फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   International Minority Rights Day 2021 15 years of Sachar committee and condition of Minority in India

अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (18 दिसंबर): सच्चर कमिटी के 15 साल और अल्पसंख्यकों का हाल

Sat, 18 Dec 2021 11:44 AM IST
Dr. Aishwarya Jha डॉ. ऐश्वर्या झा
Updated Sat, 18 Dec 2021 11:44 AM IST
सार

अल्पसंख्यक शब्द अल्प और संख्यक जैसे दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दूसरों की तुलना में संख्या में कम होना। अल्पसंख्यक होने के कई पहलू हो सकते हैं परन्तु मुख्यतः इसमें धार्मिक, भाषाई, जातीय पहलुओं को प्रमुखता से देखा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र ने अल्पसंख्यकों की परिभाषा दी है कि  ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो, उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।

विज्ञापन
International Minority Rights Day 2021 15 years of Sachar committee and condition of Minority in India
कानूनी रूप से भारत के संविधान में अल्पसंख्यक की कोई स्पष्ट परिभाषा नही है, किंतु संविधान के कई प्रावधान अनुच्छेद 29, 30 आदि अल्पसंख्यक के हित की रक्षा के लिए संविधान में पहले दिन से हैं। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

अल्पसंख्यक शब्द अल्प और संख्यक जैसे दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दूसरों की तुलना में संख्या में कम होना। अल्पसंख्यक होने के कई पहलू हो सकते हैं परन्तु मुख्यतः इसमें धार्मिक, भाषायी, जातीय पहलुओं को प्रमुखता से देखा जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने अल्पसंख्यकों की परिभाषा दी है कि  ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो, उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।

विज्ञापन

 

कानूनी रूप से भारत के संविधान में अल्पसंख्यक की कोई स्पष्ट परिभाषा नही है, किंतु संविधान के कई प्रावधान अनुच्छेद 29, 30 आदि अल्पसंख्यक के हित की रक्षा के लिए संविधान में पहले दिन से हैं। भारत सरकार, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के रुप में सिख, मुस्लिम, ईसाई, झोरास्ट्रियन,बौद्ध  एवं जैन समुदाय को अल्पसंख्यक अधिसूचित किया गया है।

विज्ञापन

 


क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस?

प्रतिवर्ष भारत सहित पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस 18 दिसंबर को मनाया जाता है। 18 दिसंबर 1992 से सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा, राष्ट्र निर्माण में योगदान के रूप में चिन्हित कर अल्पसंख्यकों के क्षेत्र विशेष में ही उनकी भाषा, जाति, धर्म, संस्कृति, परंपरा आदि की सुरक्षा को सुनिश्चित करने एवं समाज को जागृत करने हेतु मनाया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


भारत में अल्पसंख्यकों के विकास के लिए सन् 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का भी गठन किया गया था बाद में 2006 में अलग से केंद्र सरकार में मंत्रालय भी बनाया गया। अल्पसंख्यक समुदायों के लाभ के लिए यह मंत्रालय समग्र नीति और नियोजन, समन्वय, मूल्यांकन और नियामक ढांचे और विकास कार्यक्रम की समीक्षा कर आगे की योजना बनाता है। वर्ष 2021 -22 के लिए केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय का  बजट 4800 करोड़ से अधिक है, जो पिछले बार के संशोधित आवंटन के मुकाबले करीब 800 करोड़ रुपये ज्यादा है।

International Minority Rights Day 2021 15 years of Sachar committee and condition of Minority in India
बहुचर्चित सच्चर समिति की रिपोर्ट संसद में 30 नवंबर 2006 को को पेश की गई थी। - फोटो : Istock

कैसी है देश में अल्पसंख्यकों की हालत? 

आजादी के 75 साल बाद भी अल्पसंख्यक खास कर मुसलमानों में आर्थिक असमानता, सामाजिक असुरक्षा और अलगाव की भावना कम होने की जगह बढ़ी है, तो जिम्मेदारी तो बनती है। आजादी के 75 वर्ष के बाद भी अल्पसंख्यक के नाम पर हुई तो केवल राजनीति। अल्पसंख्यक में मुसलमान उस समय भी राजनीति का एक मोहरा थे और आज भी हैं। मार्च 2005 में आजादी के 58 साल के बाद देश में मुस्लिम समुदाय के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र में इनके पिछड़ेपन का मूल्यांकन करने के लिए न्यायाधीश राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई।
 

बहुचर्चित सच्चर समिति की रिपोर्ट संसद में 30 नवंबर 2006 को को पेश की गई थी, कुल मिला के 15 साल बीत गए पर हालत जस के तस हैं। सच्चर समिति की रिपोर्ट के 7 मानदंडों के अंतर्गत 76 सुझाव में से 72 को मान लिया गया था। इससे पूर्व भी अल्पसंख्यक कल्याण हेतु जस्टिस रंगनाथ मिश्रा समिति और इसके बाद आई कुंडू समिति (2012) ने डेवलपमेंट डेफिसिट को अल्पसंख्यकों के पिछड़ने का प्रमुख कारण माना।  


अल्पसंख्यक मंत्रालय पर अब भी सच्चर रिपोर्ट के कार्यान्वयन से संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट (2019 तक के) जो संसद में पेश किया गया, इसका अवलोकन करने पर कोई भी नहीं कह सकता कि रिपोर्ट पर कुछ ख़ास प्रगति हुई। 

सच्चर कमिटी ने कई सिफारिश की जैसे सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों लिए एक 'समान अवसर आयोग' की स्थापना की जाए, निर्वाचन क्षेत्रों के अनुचित परिसीमन जिस वजह से लोक सभा एवं विधानसभा में भी उनके नुमाइंदों की संख्या कम हो रही। 11वें एवं 12वें पंचवर्षीय योजना में भी इन मुद्दों पर प्रमुखता से काम करने की बात आई। सब कुछ कागज पर हुआ, धरातल पर नहीं।15 साल  में आधे समय कांग्रेस और आधे समय भाजपा का शासन रहा।

International Minority Rights Day 2021 15 years of Sachar committee and condition of Minority in India
ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून लाकर अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को बहुसंख्यक समाज के महिला के बराबर बताने की कोशिश ऐसा ही प्रयास है। - फोटो : Istock

क्या कहते हैं आकड़े? 

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के शिकायतों  के आंकड़े के अनुसार, 2015 से 2020 (वित्तीय वर्ष ) में कुल 16,882 शिकायतें अल्पसंख्यकों ने दर्ज की जिसमें सबसे अधिक कानून एवं व्यवस्था से सम्बंधित, सर्विस मैटर एवं शिक्षा या शैक्षिक संस्था से सम्बंधित थीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूसरी बार सत्ता में आने पर अपने चिर-परिचित अंदाज में  एक नया नारा दिया, ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’।
 

‘सबका’ शब्द में सभी अल्पसंख्यक वर्ग को सम्मिलित करने का भाव है, मोदी सरकार ने अपने नए नारे के साथ ये एहसास दिलाने का प्रयास किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय का भी विश्वास अर्जित करने के भरपूर प्रयास किए जाएंगे। ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून लाकर अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को बहुसंख्यक समाज के महिला के बराबर बताने की कोशिश ऐसा ही प्रयास है।


समाज के प्रबुद्ध वर्ग का ये मानना है कि ये प्रयास अल्पसंख्यक वर्ग के धर्म के रीति रिवाज से छेड़छाड़ जैसा लगता है। यदि सरकार माइनॉरिटी या माइनॉरिटी सिविल सोसाइटी को विश्वास में लेती तो शायद अच्छा प्रयास होता। गरीब तबके का अल्पसंख्यक दोहरी मार झेल रहा है सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन एवं दूसरा राजीनीतिक मोहरा होने की सजा।

भारत के अल्पसंख्यक नागरिक को देश की मुख्यधारा में लाने के केवल दो मंत्र हो सकते हैं, मिशन मोड में शिक्षा का प्रसार एवं समावेशी सुरक्षित वातावरण का एहसास, तभी सही मायने में इनका समावेशी विकास संभव हो सकेगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed