ISRO ने नारियल के पेड़ से बनाया था पहला लॉन्चिंग पैड, अमेरिका भी मानता है भारत की इस उपलब्धि का लोहा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज भारत अंतरिक्ष शोध क्षेत्र में बड़ी प्रगति कर चुका है। इसकी उपलब्धियों में ऐसे कई चरण शामिल हैं, जिन्होंने विकासशील राष्ट्रों के लिए नई मिसाल पेश की है। जिस तरह दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा अपने बड़े अविष्कारों के लिए दुनियाभर में पहचानी जाती है वहीं इसरो भी अंतरिक्ष में शोध के कई बड़े संकल्प ले रहा है। इसरो कई उपलब्धियों से दुनियाभर में अपना लोहा मनवा चुका है। इसरो की कई उपलब्धियां तो इतनी बड़ी हैं कि उनमें अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों को भी सफलता नहीं मिली है। आज इसरो की गिनती विश्व के सबसे बड़े अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों में होती है।
हम सभी इस बात से अच्छे से वाकिफ हैं कि 50 साल पहले 15 अगस्त 1969 को डॉ. विक्रम साराभाई ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना की थी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे वैज्ञानिक इस सफर के लिए साइकिल और बैलगाड़ी के जरिए निकले थे।
A post shared by All about ISRO (@isro_india) on
साइकल और बैलगाड़ी पर रखकर रॉकेट को इधर से उधर ले जाने वाला देश आज चांद और आसमान पर कब्जा करना सीख गया है। कुछ दिनों पहले भारत ने अपने दूसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रच दिया। ये भारत का चांद पर कदम रखने के लिए दूसरा विशाल मिशन है। इसरो का सफर इस मुकाम पर पहुंच गया है कि आज भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में दुनिया के सबसे शक्तिशाली पांच देशों में से एक है । किसी समय में भारत के उपग्रहों को लॉन्च करने से मना करने वाला अमेरिका खुद भारत के साथ व्यावसायिक समझौता करने को इच्छुक है।
View of the majestic lift-off of #GSLVMkIII-M1 carrying #Chandrayaan2 courtesy:ISRO
A post shared by All about ISRO (@isro_india) on
भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा थे। 1984 में राकेश को दो अन्य सोवियत अंतरिक्षयात्रियों के साथ अंतरिक्ष जाने का मौका मिला। जब राकेश अंतरिक्ष पहुंचे थे तो भारत के लोगों के लिए ये विश्वास न करने जैसा था। जब वह अंतरिक्ष में थे, तब इंदिरा गांधी ने वीडियो कॉलिंग के जरिये उनसे बात की थी। वीडियो में इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा, अंतरिक्ष में भेजने से पहले आपको जो कड़ी ट्रेनिंग दी गई, वह कितनी जरूरी थी। इसके जवाब में राकेश शर्मा कहते हैं- जो ट्रेनिंग दी गई थी, वह बेहद जरूरी थी और उसी की बदौलत हम सब यहां सुरक्षित डॉकिंग कर पाए हैं। इसके बाद इंदिरा ने पूछा- ऊपर से हिन्दुस्तान कैसा दिखता है? इसके जवाब में राकेश शर्मा ने जो कहा था उसे हमेशा याद किया जाता है। राकेश शर्मा ने कहा- "मैं बिना किसी हिचक के कह सकता हूं- सारे जहां से अच्छा..."
प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी: भारत कैसा दिखता है?
— Know Your Legacy (@INCHistory) August 15, 2018
स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा: सारे जहाँ से अच्छा।
Former Prime Minister Indira Gandhi speaks to India's first astronaut, Squadron Leader Rakesh Sharma in space.#IndependenceDayIndia pic.twitter.com/oq4ZEdWzev
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।