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पंछी और हम: कहानी पपीहे की, जिसके जीवन में हैं कई रंग

Tanaya Tiwari तान्या तिवारी ठक्कर
Updated Fri, 07 May 2021 11:35 AM IST
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interesting facts about common hawk bird papeeha
वैज्ञानिक भाषा में इसे ब्रूड परसिटिस्म कहा जाता है - फोटो : तान्या तिवारी

हम सभी आम तौर पर पपीहा कहे जाने वाले पक्षी एवं उसके साहित्य और पुस्तकों के विवरण से भली भांति परिचित हैं पपीहे की करुण पुकार का ज़िक्र अक्सर गीतों एवं कविताओं में पाया जाता है। इसके कर्णकर्कश स्वर के कारन इसे ब्रेन फीवर बर्ड भी कहा जाता है। इसका साइंटिफिक नाम (Hierococcyx वरियस ) है। 

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यह  पक्षी माध्यम आकर का होता है अवं सतही तौर पर हॉक प्रजाति के पक्षी  'शिकरा' जैसा प्रतीत होता है। हैरतअंगेज़ तरीके से इसकी उड़ान एवं डालों पर बैठने का तरीका भी शिकरा के सामान है। इसी कारण से इसे हॉक कुक्कू नाम दिया गया है। यह पक्षी भारतीय महाद्वीप पर बहुतायत में पाया जाता है। इसका ठिकाना  पर्णपाती और अर्धसदाबहार जंगल है। आप सभी ने अक्सर इसे अपने बगीचे के आसपास तो देखा होगा या आवाज़ तो सुनी ही होगी।  इसका रंग राख़ के सामान  स्लेटी होता है। पेट कुछ कुछ सफ़ेद होता है और उसमे ऊपर से नीचेे तक  भूरे रंग की बड़ी बड़ी धारियां होती हैं।
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पंखों और पूँछ के पंखों पर भी भूरे रंग की धारियां होती है। चोंच का रंग स्लेटी और दोनों आँखों के किनारे पर एक पीला वृत्ताकारी गोला होता है।  यही इस पक्षी की पहचान है। नर और मादा एक सामान ही प्रतीत होते हैं। यह पक्षी अपने भोजन में छोटे कीड़े और इल्लियां खता है. एक खास बात यह है की हॉक कुक्कू बड़ी ही कुशलता से अत्यधिक बालों वालो कम्बल कीड़े भी खा सकता है। 
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प्रजनन के समय नर पक्षी मादा को लुभाने के लिए अत्यंत ऊंचे स्वर में एक 3 नोट का गीत पुकारता रहता है। नर की कर्णकर्कश आवाज़ गर्मियों से लेकर मॉनसून के आने तक सुनी जा सकती है। इसके दोहरावदार कॉल सुबह होने से शाम ढलने तक सुने जा सकते है. कई  बार यह दूर पेड़ पर बैठा पुकारता रहता है परन्तु अपने रंग ढंग और छलावरण के कारण दिखाई नहीं पड़ता।  

चालाक पक्षी एवं ब्रूड पैरासाइट  
आप सभी जानते हैं की कोयल अपने अंडे किसी और पक्षी के घोंसले में ऱख देने के लिए कितनी बदनाम है। वैज्ञानिक भाषा में इसे ब्रूड परसिटिस्म कहा जाता है, परन्तु आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की केवल कोयल ही  प्राणी जगत का ऐसा एकमात्र पक्षी नहीं है, अपितु हॉक कुक्कू भी एक ब्रूड पैरासाइट है। 

हॉक कुक्कू अपने अंडे जंगल बब्लर  जिन्हे सात भाई भी कहा जाता है, के घोंसले में ऱख छोड़ता है। जब अण्डों से बच्चे  बाहर निकलते हैं तो जंगल  बब्लर के  चूज़ों  से अत्यधिक रूप से शरीरिक समानता होने के कारण बब्लर अपने एवं हॉक कुक्कू के चूज़ों में फर्क नहीं कर पाती है एवं हॉक कुक्कू के चूज़ों को अपने समझ कर बड़ा होने तक उनका भरण पोषण करती रहती है। 

अतः हॉक कुकु कभी भी अपने बच्च्चों को खुद बड़ा नहीं करती, अपितु चालाकी पूर्वक अपने अंडे दूसरे घोंसलों में ऱख कर अपनी ज़िम्मेदारी से उन्मुक्त हो जाती है. हॉक कुक्कू  क्योंकि अपने बच्चों के विकास के लिए दूसरी प्रजातियों पर निर्भर है इसलिए इसे पैरासाइट बर्ड या ब्रुड पैरासाइट बर्ड कहते हैं। 

हमारे आसपास कितने दुर्लभ एवं अति विलक्षण  जीव वास करते हैं  परन्तु फिर भी हम  कितने अनभिज्ञ रहते हैं। अगली बार आपको दूर सुदूर से या आपके बगीचे से किसी पक्षी की पुकार सुनायी दे तो कुछ पल रुक कर सुनियेगा ज़रूर। 

तान्या तिवारी ठक्कर , पेशे से अधिवक्ता हैं एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर , एवं  बॉम्बे हाई कोर्ट, बेंच नागपुर मैं कार्यरत हैं।  

यह श्रंखला 'नेचर कन्ज़र्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशन्स' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें। 

 

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