजंतु हैं और जैसी उनकी आकृति है उतने तरह के योगासन माने गए हैं। 

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योग को लेकर सही रूप से जागरूक हुए हैं हम
बहरहाल, बीते एक दशक में भारत में योग को लेकर ना केवल जागरूकता अभियान चले हैं बल्कि समाज के हर तबके ने इसे बदलती जीवन शैली के चलते अपनाया भी है। लेकिन भारत ने अब भी कुशल योग प्रशिक्षकों की संख्या में कमी हैं। यदि वो हैं भी तो समाजिक रूप से योग को लेकर लोग इतने जागरूक नहीं है कि वह पैसा देकर एक कुशल प्रशिक्षक नियुक्त करें। ऐसे में योग दिवस पर केवल खानापूर्ति के लिए लोग योग करते हैं और कई बार तो कुछ देर का फोटोसेशन सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो जाता है।
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दरअसल, योग को लेकर कई तरह की सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। वो लोग जिन्हें अस्थमा , पीठ दर्द, कार्पल टनल सिंड्रोम, सिर दर्द, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, गर्दन दर्द, कंधे की चोट की शिकायत हो, या गर्भवती महिलाओं को योग करने के लिए खास सलाह दी जाती है। ऐसे लोगों को कुछ योगासन खासकर नहीं करने चाहिए। 

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रेनू प्रकाश, नेचर लवर एंड बोनसाई आर्टिस्ट - फोटो : amar ujala

कार्पल टनल सिंड्रोम 
सीटीएस नाम की इस बीमारी में हाथ की उंगलियों और कलाई से दर्द शुरु होता है। बाद में ये दर्द बढ़कर बाहों तक पहुंच जाता है। इस बीमारी को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कलाई में एक मिडियन नर्व होती है, जिसके दबने से परेशानी उत्पन्न होती है। लगातार टाइपिंग करने से ये समस्या बढ़ती जाती है। इस बीमारी के सबसे अधिक शिकार 18 से 35 साल के लोग होते हैं। युवाओं को ये बीमारी सबसे ज्यादा इसलिए घेरती है क्योंकि वह दिनभर कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करते हैं। इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में भुजंगासन, बकासन, अधोमुख श्वानासन, मयूरासन, चतुरंग दंडासन, नहीं करना चाहिए इससे हाथ पर जोर पड़ता है। 

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गर्भवती महिला - फोटो : shutterstock
प्रेग्नेंट महिलाएं
प्रेग्नेंसी के दौरान हल्के-फुल्के योगासन स्वास्थ्य रहने के लिए भी करना जरूरी है। हालांकि, आजकल महिलाओं को इस दौरान कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। ऐसे में भूलकर भी बालासन, भुजंगासन, बकासन, अधो मुख व्रक्सासन, चतुरंग दंडासन और शवासन बिल्कुल नहीं करने चाहिए। 

 

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कमर दर्द

पीठ और गर्दन का दर्द 
पीठ और गर्दन दर्द की समस्या आम बात है। लगातार ऑफिस में बैठकर काम करना लगभग हम सभी की दिनचर्या में शामिल है। कुर्सी पर सीधे बैठने, लगातार कंप्यूटर स्क्रीन पर ना देखने, थोड़ी देर के अंतराल में बैठे-बैठे आसान एक्सरसाइज करने की सलाह हर डॉक्टर आपको देगा। हालांकि जब 8 से 9 घंटे आपको बैठना ही है तो ये बातें अपनी आदतों में शामिल कर लेनी चाहिए। लेकिन योग के कुछ आसान जैसे पादांगुष्ठासन, धनुरासन, उष्ट्रासन और शवासन नहीं करने चाहिए बल्कि अपने डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। 

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हृदय रोग

हृदय रोग 
तनाव, हर वक्त थकान, अनिद्रा और अस्वस्थ होने के कई ऐसे कारण हैं जो आपको स्वस्थ्य जीवन जीने से रोकते हैं। जिसका सीधा असर आपके दिल पर पड़ता है और हृदय रोग की संभावनाएं दोगुनी बढ़ जाती हैं। ये मामले सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोगों (युवाओं) में भी पाए गए हैं। आपकी जीवनशैली में अच्छे बदलाव बेहद आवश्यक हैं। कई बार स्वास्थ्य रहने के लिए व्यायाम करने की सलाह दी जाती है लेकिन हर रोग का समाधान योग नहीं हो सकता। उसी तरह हृदय रोगियों को भी कुछ योगासन जैसे परिपूर्ण नवासन, वीरासन, सलम्बा शीर्षासन, अंजनेयासन नहीं करने चाहिए। 

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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या

उच्च रक्तचाप
अनियंत्रित जीवनशैली के कारण होने वाली ये स्वास्थ्य समस्या हर वर्ग के लोगों के लिए घातक बन चुकी है। यह एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें धमनियों में रक्त दबाव सामान्य से तेज हो जाता है। सामान्य स्थित में रक्त प्रवाह 120/80 से 140/90 के बीच रहता है। लेकिन जैसे ही ब्लड प्रेशर इससे अधिक होने लगता है उच्च रक्तचाप की समस्या खड़ी हो जाती है। इसमें व्यायाम करने की सलाह तो दी जाती है लेकिन अपने डॉक्टर से अवश्य लें और ऊष्ट्रासन, धनुरासन, उत्थिता पार्श्वकोणासन, मत्स्यासन और अर्धमत्स्येन्द्रासन नहीं करना चाहिए। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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